5 साल के अर्जुन प्रजापती ने पढ़ीं 3000 से ज्यादा किताबें, ओंटारियो विधानसभा में होगा सम्मान
भारतीय मूल के पांच साल के अर्जुन प्रजापती का IQ स्कोर 141 आया है। उन्हें 29 अक्टूबर 2026 को ओंटारियो की विधानसभा में विशेष सम्मान के लिए बुलाया गया है।
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आजकल पांच साल की उम्र में ज्यादातर बच्चे मोबाइल देखते हैं या अभी लिखना-पढ़ना शुरू ही कर रहे होते हैं। लेकिन भारतीय मूल के अर्जुन प्रजापती की कहानी इससे अलग है। इसी उम्र में वे 3000 से ज्यादा किताबें पढ़ चुके हैं। उन्होंने सिर्फ 18 महीने की उम्र से पढ़ना शुरू कर दिया था।
एक स्टैंडर्डाइज्ड टेस्ट में अर्जुन का IQ स्कोर 141 आया है। इस स्कोर से वे टेस्ट में शामिल लोगों के 99.7 वें पर्सेंटाइल में आते हैं। इतना ही नहीं, वे दुनिया की दो हाई-IQ संस्थाओं 'मेन्सा' और 'इंटरटेल' की सदस्यता के लिए भी योग्य पाए गए हैं।
अर्जुन का परिवार मूल रूप से गुजरात के वडोदरा से जुड़ा है, जबकि उनके मम्मी-पापा कनाडा में रहते हैं। पिता डॉ. विशाल व्ही. प्रजापती डॉक्टर और क्लिनिकल रिसर्चर हैं। मां महिता वकील हैं। करीब 18 महीने की उम्र से ही अर्जुन किताबों में दिलचस्पी दिखाने लगे थे। धीरे-धीरे उनकी रुचि गणित, खगोलशास्त्र, इतिहास, मानव शरीर, आनुवंशिकी और सूक्ष्मजीव विज्ञान जैसे विषयों में बढ़ती गई।
किताबों से उनका लगाव इतना है कि मम्मी-पापा कार में भी आठ से दस किताबें रखते हैं। अर्जुन का कहना होता है कि रास्ते में बोरियत हो तो पढ़ने के लिए किताब होनी चाहिए। उनके सवाल भी अलग किस्म के होते हैं। एक बार उन्होंने पूछा था कि अगर पृथ्वी को बीच से काट दिया जाए तो क्या होगा। वे किसी चीज के बारे में सिर्फ जानना नहीं चाहते, बल्कि उसके पीछे की वजह भी समझना चाहते हैं।
शुरुआत में अर्जुन को ऐसी किताबें दी जाती थीं जिनमें तस्वीरों के साथ अंग्रेजी के अक्षर छपे होते थे। फिर उनकी मां ने उन्हें अक्षरों की आवाज पहचानना और गिनती करना सिखाया। अर्जुन के मन में जो सवाल उठते हैं, उनके जवाब देने के लिए मम्मी-पापा खास तौर पर वक्त निकालते हैं।
जब अर्जुन करीब चार साल के थे, तब उनकी सोचने और चीजें समझने की क्षमता परखने के लिए एक खास टेस्ट लिया गया। इसमें 'स्टैनफोर्ड-बिने इंटेलिजेंस स्केल' के पांचवें वर्जन का इस्तेमाल हुआ। परिवार की दी जानकारी के मुताबिक टेस्ट में अर्जुन का कुल IQ स्कोर 141 रहा। इसके अलावा उनका नॉन-वर्बल IQ स्कोर 149, तर्क करने की क्षमता का स्कोर 144 और जानकारी याद रखकर इस्तेमाल करने की क्षमता का स्कोर 146 रहा।
आसान भाषा में कहें तो IQ टेस्ट से यह जांचने की कोशिश होती है कि कोई इंसान कितना अच्छा तर्क कर सकता है, नई जानकारी को कैसे समझता है और समस्याएं सुलझाने में कितना सक्षम है। हालांकि IQ स्कोर से किसी बच्चे की पूरी तस्वीर या आगे की कामयाबी का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। बच्चे की दिलचस्पी, मेहनत, रचनात्मकता और सीखने के मौके भी उतने ही अहम होते हैं।
अर्जुन को कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और ओंटारियो के प्रीमियर डग फोर्ड की तरफ से भी बधाई मिली है। वे हार्वर्ड यूनिवर्सिटी और मैसाचुसेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) का दौरा भी कर चुके हैं। उन्हें 29 अक्टूबर 2026 को ओंटारियो की विधानसभा में विशेष सम्मान के लिए बुलाया गया है।
अर्जुन की रुचि मानव शरीर और मेडिकल साइंस में भी है। वे रक्त कोशिकाओं, रोग प्रतिरोधक क्षमता और संक्रमण के बारे में पढ़ते हैं। एक बार चोट लगने पर उन्होंने डॉक्टरों से एक्स-रे निकालने के बारे में भी पूछा था। फिर भी उनके पिता बताते हैं कि परिवार ने कभी यह तय नहीं किया कि अर्जुन बड़े होकर डॉक्टर ही बनें।
गणित में अर्जुन को पहाड़े, वर्ग, घन और संख्याओं के पैटर्न पसंद हैं। वे ब्लैक होल, आकाशगंगा, डायनासोर और पृथ्वी की बनावट के बारे में भी जानना चाहते हैं। संगीत, पेंटिंग और विदेशी भाषाओं में भी उनकी दिलचस्पी है।
मम्मी-पापा अर्जुन को अपनी पसंद के हिसाब से सीखने और आगे बढ़ने का मौका देते हैं। वे उन पर ज्यादा पढ़ाई करने या किसी खास क्षेत्र में करियर बनाने का कोई दबाव नहीं डालते। उनके लिए जरूरी है कि पढ़ाई के साथ अर्जुन खेलें, दोस्तों के साथ वक्त बिताएं और खुश रहें।
डॉ. प्रजापती का मानना है कि सिर्फ तेज दिमाग होना काफी नहीं है, नई चीजें सीखने की चाह, मेहनत और दूसरों की मदद करना भी जरूरी है। मम्मी-पापा चाहते हैं कि अर्जुन बड़े होकर अपनी पसंद का क्षेत्र चुनें। गणित, मेडिकल, विज्ञान या किसी भी क्षेत्र में करियर बनाना चाहें, तो अपनी रुचि के हिसाब से फैसला लेने की आजादी उन्हें मिले, यही उनकी उम्मीद है। फिलहाल अर्जुन को किताबें पढ़ना और नए सवालों के जवाब खोजना पसंद है।
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