पुणे के BORI में महाराष्ट्र के इतिहास पर 280 पन्नों की कॉफी टेबल बुक का विमोचन
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फोर्स मोटर्स के चेयरमैन डॉ. अभय फिरोदिया ने "गिफ्ट ऑफ द सह्याद्रिज: द स्टोरी एंड ग्लोरी ऑफ महाराष्ट्र" का विमोचन किया।
शिवाजीनगर, 3 नवंबर 2026: फोर्स मोटर्स लिमिटेड के चेयरमैन डॉ. अभय फिरोदिया ने पुणे के भंडारकर ओरिएंटल रिसर्च इंस्टिट्यूट (BORI) में शनिवार, 31 अक्टूबर 2026 को एक कॉफी टेबल बुक का विमोचन किया। किताब का नाम है "Gift of the Sahyadris: The Story and Glory of Maharashtra"। यह 280 पन्नों की है और इसमें महाराष्ट्र का इतिहास दर्ज किया गया है।
किताब हेरिटेज इंडिया कम्युनिकेशंस प्रा. लि. ने प्रकाशित की है। इसमें महाराष्ट्र के इतिहास को प्रागैतिहासिक काल और शुरुआती सभ्यताओं से लेकर 1 मई 1960 को राज्य के गठन तक समेटा गया है। इसी सिलसिले में इलाके के आदिवासी समुदायों, प्राचीन गुफाओं, किलों, मराठा काल, पेशवाई, सामाजिक सुधार आंदोलनों और संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन पर भी बात की गई है।
कार्यक्रम में पुणे के डेक्कन कॉलेज के पूर्व कुलाधिपति डॉ. जी.बी. देगलूरकर और भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद के पूर्व अध्यक्ष डॉ. ए.पी. जामखेडकर मौजूद थे। दोनों कार्यक्रम के सम्माननीय अतिथि (Guests of Honour) थे। डॉ. फिरोदिया BORI की रेगुलेटिंग काउंसिल के भी चेयरमैन हैं और वे मुख्य अतिथि रहे।
किताब पत्रकार और लेखिका कल्याणी सरदेसाई ने लिखी है और उन्होंने ही इसकी रचनात्मक परिकल्पना की है। रिसर्च पैनल में इतिहासकार डॉ. अजित आपटे, प्रोफेसर पी.के. घाणेकर और डॉ. मंजिरी भालेराव शामिल हैं। किताब के चित्र राहुल देशपांडे, अनंत देरे, तेजस मोडक और मधुमिता शिंदे ने बनाए हैं।
विमोचन के मौके पर सरदेसाई ने कहा कि किताब का मकसद महाराष्ट्र का इतिहास आम पाठकों तक आसान तरीके से पहुंचाना है, और ऐतिहासिक सटीकता भी बनी रहे। उन्होंने इलाके की अलग सांस्कृतिक पहचान और अलग-अलग दौर में उसके बदलते स्वरूप का भी जिक्र किया।
डॉ. फिरोदिया ने भारत के ऐतिहासिक आर्थिक विकास में व्यापार की भूमिका पर बात की। उन्होंने कहा कि आज महाराष्ट्र की जो समृद्धि है, वह औद्योगीकरण, उद्यमशीलता और कौशल विकास से जुड़ी हुई है।
किताब सह्याद्री पर्वतमाला के भौगोलिक महत्व को भी परखती है। इसमें बताया गया है कि इस इलाके की नदी प्रणालियों और जैव विविधता को गढ़ने में सह्याद्री की क्या भूमिका रही, और छत्रपति शिवाजी महाराज के उदय व स्वराज्य की स्थापना के दौरान इसका ऐतिहासिक महत्व खास तौर पर कैसा रहा।
यह विमोचन ऐसे वक्त हुआ है जब 2025 में मराठा मिलिट्री लैंडस्केप्स को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया। किताब में महाराष्ट्र के किलों के साथ अजंता और एलोरा की गुफाओं समेत दूसरे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों को भी जगह दी गई है।
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