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पुणे में डेंगू से इस साल की पहली संदिग्ध मौत, 8 साल की बच्ची ने तोड़ा दम

पुणे में डेंगू की चपेट में आई 8 साल की बच्ची की रविवार को इलाज के दौरान मौत हो गई। शहर में इस साल यह डेंगू से पहली संदिग्ध मौत है, मौत की वजह की जांच डेथ ऑडिट कमिटी करेगी।

पुणे में डेंगू से इस साल की पहली संदिग्ध मौत, 8 साल की बच्ची ने तोड़ा दम तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

पुणे की 8 साल की एक बच्ची की डेंगू का संक्रमण होने के बाद हालत बिगड़ने से इलाज के दौरान मौत हो गई। उसकी मौत रविवार को हुई। इस साल पुणे शहर में डेंगू से यह पहली संदिग्ध मौत है। इसके बाद पुणे महानगरपालिका के प्रशासन ने कीट सर्वेक्षण (वेक्टर सर्विलांस), जनजागरूकता अभियान और रोकथाम के उपाय और तेज कर दिए हैं।

रूबी हॉल क्लिनिक के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रशांत उदावंत ने बताया कि बच्ची को रूबी हॉल क्लिनिक के ओपीडी में लाने से पहले चार से पांच दिन से बुखार और पेट दर्द की शिकायत थी। इससे पहले परिवार ने स्थानीय डॉक्टरों से उसका इलाज कराया था।

लोहगांव इलाके के एक स्थानीय अस्पताल में करीब 24 घंटे इलाज चला, लेकिन बच्ची की हालत और बिगड़ गई। शुरुआती जांच के वक्त उसके प्लेटलेट्स की संख्या करीब 2 लाख थी, जो सामान्य दायरे में मानी जाती है। लेकिन तबीयत बिगड़ने पर उसे सांस लेने में तकलीफ होने लगी। इसके बाद 17 अक्टूबर को दोपहर में उसे फौरन रूबी हॉल क्लिनिक ले जाया गया। भर्ती करते वक्त उसका ब्लड प्रेशर बहुत कम हो चुका था और सांस की तकलीफ गंभीर थी।

मेडिकल टीम ने तुरंत पुनर्जीवन (रिससिटेशन) शुरू किया और बच्ची को आईसीयू में भर्ती किया। इस दौरान खून में प्लेटलेट्स की संख्या घटकर करीब 50 हजार रह गई थी। फेरिटिन का स्तर भी बढ़ा हुआ था, जो शरीर में तेज सूजन वाली प्रतिक्रिया का संकेत देता है। इससे डेंगू से जुड़े 'हेमॅटोफेगिक लिम्फोहिस्टिओसाइटोसिस' (HLH) को लेकर चिंता पैदा हुई।

डॉ. उदावंत ने कहा, "शुरुआती निदान 'डेंगू शॉक सिंड्रोम विद एचएलएच' का किया गया था। बच्ची को डेंगू से जुड़ा गंभीर शॉक, लिवर को गंभीर चोट, किडनी फेल होने और प्रोग्रेसिव मल्टी-ऑर्गन डिसफंक्शन की तकलीफ हुई थी।" रविवार सुबह उसकी हालत और बिगड़ गई। लिवर को हुए गंभीर नुकसान, किडनी का काम बिगड़ने और ब्लड प्रेशर गिरने से शरीर के कई अंग एक साथ काम करना बंद करते गए। 18 अक्टूबर को रात करीब 8 बजे उसे अचानक दिल का दौरा पड़ा। डॉक्टरों की टीम ने हर कोशिश की, लेकिन इलाज के दौरान बच्ची की मौत हो गई।

पुणे महानगरपालिका की स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नीना बोराडे ने कहा, "रूबी हॉल क्लिनिक से रिपोर्ट मिल गई है, जिसमें साफ लिखा है कि बच्ची को डेंगू का संक्रमण था।" मौत डेंगू के वायरस से ही हुई या नहीं, यह पक्का करने के लिए मृत्यु लेखा परीक्षण समिति (डेथ ऑडिट कमिटी) गहराई से जांच करेगी।

महानगरपालिका के अधिकारियों के मुताबिक इस साल शहर में दो हजार से ज्यादा डेंगू के मरीज दर्ज हुए हैं। कीट नियंत्रण विभाग ने मच्छरों के पनपने की जगहें खोजी हैं और उन निर्माण स्थलों व दूसरे इलाकों से जुर्माना भी वसूला है। डॉ. बोराडे ने बताया कि महानगरपालिका ने जोरदार सर्वेक्षण अभियान शुरू किया है और सूचना, शिक्षा और संचार (IEC) अभियान तेज किए हैं। साथ ही लोहगांव में मृत बच्ची के घर के आसपास फॉगिंग जैसे रोकथाम के उपाय महानगरपालिका की ओर से फौरन शुरू कर दिए गए हैं।

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