कोथरूड में निर्माण कार्य से धूल, जाम और फुटपाथ पर कब्जे से लोग परेशान
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
मृत्युंजय मंदिर के पास मॉल, होटल और कमर्शियल यूनिट का काम चल रहा है। निवासी धूल, भारी गाड़ियों और बंद फुटपाथ की शिकायत कर रहे हैं, ठेकेदार का कहना है कि हालात सुधरे हैं।
कोथरूड में मृत्युंजय मंदिर के पास का जो रास्ता कभी आम लोगों की आवाजाही से भरा रहता था, वहां अब मॉल, होटल और कमर्शियल यूनिट बनाने का काम चल रहा है। यहां के लोगों का कहना है कि महीनों से वे इस काम की मार झेल रहे हैं। भारी मशीनें और निर्माण का सामान सार्वजनिक जगह घेरे हुए हैं, जिससे फुटपाथ चलने लायक नहीं बचे हैं।
स्कूल वैन, दोपहिया और चार पहिया चालक और पैदल चलने वाले, सबको रोज जाम से जूझना पड़ता है। वजह यह बताई जा रही है कि दिन के व्यस्त घंटों में भी बड़े निर्माण वाहन सड़क पर चलते हैं। यह सब अंडरपास के काम के लिए छह महीने सड़क बंद रहने के ठीक बाद हुआ है। हवा में सीमेंट की मोटी धूल है और सुरक्षा के इंतजाम की कमी से हर आने जाने वाले पर खतरा बना रहता है।
मौके पर पहुंचे रिपोर्टरों ने जब हवा में सीमेंट और कंक्रीट की धूल समेत नागरिक सुविधाओं की गड़बड़ियां दर्ज करना शुरू किया, तो एक निर्माण मजदूर फौरन सड़क पर पानी छिड़कने लगा, ताकि धूल न उड़े।
स्थानीय निवासी अशोक मेदनकर ने बताया कि लोहे की भारी छड़ों के बंडल लादे बड़े क्रेन रोज इस सड़क से गुजरते हैं। उनके मुताबिक, "खासकर तब डर लगता है जब बच्चे, बुजुर्ग और दोपहिया वाले आसपास होते हैं। रिहायशी सड़क को निजी निर्माण स्थल की तरह नहीं बरता जा सकता। हादसा हुआ तो जिम्मेदारी कौन लेगा?"
इलाके की एक और निवासी अनिता देशमुख ने कहा, "फुटपाथ लोगों के सुरक्षित चलने के लिए है। लेकिन निर्माण मजदूरों ने उसे अपनी निजी चाय की दुकान और बाइक पार्किंग बना लिया है। पैदल चलने वालों को भारी गाड़ियों के बीच सड़क पर उतरना पड़ता है और जान जोखिम में रहती है। सुरक्षित चलने का हमारा हक ही छिन गया है।"
गणेश शिंदे ने कहा, "हमें लगा था कि छह महीने बाद सड़क खुलेगी तो राहत मिलेगी, पर हालत में मुश्किल से ही सुधार हुआ है। धूल, भारी मशीनें, टूटे फुटपाथ और कब्जे रोज परेशान करते हैं। टहलने निकलना भी मुश्किल हो गया है। हम चाहते हैं कि किसी के चोटिल होने से पहले पीएमसी दखल दे।"
निखिल मेडने के मुताबिक इलाके के लोग रोज सीमेंट की धूल में सांस लेने को मजबूर हैं और आसपास का माहौल धीरे धीरे कंक्रीट के ढेर में बदल रहा है। उन्होंने कहा कि कई पेड़ काटे जा चुके हैं और जो थोड़े बचे हैं, वे भी मरते दिख रहे हैं, क्योंकि जड़ों के पास सीमेंट जमा हो रहा है। मेडने ने कहा, "फुटपाथों पर निर्माण मजदूरों की निजी बाइकें खड़ी हैं और चल रहे निर्माण की वजह से एक पूरा फुटपाथ गायब हो गया है। लोहे की छड़ें और दूसरे खतरनाक सामान ढोने वाली भारी गाड़ियां लगातार सड़क से गुजरती हैं, जिससे आने जाने वालों को खतरा है।"
पीएमसी के बिल्डिंग परमिशन विभाग के इंस्पेक्टर योगेश भोसले ने कहा, "कंक्रीट की धूल से हो रहे वायु प्रदूषण की शिकायतों को लेकर ठेकेदार को पत्र जारी किया जाएगा। बताया गया है कि इसकी वजह से आसपास के निवासियों और राहगीरों को सांस लेने में दिक्कत हुई है। ठेकेदार को फौरन एहतियाती कदम उठाने और समस्या सुलझाने का निर्देश दिया जाएगा।" भोसले ने साफ किया कि फुटपाथ और सड़क से जुड़ी शिकायतें पीएमसी के उन विभागों के पास ले जानी होंगी, जिनके जिम्मे ये काम हैं।
साइट के ठेकेदार बालाजी कावठले, जो आरपीजी ग्रुप की कंपनी केईसी इंटरनेशनल की ओर से बोल रहे थे, ने बताया कि इलाके में पांच ठेकेदार अलग अलग निर्माण स्थल संभाल रहे हैं। इनमें अंडरपास और किर्लोस्कर बिल्डिंग के डी ब्लॉक के पास नाले पर बन रहा पीएमसी का पुल भी शामिल है। उन्होंने कहा कि 2024 के मानसून में पानी भरने के बाद सड़क को चौड़ा करने और ऊंचा उठाने के लिए उसे फिर बंद करना पड़ सकता है।
कावठले ने कहा, "धूल रोकने के लिए रोज पानी छिड़का जाता है और रोशनी वाले एक्यूआई बोर्ड प्रदूषण का स्तर दिखाते हैं। पीएमसी के संशोधित दिशानिर्देशों के तहत रात 9 बजे निर्माण बंद हो जाता है। पुलिस मार्शल पालन पर नजर रखते हैं और नगर निगम के अधिकारी समय समय पर जांच करते हैं।" निवासियों की धूल, ट्रैफिक और असुविधा की शिकायतें मानते हुए उन्होंने कहा, "पिछले छह महीनों में हालात करीब 75 फीसदी सुधरे हैं। फुटपाथ की दुकानें भी प्रोजेक्ट परिसर के भीतर शिफ्ट की जाएंगी।"
उन्होंने यह भी जोड़ा कि वीकेंड पर निर्माण अब सुबह 6 से शाम 5 बजे तक की इजाजत है, जबकि कोथरूड में वीकडे के काम और भारी गाड़ियों की आवाजाही पर सुबह 11 से शाम 5 बजे के बीच कोई पाबंदी नहीं है। किर्लोस्कर का यह प्रोजेक्ट 20 मंजिला होगा, जिसमें 16 मंजिलें बन चुकी हैं। कावठले के मुताबिक सड़क और आसपास की असुविधा अब भी चिंता की बात है, पर निर्माण पीएमसी के दिशानिर्देशों और सुरक्षा नियमों के तहत आगे बढ़ रहा है।
रिपोर्टरों ने एक महिला को सड़क पर खड़े खुले कंटेनर की तस्वीरें लेते देखा, जिसमें से लंबी लोहे की छड़ें खतरनाक ढंग से बाहर निकली थीं। इससे हादसे का खतरा था और ट्रैफिक भी रुक रहा था। तस्वीरों के बारे में पूछने पर महिला ने खुद को साइट की कर्मचारी बताकर कुछ कहने से मना कर दिया और जल्दी से निर्माण स्थल की ओर लौट गई।
किर्लोस्कर के मार्केटिंग ऑफिस में सिक्योरिटी वालों ने जाने नहीं दिया और साइट इंडक्शन की अनिवार्य प्रक्रिया का हवाला दिया। कावठले के मुताबिक निर्माण परिसर में जाने से पहले आगंतुकों को ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर समेत मेडिकल जांच करानी होती है, खासकर इसलिए कि ऊंची, अधूरी मंजिलों पर सुरक्षा दीवारें नहीं हैं।
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