पुणे महानगरपालिका ने सफाई कर्मचारी दोगुने कर 9,000 किए, कचरे के पुराने ठिकानों पर नजर
पुणे महानगरपालिका ने कचरा गाड़ियां बढ़ाकर 952 कीं और सड़क सफाई का स्टाफ 4,500 से 9,000 किया।
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पुणे महानगरपालिका (PMC) शहर की सफाई व्यवस्था को मजबूत करने में जुटी है। बार-बार कचरा जमा होने की समस्या दूर करना, जिन इलाकों में कचरा उठाने की सुविधा कमजोर है वहां कलेक्शन सुधारना और गीले कचरे की प्रोसेसिंग बढ़ाना, यही इसका मकसद है। महानगरपालिका ने कचरा उठाने वाली गाड़ियों की संख्या बढ़ाकर 952 कर दी है और सड़कों की झाड़ू-सफाई में लगे कर्मचारियों को 4,500 से दोगुना करके 9,000 कर दिया है।
यह बढ़ी हुई तैनाती एक बड़ी योजना का हिस्सा है। मकसद है कि शहर का कचरा प्रबंधन सिर्फ रोज की सफाई मुहिम के भरोसे न चले, बल्कि लगातार एक ही तरह से काम करे। प्रशासन उन जगहों पर ध्यान दे रहा है जहां बार-बार कचरे के ढेर लग जाते हैं। साथ ही झुग्गी बस्तियों में घर-घर से कचरा उठाने का काम सुधारा जाएगा और बड़ी मात्रा में कचरा पैदा करने वालों से कहा जाएगा कि वे अपने कचरे की जिम्मेदारी ज्यादा उठाएं।
PMC के अतिरिक्त आयुक्त प्रजित नायर ने कहा कि महानगरपालिका अपनी सफाई मुहिम में नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और सफाई कर्मचारियों को भी ज्यादा सक्रिय रूप से जोड़ना चाहती है, ताकि अलग-अलग इलाकों की साफ-सफाई बेहतर हो।
पुणे में अभी रोज करीब 2,800 मीट्रिक टन कचरा निकलता है। इसमें से लगभग 1,800 मीट्रिक टन सूखा कचरा है और 1,000 मीट्रिक टन गीला कचरा। निगम ने एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है, जिसमें ठेकेदार कचरा उठाने का काम करते हैं। उधर अधिकारी कचरा उठाने और उसे ढोने में जो कमियां हैं, उन्हें दूर करने में लगे हैं।
शहर की कचरा प्रबंधन की कड़ी में चार मुख्य चरण हैं: कचरा उठाना, सड़कों की सफाई, ढुलाई और प्रोसेसिंग। प्रोसेसिंग के इंतजाम महानगरपालिका पहले ही कर चुकी है। अब वह कचरा उठाने और उसकी ढुलाई की कार्यक्षमता सुधारने पर काम कर रही है।
मौजूदा नियमों के तहत बड़ी हाउसिंग सोसाइटियों और दूसरे बल्क वेस्ट जनरेटरों से उम्मीद की जाती है कि वे अपना कचरा खुद संभालें। लेकिन पुणे में ऐसे करीब 2,800 प्रतिष्ठान मिलकर रोज लगभग 408 मीट्रिक टन कचरा पैदा करते हैं। इसी वजह से निगम इनके लिए अलग अमल योजना तैयार करने की ओर बढ़ रहा है।
प्रशासन उन प्रतिष्ठानों पर जुर्माना लगाने पर भी विचार कर रहा है जो कचरा प्रबंधन की शर्तें नहीं मानते। नायर के मुताबिक प्रस्तावित व्यवस्था अगले दो से ढाई महीने में लागू होने की उम्मीद है। इसका मकसद यह है कि बड़े कचरा उत्पादक पूरी तरह महानगरपालिका की कलेक्शन व्यवस्था पर निर्भर न रहें और अपने परिसर में निकलने वाले कचरे की जिम्मेदारी खुद लें।
PMC उन इलाकों की भी समीक्षा कर रही है जहां रोज की सफाई के बावजूद कचरा जमा हो जाता है। सफाई कर्मचारियों, सुपरवाइजरों और इंस्पेक्टरों से हुई बातचीत में इसके कई कारण सामने आए हैं, जिनमें कचरा उठाने के फेरे कम होना और स्थानीय स्तर पर सेवा में कमी शामिल है। कुछ झुग्गी बस्तियों में घरों के पास कचरा रखने की जगह कम है, इसलिए लोग कचरा सड़क किनारे छोड़ देते हैं। दूसरी जगहों पर कचरा गाड़ियां इतनी बार नहीं आतीं कि ढेर लगने से रोका जा सके।
गीले कचरे की प्रोसेसिंग क्षमता अभी करीब 600 मीट्रिक टन रोज है। PMC इसे और बढ़ाना चाहती है। योजना में रोज 500 मीट्रिक टन क्षमता वाली एक प्रस्तावित सुविधा भी शामिल है, जिसमें नायर के मुताबिक करीब 400 मीट्रिक टन गीला कचरा प्रोसेस हो सकता है। इस अतिरिक्त क्षमता का मकसद शहर के रोजाना कचरे के जैविक हिस्से को संभालने की ताकत बढ़ाना है।
कामकाज में बदलाव के साथ-साथ महानगरपालिका जनवरी के आखिर में होने वाले पुणे ब्रांड टूर से पहले मोहल्ला स्तर की सफाई प्रतियोगिता की तैयारी कर रही है। इसमें नागरिकों, स्थानीय प्रतिनिधियों और निगम कर्मचारियों की भागीदारी होगी। PMC को उम्मीद है कि लोगों की भागीदारी से कचरा फेंकने की बेहतर आदतें बनेंगी और रोज की सफाई से आगे भी सुधार टिका रहेगा।
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