पुणे में डेंगू से दो की मौत, मरीजों के आंकड़े और फॉगिंग पर पीएमसी सवालों में
लोहेगांव की बच्ची समेत दो मौतों के बाद स्थायी समिति ने पीएमसी से एक हफ्ते में रिपोर्ट मांगी है।
पुणे महानगरपालिका (पीएमसी) डेंगू को लेकर सवालों के घेरे में है। बताया गया है कि लोहेगांव की आठ साल की एक बच्ची समेत दो लोगों की डेंगू से मौत हुई है। इसके बाद शहर में बीमारी को फैलने से रोकने की निगम की तैयारी पर सवाल उठे हैं।
आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग शहर में डेंगू के मामलों, मौतों और गंभीर हालत वाले मरीजों की संख्या के ठोस आंकड़े नहीं दे पाया। यह भी कहा गया है कि नियमित फॉगिंग नहीं हो रही, जिससे मच्छरों पर काबू और लोगों की सेहत को लेकर चिंता बढ़ी है।
यह मुद्दा स्थायी समिति की बैठक में उठा। वहां सदस्यों ने इस बात पर कड़ी नाराजगी जताई कि प्रशासन डेंगू के मामलों और मौतों की साफ जानकारी नहीं दे सका। स्थायी समिति के अध्यक्ष श्रीनाथ भिमाले ने निगम प्रशासन को निर्देश दिया कि अगली बैठक में, यानी एक हफ्ते के अंदर, पूरी रिपोर्ट पेश की जाए।
बैठक में यह सवाल भी उठा कि अस्पताल और पैथोलॉजी लैब डेंगू से जुड़ी जानकारी नियमित रूप से पीएमसी को दे रहे हैं या नहीं। साथ ही पूछा गया कि इलाज करा रहे मरीजों का सही रिकॉर्ड स्वास्थ्य विभाग रख रहा है या नहीं। बताया गया है कि प्रशासन चालू मामलों, गंभीर मरीजों और डेंगू से हुई मौतों की साफ संख्या नहीं बता सका।
लोहेगांव में आठ साल की बच्ची की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख डॉ. नीना बोराडे से जानकारी मांगी गई थी। बताया गया है कि उन्होंने कहा था कि वे डिटेल जमा करके बाद में देंगी। लेकिन स्थायी समिति की बैठक में वे कोई ठोस जानकारी नहीं दे पाईं।
सदस्यों ने डेंगू का खतरा बढ़ने के बावजूद शहर में फॉगिंग न होने पर भी सवाल किए। उन्होंने कहा कि मच्छरों को पनपने से रोकना जरूरी है और बचाव के उपाय तेज किए जाएं। समिति ने मच्छर नियंत्रण का काम मजबूत करने के लिए पर्याप्त मैनपावर की मांग की।
भिमाले ने बताया कि 265 कर्मचारियों की तुरंत भर्ती के आदेश दिए जा चुके हैं। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के जवाब पर नाखुशी भी जताई और कहा कि डेंगू के मामले बढ़ रहे थे तो बचाव के कदम वक्त रहते उठाए जाने चाहिए थे।
इन सवालों के बाद अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त पवनीत कौर ने स्वास्थ्य विभाग के अफसरों के साथ आपात बैठक बुलाई। सभी वार्ड ऑफिसों को जरूरी बचाव के उपाय लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।
कौर ने कहा कि लोहेगांव की आठ साल की बच्ची को पहले से दूसरी बीमारियां भी थीं। उन्होंने यह भी पक्का किया कि गोखलेनगर की एक बुजुर्ग महिला की मौत डेंगू से हुई है।
बीमारी कितनी फैली है, यह पता करने के लिए स्वास्थ्य विभाग को सरकारी और निजी अस्पतालों के साथ क्लिनिकों से भी मरीजों की जानकारी जल्द से जल्द जमा करने को कहा गया है।
मौतों के बाद मरीजों का डेटा जुटाने की प्रशासन की कोशिश से यह सवाल उठा है कि डेंगू के मामलों पर नियमित नजर रखी जा रही थी या नहीं, और बचाव के कदम वक्त पर उठे या नहीं। एक हफ्ते में पेश होने वाली रिपोर्ट से उम्मीद है कि पुणे में डेंगू के हालात और उसे रोकने के लिए निगम के उठाए कदमों की जानकारी सामने आएगी।
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