सैदोंगर जंगल में पेड़ कटाई पर बवाल, 15,000 करोड़ की बिजली परियोजना पर सियासत गरम
कर्जत तालुका के सैदोंगर में टॉरेंट पावर की प्रस्तावित पंप स्टोरेज परियोजना के लिए पेड़ कट रहे हैं। गांव वाले, पर्यावरण प्रेमी और विपक्ष नाराज हैं, जबकि मुख्यमंत्री फडणवीस इसे स्वच्छ ऊर्जा की जरूरत बता रहे हैं।
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महाराष्ट्र के कर्जत तालुका में सैदोंगर के जंगल में आरियां चल रही हैं और इसके साथ राज्य की राजनीति भी गरमा गई है। गुजरात की टॉरेंट पावर की 15,000 करोड़ रुपये की प्रस्तावित हाइड्रो परियोजना पाली तर्फे कोतवाल खालाटी में बननी है। इससे गांव वाले, पर्यावरण प्रेमी और विपक्ष के नेता नाराज हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का कहना है कि यह स्वच्छ ऊर्जा के लिए जरूरी है और विपक्ष इस पर सिर्फ राजनीति कर रहा है।
परियोजना के लिए 640 हेक्टेयर वन भूमि और 230 हेक्टेयर निजी जमीन चाहिए। इलाके के किसान और गांव वाले इसका कड़ा विरोध कर रहे हैं। स्थानीय लोग एक कड़वी विडंबना की ओर इशारा करते हैं। वन भूमि पर जो पेड़ अब काटे जा रहे हैं, उन्हें गांव वालों ने खुद श्रमदान से लगाया और पाला था। अब डूब क्षेत्र के वही पेड़ खत्म किए जा रहे हैं।
कटाई के समय को लेकर भी आरोप लग रहे हैं। चर्चा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 3 नवंबर को परियोजना के भूमिपूजन के लिए आ सकते हैं और जगह का हवाई जायजा ले सकते हैं। आरोप है कि कंपनी प्रशासन ने जल्दबाजी में कटाई करवाई, ताकि नजारे में कोई रुकावट न रहे। खबरों के मुताबिक सैदोंगर जंगल में सौ साल पुराने पेड़ बिजली के कटरों से काटे जा रहे हैं और लकड़ी ढोने के लिए मजदूर लगाए गए हैं।
सियासी पारा चढ़ गया है। शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने मौके पर जाकर पेड़ कटाई का विरोध दर्ज कराया। उन्होंने टॉरेंट पावर की प्रस्तावित परियोजना पर मुख्यमंत्री फडणवीस पर तीखा हमला बोला। 6 से 7 लाख पेड़ कटने की आशंका पर भड़के ठाकरे ने पूछा कि क्या सरकार महाराष्ट्र को रेगिस्तान बनाना चाहती है। उन्होंने कहा, "आप मेगावाट बना रहे हैं या महाराष्ट्र को बर्बाद कर रहे हैं? विकास टिकाऊ होना चाहिए।" उन्होंने गांव वालों के लिए पारदर्शी जन सुनवाई की मांग भी की।
ठाकरे ने सरकार के 500 करोड़ रुपये के पीआर खर्च पर तंज कसा, जो उनके मुताबिक "झूठी कहानियां" फैलाने के लिए है। उन्होंने स्थानीय विधायकों को भी घेरा कि वे जनहित के बजाय कॉरपोरेट लालच का साथ दे रहे हैं। साथ ही उन्होंने विरोध कर रहे स्थानीय लोगों को पूरा समर्थन देने की बात कही। मनसे प्रमुख राज ठाकरे बुधवार को मौके पर जाने वाले हैं और माना जा रहा है कि परियोजना का विरोध और बढ़ेगा।
कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार ने भी परियोजना पर निशाना साधा। उन्होंने इसे भीमाशंकर इलाके में करीब 600 एकड़ जंगल की कटाई से जोड़ा। उनका आरोप है कि गुजरात के उद्योगपतियों के लिए जंगल खत्म किए जा रहे हैं। उन्होंने पूछा, "गुजरात की कंपनी की परियोजना के लिए इतना जंगल साफ करने की क्या जरूरत है?" उन्होंने सवाल किया कि पर्यावरण का नुकसान बचाने के लिए बंजर जमीन क्यों नहीं चुनी गई।
वडेट्टीवार ने मुख्यमंत्री के 90,000 पेड़ लगाने के वादे पर भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि क्या नए पौधे आज कट रहे पुराने जंगल की जैव विविधता की भरपाई तुरंत कर सकते हैं। यह इलाका शेकरू (भारतीय विशाल गिलहरी) जैसे वन्यजीवों का घर है और यहां कई नदियों का उद्गम है। उन्होंने पारिस्थितिक संतुलन बिगड़ने और लंबे समय के नतीजों की चेतावनी दी और आंदोलन करने की बात कही।
अभिनेता सयाजी शिंदे का रुख और सख्त रहा। उनका कहना है कि कोई भी परियोजना एक भी पेड़ न काटे। उन्होंने पूछा कि नदी की 50 तरह की मछलियों, सांपों और चील जैसे पक्षियों को इंसाफ कौन देगा। उन्होंने महाराष्ट्र से एकजुट होकर वन्यजीवों की ओर से ऐसी परियोजनाओं का विरोध करने की अपील की। मुख्यमंत्री से भावुक अपील की कि प्रकृति को नुकसान पहुंचाने वाली कंपनियों के साथ एमओयू न करें। उनके मुताबिक विकास एक भी पेड़ काटे बिना होना चाहिए।
कांग्रेस विधायक सत्यजीत तांबे ने दोहरे मापदंड का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं के लिए भीमाशंकर में और कुंभ मेले के कामों के लिए नाशिक में पेड़ों की कटाई हो रही है। वहीं पुणे-नाशिक सीधी रेलवे लाइन, आरोप है कि चार "छत्रियों" पर असर पड़ने की वजह से अटकी है। उन्होंने पूछा, "यह कैसा विकास का न्याय है?" उनके मुताबिक यह रेलवे उत्तर महाराष्ट्र की कनेक्टिविटी, उद्योग, व्यापार और रोजगार को गति देने वाली अहम कड़ी है। उन्होंने सवाल किया कि आम आदमी के विकास को प्राथमिकता कब मिलेगी।
फडणवीस ने आलोचना को खारिज किया है। उन्होंने विपक्ष के सभी मुद्दों का जवाब दिया और कहा कि वे सिर्फ राजनीति कर रहे हैं। परियोजना के पर्यावरणीय असर पर सवाल तब और बढ़े, जब खबर आई कि वन विभाग ने सैदोंगर में टॉरेंट पावर की 3,000 मेगावाट की पंप स्टोरेज परियोजना के लिए सह्याद्रि जंगल के 32,490 पेड़ काटने की मंजूरी दी है। बचाव में फडणवीस ने कहा कि कोयले से चलने वाले थर्मल प्लांट से 3,000 मेगावाट बिजली बनाने पर सड़क पर 40 लाख गाड़ियों के बराबर प्रदूषण होगा। थर्मल बिजली के लिए हर साल 19 अरब घन फीट पानी भी चाहिए, जिसकी बचत पंप स्टोरेज परियोजना से हो सकती है।
उन्होंने मीडिया के सामने अपना तर्क रखा। महाराष्ट्र में बड़ी सौर ऊर्जा क्षमता बनी है, लेकिन शाम 5 बजे के बाद सौर बिजली कम हो जाती है, जबकि उसी वक्त मांग बढ़ती है। इस मांग को कोयले की थर्मल बिजली से पूरा करने पर प्रदूषण बढ़ता है, इसलिए पंप स्टोरेज से स्वच्छ ऊर्जा जरूरी है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र पंप स्टोरेज परियोजनाओं का केंद्र बन रहा है और उद्योग की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों के लिए ऐसी परियोजनाएं चाहिए।
उन्होंने एक चौंकाने वाला दावा भी किया। 3,000 मेगावाट थर्मल बिजली के प्रदूषण की भरपाई के लिए 28 करोड़ पूरी तरह बड़े हो चुके पेड़ लगाने पड़ेंगे। उनके मुताबिक इस परियोजना की स्वच्छ ऊर्जा से थर्मल उत्पादन की जरूरत घटेगी और प्रदूषण से बचाव होगा। गांव वालों की चिंता पर फडणवीस ने कहा कि अगर परियोजना से स्थानीय लोगों की रोजी-रोटी पर असर पड़ रहा है, तो उनकी बात सुनी जाएगी और रास्ता निकाला जाएगा।
अब टकराव साफ है। सरकार का कहना है कि परियोजना से पानी बचेगा और प्रदूषण घटेगा। वहीं गांव वाले, वन्यजीव प्रेमी और विपक्ष कहते हैं कि सौ साल पुराने जंगल की जगह पौधे नहीं ले सकते।
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