सतेज पाटील का सरकार पर वार: किसान आत्महत्या, माइक्रोफाइनेंस कंपनियां और वोटर लिस्ट पर सवाल
कांग्रेस नेता और विधायक सतेज पाटील ने किसानों की आत्महत्या, माइक्रोफाइनेंस कंपनियों और वोटर लिस्ट से नाम हटाने के मुद्दे पर राज्य सरकार को घेरा।
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कांग्रेस नेता और विधायक सतेज पाटील ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने किसानों की आत्महत्या, माइक्रोफाइनेंस कंपनियों की कथित दादागिरी, वोटर लिस्ट में गड़बड़ियों और पेड़ों की कटाई को लेकर सरकार को घेरा। साथ ही उन्होंने गोकुल दूध सहकारी संघ के निदेशकों से अपील की कि वे बहुमत के फैसले का सम्मान करें और सहकारी क्षेत्र में लोकतांत्रिक उसूलों को कायम रखें।
गोकुल के चुनाव नतीजों के बाद हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में पाटील ने कहा कि उनके पैनल को साफ बहुमत मिला है। 25 में से 13 निदेशक उनके साथ हैं। बाकी 12 निदेशकों को तकनीकी दलीलों के पीछे छिपने के बजाय जनादेश मानना चाहिए। पाटील ने कहा, "अगर हमें सहकारी क्षेत्र में मिसाल कायम करनी है, तो बाकी 12 निदेशकों को तकनीकी बातों में उलझने के बजाय बहुमत और लोगों के दिए जनादेश का सम्मान करना चाहिए।"
गोकुल की विरासत का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह संस्था आनंदराव पाटील चुयेकर जैसे नेताओं की मेहनत से बड़ी हुई है। उनका कहना था कि संस्था के विकास में योगदान देने वाले नेता के परिवार से अध्यक्ष बने, तो कामकाज में निरंतरता बनी रहेगी। पाटील के मुताबिक सहकारी क्षेत्र से जुड़े हसन मुश्रीफ और विनय कोरे ने जो रुख लिया है, उसका असर पूरे महाराष्ट्र पर पड़ सकता है। उन्हें भरोसा है कि 29 तारीख की बैठक में सभी निदेशक आएंगे, कोरम पूरा होगा और सब मिलकर संस्था को मजबूत करने के लिए काम करेंगे।
किसानों के संकट पर बोलते हुए पाटील ने आरोप लगाया कि आत्महत्याएं होती रहीं और सरकार वक्त पर कदम उठाने में नाकाम रही। उन्होंने सवाल किया कि अल नीनो का खतरा पहले से पता होने के बावजूद खरीफ सीजन की शुरुआत में किसानों को सही सलाह क्यों नहीं दी गई। सरकार के प्रस्तावित राहत पैकेज की भी उन्होंने आलोचना की। उनके मुताबिक कर्ज के पुनर्गठन का वादा किसानों को कोई असली राहत नहीं देगा। कांग्रेस की मांग फसल कर्ज की पूरी माफी है। पाटील ने कहा कि सरकार ने नाकाफी मदद दी है और किसानों की तकलीफ को हल्के में ले रही है।
नांदेड़ में एक किसान से जुड़ी घटना की निंदा करते हुए पाटील ने माइक्रोफाइनेंस कंपनियों के कथित जबरदस्ती वाले तरीकों पर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि क्या राज्य में कानून व्यवस्था चरमरा गई है। उनकी मांग है कि ऐसी कंपनियों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या के मामले दर्ज किए जाएं। साथ ही राज्य सरकार सेबी (SEBI) और रिजर्व बैंक (RBI) में शिकायत करे। उन्होंने राज्य के कृषि मंत्री और सहकारिता मंत्री पर भी निशाना साधा और कहा कि इस संकट के वक्त दोनों कहीं नजर नहीं आए।
वोटर लिस्ट के मुद्दे पर पाटील का आरोप है कि फॉर्म 7 का गलत इस्तेमाल करके मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं। उनका दावा है कि हर विधानसभा क्षेत्र में 5,000 से 6,000 नाम बिना सोचे समझे काटने की कोशिश हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि नाम हटाने के निर्देश भाजपा के बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) तक पहुंच चुके हैं। कांग्रेस की सख्त मांग है कि मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पारदर्शी तरीके से हो।
पाटील ने यह भी बताया कि 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में राहुल गांधी की अगुवाई में बड़ी रैली होगी। उनके मुताबिक कथित "वोट चोरी" का मुद्दा राहुल गांधी के नेतृत्व में राष्ट्रीय स्तर पर अहम बन गया है।
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