वेतन बराबरी की मांग पर 5 नवंबर को सामूहिक छुट्टी लेंगे महाराष्ट्र के 34,500 कोर्ट कर्मचारी
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बॉम्बे हाईकोर्ट के कर्मचारियों जैसे वेतन और सुविधाओं की मांग पर निचली अदालतों के कर्मचारी 5 नवंबर को सामूहिक आकस्मिक छुट्टी पर जाएंगे। सरकार ने फैसला नहीं लिया तो 16 नवंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी है।
महाराष्ट्र की निचली अदालतों का कामकाज बड़े पैमाने पर ठप होने की ओर बढ़ रहा है। राज्य भर के करीब 34,500 न्यायिक कर्मचारी गुरुवार, 5 नवंबर को सामूहिक आकस्मिक छुट्टी पर जाएंगे। इनमें पुणे की अदालतों का स्टाफ भी शामिल है। कर्मचारियों की मांग है कि उन्हें बॉम्बे हाईकोर्ट के कर्मचारियों के बराबर वेतन और सेवा संबंधी लाभ मिलें। उन्होंने चेतावनी दी है कि सरकार ने मांगों को अनदेखा करना जारी रखा तो 16 नवंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू होगी।
कर्मचारियों की मुख्य मांग यही है कि महाराष्ट्र की निचली अदालतों में काम करने वालों को वही वेतन और लाभ मिलें, जो बॉम्बे हाईकोर्ट के कर्मचारियों को मिलते हैं। उनका आरोप है कि सालों से ज्ञापन देने और बार-बार पूछताछ करने के बावजूद राज्य सरकार ने इस पर कोई फैसला नहीं लिया।
यह सामूहिक छुट्टी आंदोलन के सिलसिले की ताजा कड़ी है। कर्मचारियों ने इससे पहले 6 सितंबर को एक दिन का विरोध प्रदर्शन किया था। फिर 16 और 17 अक्टूबर को दो दिन काली पट्टी बांधकर काम किया। इन प्रतीकात्मक विरोधों से कोई हल नहीं निकला, तो कर्मचारी संगठनों ने अब आंदोलन तेज करने का फैसला किया है।
मामला न्यायिक स्तर तक भी पहुंच चुका है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने जनवरी 2025 में राज्य सरकार को इस मुद्दे पर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था। कर्मचारियों का आरोप है कि बार-बार याद दिलाने और ज्ञापन देने के बाद भी सरकार ने अब तक वह रिपोर्ट जमा नहीं की है।
कर्मचारियों के मुताबिक लंबे समय से चली आ रही प्रशासनिक निष्क्रियता से वे परेशान हैं। इसी वजह से कई संगठन एक साथ आए हैं और पूरे राज्य में मिलकर आंदोलन चला रहे हैं। इनमें बेलिफ कर्मचारी महासंघ, स्टेनोग्राफर्स एसोसिएशन, ग्रुप डी कर्मचारी महासंघ और ग्रुप सी कर्मचारी महासंघ शामिल हैं।
5 नवंबर की छुट्टी ऐसे वक्त पर पड़ रही है, जब दिवाली की छुट्टियों से पहले सिर्फ दो कामकाजी दिन बचे हैं। अगर विवाद नहीं सुलझा तो 16 नवंबर से प्रस्तावित अनिश्चितकालीन हड़ताल से न्यायिक प्रशासन और ज्यादा प्रभावित हो सकता है। सुनवाई और आदेशों का इंतजार कर रहे हजारों पक्षकारों को परेशानी झेलनी पड़ सकती है।
आंदोलन का असर अदालतों के प्रशासन, मामलों की प्रक्रिया और रोजमर्रा के न्यायिक काम पर पड़ सकता है। वकीलों, पक्षकारों और विचाराधीन कैदियों के लिए पहले से बोझ से दबी न्याय व्यवस्था में अनिश्चितता और बढ़ने का डर है।
शिवाजीनगर कोर्ट और बॉम्बे हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले वकील राकेश सोनार ने कर्मचारियों की मांगों का समर्थन किया है। उन्होंने कहा, "न्यायिक कर्मचारी खुद न्याय से वंचित हैं। उनकी मांगें जायज और कानूनी रूप से सही हैं। सरकार को जल्द फैसला लेकर उन्हें पूरा करना चाहिए। कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर गए तो अदालतों का कामकाज बुरी तरह प्रभावित होगा और आरोपियों और पक्षकारों को भारी परेशानी होगी।"
वकीलों के कुछ वर्गों ने भी आंदोलन को समर्थन दिया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि लंबे समय तक कामकाज बाधित रहा तो अपने मामलों की सुनवाई का इंतजार कर रहे पक्षकारों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। 34,500 कर्मचारियों के शामिल होने की तैयारी के बीच राज्य सरकार पर दबाव है कि वह प्रस्तावित हड़ताल से पहले वेतन बराबरी का यह पुराना मुद्दा सुलझाए।
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