पुणे के एमजी रोड पर फुटपाथ पर कब्जा, दिवाली की भीड़ में पैदल लोग सड़क पर चलने को मजबूर
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
एमजी रोड पर ठेले, कपड़ों के स्टॉल और डिस्प्ले रैक ने फुटपाथ घेर लिए हैं। वीकेंड और दिवाली की खरीदारी के बीच पैदल चलने वालों को मुख्य सड़क पर उतरना पड़ रहा है।
पुणे के एमजी रोड पर फुटपाथ पर सड़क किनारे के विक्रेताओं, कपड़ों के स्टॉल, डिस्प्ले रैक और दुकानों के सामान का कब्जा बढ़ता जा रहा है। इससे पैदल चलने वालों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता खड़ी हो गई है। वीकेंड की खरीदारी की भीड़ और चल रहे दिवाली के सीजन में यह दिक्कत और बढ़ गई है।
इस व्यस्त बाजार में बड़ी संख्या में लोग खरीदारी करने आते हैं। बताया जा रहा है कि फुटपाथ बंद होने की वजह से बुजुर्गों, महिलाओं, बच्चों और दिव्यांगों समेत पैदल चलने वालों को मुख्य सड़क पर उतरकर चलना पड़ रहा है। इससे उन पर सड़क हादसे का खतरा मंडरा रहा है।
कई राहगीरों ने इस हालत पर चिंता जताई है। नागरिक राजवंत गुरदत्ता ने कहा, "फुटपाथ पैदल चलने वालों के लिए होते हैं, लेकिन हमें चलती गाड़ियों के बगल से चलना पड़ता है, क्योंकि सुरक्षित चलने की जगह लगभग बची ही नहीं है।"
यहां नियमित आने वाले एक और शख्स विनय जीवानी ने कहा कि बुजुर्ग और बच्चों वाले परिवार सबसे ज्यादा जोखिम में हैं। उनके मुताबिक किसी बड़े हादसे से पहले अधिकारियों को इस मसले पर ध्यान देना चाहिए।
मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट के उन निर्देशों के अमल पर भी सवाल उठे हैं, जो फुटपाथ खाली कराने और पैदल यात्रियों की सुरक्षा को लेकर कथित तौर पर दिए गए थे। गुरदत्ता ने कहा कि कोर्ट में याचिका दाखिल हुई थी और पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिए गए थे। हालांकि राहगीरों का कहना है कि जमीनी हालात में अब भी परेशानी बनी हुई है। अधिकारियों से मांग की गई है कि वे कोर्ट के संबंधित निर्देशों की जांच करें और उन पर अमल पक्का करें।
पुणे ट्रैफिक पुलिस, स्थानीय पुलिस और पुणे कैंटोनमेंट बोर्ड की कार्रवाई की जिम्मेदारी को लेकर भी सवाल पूछे गए हैं। निवासियों और राहगीरों का कहना है कि ट्रैफिक विभाग अनधिकृत पार्किंग पर टोइंग और जुर्माने की कार्रवाई नियमित रूप से करता है, लेकिन पैदल रास्ता रोकने वाले दुकानी कब्जों पर वैसी लगातार कार्रवाई नजर नहीं आती।
बताया गया है कि अतिक्रमण हटाने की मुहिम समय-समय पर चलती रही है, मगर कार्रवाई करने वाली टीमों के जाते ही समस्या फिर लौट आती है। इसी वजह से कभी-कभार की सफाई के बजाय स्थायी निगरानी व्यवस्था की मांग उठी है।
प्रमुख मांगों में अनधिकृत रुकावटों को तुरंत हटाना, फुटपाथ बहाल करना, और ट्रैफिक पुलिस, स्थानीय पुलिस व कैंटोनमेंट बोर्ड की संयुक्त कार्रवाई शामिल है। शनिवार, रविवार और त्योहारों के दौरान, खासकर शाम 4 बजे से रात 10 बजे के बीच, जब पैदल लोगों की आवाजाही ज्यादा रहती है, विशेष गश्त की भी मांग की गई है।
इसके अलावा हटाए गए स्टॉल दोबारा न लगें, बार-बार नियम तोड़ने वालों पर लागू कानूनों के तहत कार्रवाई हो, पिछली शिकायतों की समीक्षा हो, कोर्ट के निर्देशों के पालन की जांच हो और जहां अधिकारियों की लापरवाही साबित हो वहां जिम्मेदारी तय की जाए, ये मांगें भी रखी गई हैं।
राहगीरों ने साफ किया है कि मुद्दा जायज फेरीवालों की रोजी-रोटी छीनने का नहीं है। उनकी बात इतनी है कि विक्रेता लागू नियमों के दायरे में रहकर काम करें और पैदल चलने वालों के हक और जनसुरक्षा से समझौता न हो।
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