वैष्णवी हगवणे मौत केस में सास लता समेत तीन आरोपियों को हाई कोर्ट से जमानत
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
बॉम्बे हाई कोर्ट ने 25,000 रुपये के निजी मुचलके पर तीनों को राहत दी। कोर्ट ने साफ किया कि जमानत का मतलब बरी होना नहीं है।
पुणे, 7 नवंबर 2026: वैष्णवी हगवणे की कथित दहेज हत्या के मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने तीन आरोपियों को जमानत दे दी है। इनमें वैष्णवी की सास लता हगवणे, ब्रदर-इन-लॉ सुशील हगवणे और परिवार के दोस्त नीलेश चव्हाण शामिल हैं। 24 साल की वैष्णवी की मौत 16 मई 2025 को भुकुम में उनके ससुराल में हुई थी।
जस्टिस मिलिंद एन. जाधव की सिंगल जज बेंच ने तीनों को 25,000 रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दी। बेंच ने कहा कि अभी तक सामने रखी सामग्री से पहली नजर में ऐसा कोई काम या उकसावा साबित नहीं होता, जिसकी वजह से वैष्णवी इतना बड़ा कदम उठातीं।
कोर्ट ने यह भी साफ कहा कि जमानत मिलने का मतलब बरी होना नहीं है। तीनों आरोपियों को जांच में सहयोग करना होगा, सबूतों से छेड़छाड़ नहीं करनी होगी, गवाहों को प्रभावित नहीं करना होगा और सुनवाई में नियमित रूप से हाजिर रहना होगा।
जमानत अर्जियों पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि वैष्णवी के शरीर पर मिले चोट के निशान पहली नजर में तीनों अर्जीकर्ताओं की तरफ नहीं, बल्कि उनके पति शशांक की तरफ इशारा कर सकते हैं। घटना वाले दिन शशांक घर में मौजूद थे। कोर्ट के मुताबिक लता उस दिन घर पर नहीं थीं और सुशील अलग रहते थे। नीलेश चव्हाण वैष्णवी की सिस्टर-इन-लॉ के दोस्त हैं और उनका नाम तो FIR में भी नहीं था।
बेंच ने वैष्णवी और शशांक के बीच हुई WhatsApp बातचीत का भी जिक्र किया। कोर्ट ने कहा कि इन मैसेज से लगता है कि वैष्णवी खुलकर बोलने वाली थीं और जवाब देती थीं। कोर्ट ने यह भी देखा कि किसी भी बातचीत या मैसेज में सुशील या चव्हाण का नाम नहीं आता।
कोर्ट ने यह भी कहा कि अभियोजन पक्ष के जरिए वैष्णवी के पिता ने जो भावनाएं रखी हैं, उनसे वह प्रभावित नहीं हो सकता। उसे रिकॉर्ड पर मौजूद पूरी सामग्री को समग्र रूप से परखना होता है।
मामले की पृष्ठभूमि यह है कि 16 मई 2025 को वैष्णवी ससुराल में सीलिंग फैन से लटकी मिली थीं। पोस्टमॉर्टम में उनके शरीर पर कई चोट के निशान पाए गए। इसके बाद ससुराल वालों पर दहेज के लिए प्रताड़ना, घरेलू हिंसा और शारीरिक व मानसिक उत्पीड़न के आरोप लगे।
वैष्णवी के पिता अनिल कसपटे की शिकायत पर बावधन पुलिस ने 17 मई 2025 को वैष्णवी के पति शशांक, सास लता और सिस्टर-इन-लॉ करिश्मा हगवणे को गिरफ्तार किया था। बाद में ससुर राजेंद्र हगवणे, सुशील और परिवार के दोस्त चव्हाण भी गिरफ्तार हुए।
अब लता, सुशील और चव्हाण को जमानत मिल चुकी है, जबकि शशांक, राजेंद्र और करिश्मा अब भी जेल में हैं।
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