30,000 रुपये की सैलरी में भी घर मुमकिन, EMI और डाउन पेमेंट का हिसाब समझिए
30,000 रुपये महीने की सैलरी वाले भी घर खरीदने का सपना देख सकते हैं, बशर्ते EMI और डाउन पेमेंट का हिसाब पहले से साफ हो।
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अपना घर हर किसी का सपना होता है, लेकिन सैलरी कम हो तो सवाल उठता है कि यह सपना पूरा होगा या नहीं। 30,000 रुपये महीने की सैलरी वालों के लिए EMI और डाउन पेमेंट का गणित समझना यहां सबसे जरूरी बताया गया है।
पहले EMI की बात। अगर आप 10 लाख रुपये का होम लोन लेते हैं, तो ब्याज दर और लोन की मियाद के हिसाब से EMI हर महीने करीब 10,000 रुपये हो सकती है। असल EMI बैंक की ब्याज दर, लोन की मियाद और दूसरी शर्तों पर टिकी होगी। इसलिए लोन लेने से पहले यह तय कर लेना चाहिए कि EMI भरने के बाद घर के बाकी खर्च चलाने लायक पैसा बचेगा या नहीं।
अब 30,000 रुपये की सैलरी का हिसाब देखिए। घर और किराने पर 8,000 रुपये, बिजली, मोबाइल और दूसरे बिलों पर 3,000 रुपये, सफर पर 4,000 रुपये और बाकी पारिवारिक खर्च पर 5,000 रुपये जाते हैं। कुल खर्च 20,000 रुपये हुआ और खर्च निकालने के बाद 10,000 रुपये बचते हैं।
इसका मतलब यह नहीं कि पूरी बची रकम EMI में झोंक दी जाए। अचानक आने वाले खर्च और इमरजेंसी के लिए भी पैसा हाथ में होना चाहिए। EMI अपने असली खर्च को देखकर तय करें।
अब मान लीजिए आपको 15 लाख रुपये का घर पसंद आया है। बैंक ने 12 लाख रुपये का होम लोन दिया, तो बाकी 3 लाख रुपये आपको अपनी जेब से लगाने होंगे। इसी रकम को डाउन पेमेंट कहते हैं। डाउन पेमेंट के अलावा रजिस्ट्रेशन, स्टांप ड्यूटी और दूसरे जरूरी खर्चों के लिए भी अलग पैसे की जरूरत पड़ सकती है। यानी सिर्फ लोन का इंतजाम काफी नहीं है, बचत भी तैयार होनी चाहिए।
डाउन पेमेंट के लिए नियमित बचत का सहारा लिया जा सकता है। अगर आप हर महीने 5,000 रुपये बचाते हैं, तो 1 साल में 60,000 रुपये, 2 साल में 1.20 लाख रुपये और 3 साल में 1.80 लाख रुपये जमा होंगे। यह हिसाब किसी ब्याज या निवेश पर मिलने वाले रिटर्न के बिना है। यानी तीन साल में 1.80 लाख रुपये जुट सकते हैं, और 3 लाख रुपये के डाउन पेमेंट के लिए ज्यादा वक्त या ज्यादा बचत की जरूरत पड़ सकती है।
लोन लेते वक्त क्या ध्यान रखें, इस पर जानकारों की सलाह है कि अलग-अलग बैंकों की ब्याज दर, प्रोसेसिंग फीस और चुकाने की शर्तों की तुलना कर लें। सिर्फ कम ब्याज दर देखकर फैसला न करें। अपनी नौकरी, आमदनी और बैंक के कागजात ठीक रखना भी काम आ सकता है।
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