2027 के लिए CUET और IPMAT में फर्क क्या है, तैयारी में Supergrads का साथ
बारहवीं के बाद मैनेजमेंट, कॉमर्स या इकोनॉमिक्स की राह चुनने वाले छात्र CUET और IPMAT के बीच उलझते हैं। दोनों परीक्षाओं का फर्क और तैयारी का तरीका।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
बारहवीं के बाद मैनेजमेंट, बिजनेस, इकोनॉमिक्स या कॉमर्स में करियर बनाना हो तो सबसे पहला सवाल यही आता है कि कौन सी एंट्रेंस परीक्षा दी जाए। देश में अंडरग्रेजुएट दाखिले की कई परीक्षाएं हैं, और बहुत से छात्र CUET और IPMAT में से एक चुनने में अटक जाते हैं। 2027 के दाखिले की तैयारी शुरू हो रही है, इसलिए दोनों का फर्क समझना अभी से जरूरी है।
CUET-UG यानी कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) कराती है। इसके स्कोर से हिस्सा लेने वाली यूनिवर्सिटी और संस्थानों के अंडरग्रेजुएट कोर्स में दाखिला मिलता है। इनमें कॉमर्स, इकोनॉमिक्स, ह्यूमैनिटीज, साइंस और कुछ मैनेजमेंट से जुड़े कोर्स शामिल हैं। परीक्षा में भाषा और डोमेन सब्जेक्ट के हिस्से होते हैं, और जहां नियम लागू हों वहां जनरल एप्टीट्यूड टेस्ट भी होता है। लेकिन किस कोर्स के लिए कौन से सब्जेक्ट चाहिए, स्कोर कैसे गिना जाएगा और पात्रता क्या होगी, यह हर यूनिवर्सिटी में अलग है। इसलिए CUET के सब्जेक्ट चुनने से पहले पसंदीदा संस्थान की आधिकारिक शर्तें देख लेना चाहिए।
IPMAT यानी इंटीग्रेटेड प्रोग्राम इन मैनेजमेंट एप्टीट्यूड टेस्ट इंटीग्रेटेड मैनेजमेंट कोर्स में दाखिले से जुड़ी परीक्षा है, खासकर भारतीय प्रबंधन संस्थानों (IIM) के कोर्स के लिए। इंटीग्रेटेड कोर्स में अंडरग्रेजुएट पढ़ाई और पोस्टग्रेजुएट मैनेजमेंट की पढ़ाई एक ही ढांचे में जुड़ी होती है, यानी अलग से बाद में मैनेजमेंट प्रोग्राम करने की जरूरत नहीं पड़ती। एक बात ध्यान रखने की है कि IPMAT एक ऐसी साझा परीक्षा नहीं है जो हर मैनेजमेंट संस्थान मानता हो। IIM इंदौर और IIM रोहतक अपनी अलग परीक्षाएं कराते हैं और अपनी-अपनी दाखिला प्रक्रिया चलाते हैं। दूसरे संस्थानों की चयन प्रक्रिया अलग हो सकती है या वे दूसरी परीक्षाओं के स्कोर भी मान सकते हैं।
दोनों को आमने-सामने रखें तो CUET उन छात्रों के लिए ठीक बैठता है जो कई तरह के अंडरग्रेजुएट कोर्स देखना चाहते हैं और अपने विकल्प खुले रखना चाहते हैं। IPMAT उन छात्रों के लिए बेहतर है जो मैनेजमेंट की पढ़ाई इंटीग्रेटेड कोर्स से ही करने का मन बना चुके हैं। IPMAT में क्वांटिटेटिव एप्टीट्यूड और वर्बल एबिलिटी पर जोर रहता है, जबकि CUET में भाषाएं, डोमेन सब्जेक्ट और लागू एप्टीट्यूड वाले हिस्से आते हैं। इंग्लिश कॉम्प्रिहेंशन और न्यूमेरिकल एबिलिटी जैसे कुछ हिस्से दोनों में मिलते-जुलते हैं, फिर भी दोनों परीक्षाओं को एक जैसा नहीं मान सकते। जो छात्र दोनों की तैयारी करना चाहते हैं, उन्हें टाइमटेबल सोच-समझकर बनाना होगा, ताकि बारहवीं बोर्ड की तैयारी पर असर न पड़े।
इस तैयारी में Supergrads छात्रों की मदद करने का दावा करता है। इसमें व्यवस्थित पढ़ाई की योजना, एक्सपर्ट गाइडेंस, प्रैक्टिस सेशन और परीक्षा पर केंद्रित स्टडी मटेरियल की बात कही गई है। तैयारी के सात हिस्से गिनाए गए हैं: परीक्षा के हिसाब से स्टडी प्लान, क्वांटिटेटिव एप्टीट्यूड में कॉन्सेप्ट की साफ समझ, इंग्लिश और वर्बल एबिलिटी, मॉक टेस्ट और उनका विश्लेषण, पर्सनल गाइडेंस और डाउट सॉल्विंग, टाइम मैनेजमेंट और रिवीजन के साथ प्रोग्रेस की ट्रैकिंग। यह भी कहा गया है कि छात्र कोर्स चुनने से पहले देख लें कि उसमें कौन-कौन सी सुविधाएं सच में शामिल हैं।
तैयारी का रास्ता पांच चरणों में रखा गया है। पहले ताजा आधिकारिक सिलेबस, पात्रता और परीक्षा पैटर्न देखें। फिर बुनियाद पक्की करें। उसके बाद टॉपिक के हिसाब से लगातार प्रैक्टिस और गलतियों का रिकॉर्ड रखें। चौथे चरण में मॉक टेस्ट की संख्या धीरे-धीरे बढ़ाएं और हर टेस्ट का विश्लेषण करें। आखिर में कमजोर हिस्सों और बार-बार पूछे जाने वाले कॉन्सेप्ट का रिवीजन करें। साथ ही कुछ आम गलतियों से बचने की सलाह है: कोर्स की जानकारी जुटाए बिना परीक्षा चुन लेना, आधिकारिक नोटिफिकेशन को नजरअंदाज करके पिछले सालों के पैटर्न पर टिके रहना, बिना टाइमटेबल के पढ़ना, मॉक टेस्ट देकर उन्हें न देखना, स्कूल की परीक्षा को हल्के में लेना और यह मान लेना कि एक परीक्षा हर जगह दाखिला दिला देगी।
कुल मिलाकर, 2027 के लिए सही परीक्षा छात्र की रुचि, मजबूत पक्ष, पसंदीदा संस्थान और लंबे करियर लक्ष्य पर निर्भर करती है। परीक्षा पैटर्न, मार्किंग स्कीम, सब्जेक्ट कॉम्बिनेशन और पात्रता की पक्की जानकारी संबंधित संस्थानों और अधिकारियों के जारी आधिकारिक नोटिफिकेशन से ही पुष्ट करनी चाहिए।