पुणे की FDA लैब ने एक साल में दोगुने से ज्यादा सैंपल की जांच की, आंकड़ा 1,456 पहुंचा
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वित्त वर्ष 2025-26 में लैब ने खाने के 1,456 सैंपल की जांच की, जबकि 2024-25 में यह संख्या 659 थी। दिवाली से पहले निगरानी तेज है।
पुणे, 7 नवंबर 2026: पुणे की फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) लैब ने वित्त वर्ष 2025-26 में खाने के 1,456 सैंपल जांचे। इससे पिछले साल 2024-25 में यह आंकड़ा 659 सैंपल का था, यानी जांच दोगुने से भी ज्यादा हो गई। दिवाली से पहले खाने की चीजों की निगरानी तेज की गई है, क्योंकि इस समय मिठाई, डेयरी प्रोडक्ट और दूसरी खाने की चीजों की मांग बढ़ जाती है।
2025-26 में लैब ने 797 सैंपल ज्यादा जांचे। मिठाई, डेयरी प्रोडक्ट, खाने के तेल, घी, मसाले और दूसरी खाने की चीजों के सैंपल जांचे जा रहे हैं, ताकि खाने की क्वालिटी पर नजर रहे और फूड सेफ्टी के मानकों का पालन पक्का हो।
महाराष्ट्र स्टेट पब्लिक हेल्थ लेबोरेटरी के मुताबिक जांच बढ़ने के पीछे तीन बदलाव हैं। पहला, सैंपल जांचने की प्रक्रिया में बदलाव। दूसरा, एक जैसे सैंपल की बैच के हिसाब से जांच। तीसरा, लैब में उपकरण और कांच के सामान का इजाफा।
पहले लैब का स्टाफ आमतौर पर एक बार में एक ही सैंपल पर काम करता था। नए तरीके में एक ही श्रेणी के सैंपल का बैच बनाकर उन्हें साथ में जांचा जाता है। लैब के 12 से 13 केमिस्ट का काम भी इस तरह बांटा गया है कि एक जैसे सैंपल की जांच साथ-साथ हो सके। इससे हर जांच में लगने वाला वक्त घटा है।
बैच में जांच के लिए एक साथ कई सैंपल संभालने लायक उपकरण चाहिए। पहले लैब में फ्लास्क, नापने के बर्तन, फनल और दूसरे कांच के सामान गिनती के थे। अब इनके और सेट मिल गए हैं, जिससे स्टाफ एक साथ ज्यादा सैंपल संभाल पा रहा है।
लैब के टेक्नीशियनों ने बताया कि अलग-अलग तरह की जांच भी साथ में हो सकती हैं। मसलन एक सैंपल में प्रोटीन की जांच चल रही हो, तो दूसरे सैंपल में फैट की मात्रा की जांच की जा सकती है। इस तरह साथ-साथ काम करने से कुल कामकाज की रफ्तार बढ़ी है और जांच पूरी होने में कम वक्त लगता है।
महाराष्ट्र स्टेट पब्लिक हेल्थ लेबोरेटरी के डिप्टी डायरेक्टर मधुकर धूम ने कहा कि हर साल जांच के लिए बहुत सारे सैंपल आने से लैब पर काफी दबाव रहता है। टेस्ट रिपोर्ट तय समय सीमा के अंदर जमा करनी होती है, इसलिए जांच की प्रक्रिया सुधारना जरूरी था।
धूम ने कहा, "इस साल सैंपल की संख्या दोगुने से ज्यादा हो गई है, फिर भी अतिरिक्त उपकरण मिलने और बैच में जांच का तरीका अपनाने से हमें जांच की रफ्तार बढ़ाने में मदद मिली है।"
उन्होंने यह भी बताया कि FDA कमिश्नर तुकाराम मुंढे ने भी लैब के कामकाज को बेहतर बनाने और सैंपल जांचने की प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए मार्गदर्शन दिया था।
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