नाशिक कुंभ: मुंबई, पुणे समेत कई शहरों से हेलिकॉप्टर से त्र्यंबकेश्वर पहुंचने का प्रस्ताव
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नाशिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभमेले में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए प्रशासन ने हवाई सफर का विकल्प सामने रखा है। सेवा अभी प्रस्तावित है।
नाशिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभमेले में लाखों श्रद्धालु आने वाले हैं। उनका सफर आसान बनाने के लिए प्रशासन ने हवाई यातायात का विकल्प सामने रखा है। त्र्यंबकेश्वर में हेलिपोर्ट की सुविधा तैयार करके प्राइवेट हेलिकॉप्टर के जरिए श्रद्धालुओं को सीधे मंदिर परिसर के पास पहुंचाने की योजना पर काम चल रहा है।
प्राइवेट हेलिकॉप्टर चलाने वालों से इस प्रस्ताव पर सकारात्मक जवाब मिला तो 2 नवंबर से प्रायोगिक तौर पर सेवा शुरू होने की संभावना है। हालांकि यह सेवा अभी सिर्फ प्रस्तावित है। असल में कब शुरू होगी और शुल्क कितना होगा, इस पर अंतिम फैसला होना बाकी है।
योजना के मुताबिक मुंबई, नवी मुंबई, पुणे, सूरत, जलगांव, धुले और छत्रपति संभाजीनगर से हेलिकॉप्टर के जरिए सीधे त्र्यंबकेश्वर पहुंचा जा सकेगा। बताया गया है कि इन शहरों से त्र्यंबकेश्वर पहुंचने में सिर्फ 40 से 50 मिनट लगेंगे। इस सफर के लिए 6 से 8 यात्रियों की क्षमता वाले हेलिकॉप्टर इस्तेमाल करने का प्रस्ताव है। इसके पीछे मकसद यह है कि सड़क के सफर में लगने वाला वक्त बचे और भीड़ के दिनों में श्रद्धालुओं की आवाजाही ज्यादा सलीके से संभाली जा सके।
त्र्यंबकेश्वर में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के दौरे के वक्त 3 हेलिपैड बनाए गए थे। प्रशासन का इरादा आगे इन्हीं का इस्तेमाल करने का है। इस सुविधा को बढ़ाकर प्राइवेट विमान सेवा और हेलिकॉप्टर चलाने वालों के सहयोग से पैसे लेकर दर्शन पैकेज देने का प्रस्ताव रखा गया है।
हेलिकॉप्टर से उतरने के बाद श्रद्धालु त्र्यंबकेश्वर मंदिर और कुशावर्त तीर्थ तक आसानी से पहुंच सकें, इसके लिए स्थानीय टैक्सी वालों से तालमेल बिठाया जाएगा। हेलिपैड से आगे के सफर के लिए अलग ट्रांसपोर्ट व्यवस्था जोड़ने की योजना है। इससे श्रद्धालुओं का वक्त बचेगा और स्थानीय टैक्सी चालकों को रोजगार के नए मौके भी मिल सकते हैं।
प्राइवेट हेलिकॉप्टर चलाने वालों को दिए गए प्रस्ताव के मुताबिक हवाई सफर, स्थानीय ट्रांसपोर्ट और करीब 2,500 रुपये के प्रवेश पास के साथ दर्शन की सुविधा एक ही पैकेज में देने का इरादा है। इस पूरी व्यवस्था से सिर्फ 4 घंटे में त्र्यंबकेश्वर के दर्शन कराने का लक्ष्य रखा गया है। कुंभमेले के दौरान भारी भीड़ होने की संभावना को देखते हुए यह सेवा काम की साबित हो सकती है।
आने वाले सिंहस्थ कुंभमेले में इस सेवा को अच्छा रिस्पॉन्स मिला तो कुंभमेले के बाद भी इसे हमेशा के लिए जारी रखने पर विचार किया जाएगा। फिलहाल यह सिर्फ प्रस्ताव है। सेवा कब से शुरू होगी, पैकेज का अंतिम शुल्क क्या होगा और सफर की शर्तें क्या रहेंगी, इस बारे में आधिकारिक घोषणा होना बाकी है।
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