पुणे में 20 अक्टूबर तक डेंगू के 2,413 केस, मच्छर रोकने की मुहिम तेज
पुणे महानगरपालिका ने जनवरी से 20 अक्टूबर 2026 तक डेंगू के 2,413 मामले दर्ज होने के बाद जांच, दवा छिड़काव, अस्पताल की तैयारी और जागरूकता अभियान तेज कर दिया है।
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पुणे में डेंगू और मच्छरों से फैलने वाली दूसरी बीमारियों को रोकने के लिए पुणे महानगरपालिका (पीएमसी) ने कमर कस ली है। इस साल जनवरी से 20 अक्टूबर 2026 के बीच शहर में डेंगू के 2,413 केस दर्ज हुए हैं। इसके बाद निगम ने पूरे शहर में घर-घर जांच, मच्छर मारने के उपाय, अस्पतालों की तैयारी और लोगों को जागरूक करने की मुहिम तेज कर दी है।
हालात का जायजा लेने के लिए अतिरिक्त निगमायुक्त पवनीत कौर की अध्यक्षता में एक रिव्यू मीटिंग हुई। मीटिंग में निगम के स्वास्थ्य अधिकारी, सहायक स्वास्थ्य अधिकारी, वॉर्ड मेडिकल ऑफिसर (डब्ल्यूएमओ), जोनल मेडिकल ऑफिसर (जेडएमओ) और जिला मलेरिया अधिकारी मौजूद थे। भवन विभाग और अतिक्रमण विभाग के प्रतिनिधि भी बैठक में शामिल हुए।
इस साल दर्ज कुल मामलों में से 568 अगस्त में, 726 सितंबर में और 553 अक्टूबर में 20 तारीख तक सामने आए।
घर-घर जांच अभियान में पीएमसी की टीमें करीब 14 लाख घरों में पहुंचीं और 28,31,386 पानी के बर्तनों की जांच की। 13,000 घरों के 18,885 बर्तनों में एडीज मच्छर के लार्वा मिले। मच्छर पनपने से जुड़ी गड़बड़ी के लिए निगम ने 2,664 मकान मालिकों को नोटिस दिए और जुर्माने के तौर पर 6.30 लाख रुपये वसूले।
डेंगू की मुफ्त जांच के लिए पीएमसी ने अपने सभी दवाखानों में रैपिड डायग्नोस्टिक किट (आरडीके) उपलब्ध करा दी हैं। पुष्टि वाली जांच भी मुफ्त है, जो तय सेंटिनल सेंटरों पर होती है। इनमें डॉ. नायडू अस्पताल, डॉ. कोटनिस अस्पताल और कमला नेहरू अस्पताल शामिल हैं।
निगम ने सरकारी और निजी, सभी अस्पतालों को निर्देश दिया है कि डेंगू मरीजों की जानकारी इंटीग्रेटेड हेल्थ इन्फॉर्मेशन प्लेटफॉर्म (आईएचआईपी) पोर्टल पर दर्ज करें और एक ही मरीज की दोहरी एंट्री न करें।
इलाज की सुविधा के बारे में निगम ने बताया कि पुणे के निजी अस्पतालों में कुल 4,409 बेड हैं, जिनमें 670 आईसीयू बेड हैं। पीएमसी के अस्पतालों में 333 बेड हैं, जिनमें छह आईसीयू बेड हैं। निगम के मुताबिक औसतन करीब 50 फीसदी बेड खाली रहते हैं।
डॉ. नायडू अस्पताल ने डेंगू मरीजों के लिए 50 बेड रखे हैं। इनमें से 35 खाली हैं और रोज 10 से 15 बेड भरे रहते हैं। यहां इलाज मुफ्त है। अधिकारियों ने यह भी कहा है कि गंभीर लक्षण वाले मरीजों को कमला नेहरू अस्पताल और डॉ. नायडू अस्पताल में तुरंत इलाज मिले। डेंगू के सभी वॉर्डों में मच्छरदानी लगाना जरूरी कर दिया गया है।
जहां ज्यादा मामले आ रहे हैं, उन इलाकों में दवा छिड़काव और बाकी रोकथाम के काम को पीएमसी पहले कर रही है। अधिकारियों ने टीमों से कहा है कि खुली जगहों पर बेवजह फॉगिंग न करें। इसकी जगह मरीज के घर के अंदर और आसपास की बंद जगहों में 20 मिनट तक फॉगिंग की जाए।
निगम जमा किए हुए पानी में जैविक लार्वा नाशक दवा भी नियमित रूप से डलवाएगा। खासकर उन रिहायशी इलाकों में, जहां पानी की सप्लाई बंद रहने पर लोग पानी स्टोर करके रखते हैं।
जागरूकता के लिए सूचना, शिक्षा और संवाद (आईईसी) अभियान के तहत कचरा उठाने वाली गाड़ियों पर रोज डेंगू से बचाव के ऑडियो संदेश बजाए जा रहे हैं। जागरूकता संदेशों वाली ऑडियो ड्राइव सभी 15 वॉर्ड ऑफिसों को बांटी गई हैं।
पीएमसी हाउसिंग सोसायटियों से भी संपर्क कर रही है। उनके चेयरमैन से कहा जा रहा है कि छतें और पानी की टंकियां साफ रखी जाएं। स्कूलों से कहा गया है कि बच्चों में जागरूकता फैलाने के लिए निबंध और चित्रकला की प्रतियोगिताएं कराएं।
निगम ने लोगों से अपील की है कि हफ्ते में एक दिन ड्राई डे मनाएं, यानी पानी के बर्तन खाली करें और जमा पानी हटाएं, ताकि मच्छर न पनपें। पानी की टंकियां ढककर रखने और निगम की जांच टीमों का साथ देने को भी कहा गया है।
पीएमसी ने लोगों से घबराने की जरूरत नहीं बताई है। उसका कहना है कि शहर भर के अस्पतालों में जरूरत भर के बेड उपलब्ध हैं। नागरिकों से कहा गया है कि वक्त पर डॉक्टर को दिखाएं और डॉक्टर की सलाह मानें।
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