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पुणे जिले के 13 में से 10 तालुके सूखाग्रस्त घोषित, टैंकर वाले गांव बढ़ने का डर

पुणे जिले के 10 तालुके सूखाग्रस्त घोषित हुए हैं और पिछले साल 150 गांवों को टैंकर से पानी देना पड़ा था। जिले में औसत बारिश ज्यादा रही, पर तालुकावार फर्क बड़ा है।

पुणे जिले के 13 में से 10 तालुके सूखाग्रस्त घोषित, टैंकर वाले गांव बढ़ने का डर तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

पुणे जिले के 13 तालुकों में से 10 को सूखाग्रस्त घोषित कर दिया गया है। इससे आने वाले दिनों में पानी की किल्लत का मसला गंभीर होने की आशंका है। कुछ इलाकों में बारिश की भारी कमी रही है, पानी के स्रोतों पर दबाव बढ़ता जा रहा है और कुछ गांवों में टैंकर से पानी सप्लाई भी शुरू हो चुकी है। इसी वजह से इस साल किल्लत की तीव्रता बढ़ने का डर जताया जा रहा है।

पिछले साल जिले के 150 गांवों को टैंकर से पानी देना पड़ा था। अब सूखे के हालात में पीने का पानी, खेती और जानवरों के लिए पानी और चारे का इंतजाम करना प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती है।

दिलचस्प बात यह है कि जून से सितंबर 2026 के बीच जिले में औसतन 824.12 मिलीमीटर बारिश होनी थी, जबकि असल में 869.76 मिलीमीटर दर्ज हुई। यानी औसत से 2.47 प्रतिशत ज्यादा पानी गिरा। लेकिन जिले का कुल औसत भले ठीक दिखे, तालुकावार आंकड़ों में बड़ा फर्क है। मावल में औसत की 196.52 प्रतिशत, खेड में 158.37 प्रतिशत और आंबेगांव में 136.32 प्रतिशत बारिश हुई। इसके उलट बारामती में औसत की सिर्फ 63.34 प्रतिशत, इंदापुर में 65.91 प्रतिशत और दौंड में 67.43 प्रतिशत बारिश दर्ज की गई।

पिछले चार साल में टैंकर से पानी पाने वाले गांवों की गिनती हर साल ऊपर-नीचे होती रही है। 2022-23 में ऐसे 39 गांव थे। 2023-24 में यह आंकड़ा बढ़कर 203 गांवों तक पहुंच गया। 2024-25 में संख्या घटकर 90 रह गई। फिर 2025-26 में 150 गांवों को टैंकर का सहारा लेना पड़ा। पिछले साल के मुकाबले यह बढ़ोतरी करीब 66.7 प्रतिशत है। इसी से टैंकर वाले गांवों की संख्या फिर बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

2025-26 के आंकड़ों के मुताबिक पुरंदर तालुके के 33, आंबेगांव के 30, जुन्नर के 28 और खेड के 18 गांवों में टैंकर से पानी देना पड़ा था। इसलिए इन तालुकों की पानी सप्लाई योजनाओं का हाल अभी से जांचना जरूरी है। कुओं में पानी का लेवल कितना है, कौन-से स्रोत उपलब्ध हैं, कौन-सी योजनाएं खराब पड़ी हैं और दूसरे विकल्प कितने मौजूद हैं, इन सबका जायजा लेकर किल्लत की मार झेल सकने वाले गांवों की लिस्ट पहले से तैयार कर लेना जरूरी है।

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