फ्लाईओवर के बाद भी धायरी में जाम से राहत नहीं, लोगों ने महापालिका से कार्रवाई मांगी
सिंहगढ़ रोड और आसपास के इलाकों में ट्रैफिक की मार झेल रहे धायरी के लोगों ने पुणे महापालिका और ट्रैफिक पुलिस पर वादे करने और काम न करने का आरोप लगाया है।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
धायरी के लोग सिंहगढ़ रोड और उसके आसपास के इलाकों में लगातार लगने वाले जाम से परेशान हैं। उनका कहना है कि पुणे महापालिका और ट्रैफिक पुलिस इस समस्या को हल करने में नाकाम रही हैं। लोगों के मुताबिक बार-बार घोषणाएं हुईं, बैठकें हुईं और भरोसा भी दिलाया गया, लेकिन उसका कोई असर सड़क पर नहीं दिखा।
अधूरी सड़कें, देर से बन रहे पुल, अतिक्रमण और बिना योजना के की जा रही खुदाई, इन सबकी वजह से रोज आने-जाने वाले लोगों को भुगतना पड़ रहा है। स्वच्छ और सुंदर धायरी कृती समिति (Clean and Beautiful Dhayari Action Committee) ने महापालिका प्रशासन की ओर से घोषित कई उपायों पर सवाल उठाए हैं। समिति ने संबंधित अधिकारियों से साफ समय-सीमा और जवाबदेही की मांग की है।
समिति का कहना है कि लोगों का रोज कीमती वक्त और पेट्रोल-डीजल बर्बाद हो रहा है। स्कूल-कॉलेज के छात्र, दफ्तर जाने वाले, मरीज, बुजुर्ग और स्थानीय दुकानदार, सबको भारी दिक्कत उठानी पड़ रही है। समिति के समन्वयक विनीत धरणकर ने पुणे टाइम्स मिरर से बात करते हुए कहा, "लोगों ने प्रशासन से बार-बार भरोसा सुना है, लेकिन सड़कों के हालात ज्यादातर वैसे ही हैं। जब जनता का गुस्सा बढ़ता है तब बैठकें होती हैं और तारीखें बताई जाती हैं, पर जमीन पर काम बहुत कम दिखता है।"
उन्होंने कहा कि नागरिकों को वादे नहीं चाहिए। वे चाहते हैं कि प्रशासन अपने पुराने वादे पूरे करे और रोज के इस ट्रैफिक से राहत दे। फिलहाल की एक बड़ी शिकायत बिना पहले बताए की जाने वाली खुदाई से लगने वाला जाम है। समिति का आरोप है कि पीक आवर्स में खुदाई शुरू होने पर लोग दो से तीन घंटे तक फंसे रहे। इससे पहले से योजना बनाने, ट्रैफिक संभालने और महापालिका व ट्रैफिक पुलिस के तालमेल पर सवाल खड़े होते हैं।
पुलिस के अतिरिक्त आयुक्त (पश्चिम क्षेत्र और ट्रैफिक) मनोज पाटिल ने कहा, "हम जल्द ही धायरी, नऱ्हे, वडगांव, नांदेड सिटी और दांडेकर पुल इलाके में ट्रैफिक सर्वे करेंगे।"
फ्लाईओवर को लोग 'बेअसर' बता रहे हैं। सिंहगढ़ रोड पर नया फ्लाईओवर खुलने के बावजूद उस पर और उसके नीचे की सड़कों पर जाम लगा रहता है। सड़क किनारे के ठेले वाले, गलत जगह खड़ी गाड़ियां, अतिक्रमण और संकरी सड़कें हालत और बिगाड़ देती हैं।
समिति ने उस विस्तृत ट्रैफिक सर्वे की जानकारी भी मांगी है, जिसका आदेश कथित तौर पर 5 अगस्त को महापौर मंजुषा नागपुरे ने धायरी, नऱ्हे, वडगांव, नांदेड सिटी और दांडेकर पुल इलाके के लिए दिया था। समिति चाहती है कि उसकी रिपोर्ट, सुझाव और की गई कार्रवाई सार्वजनिक की जाए।
एक और बड़ी चिंता सनसिटी-कर्वेनगर पुल के अधूरे एप्रोच रोड की है। यह पुल भीड़ से भरे राजाराम पुल का विकल्प बनने वाला है। समिति ने पूरे रूट के खुलने की पक्की तारीख मांगी है। साथ ही राजाराम पुल को करीब 18 मीटर से 30 मीटर चौड़ा करने का समय-बद्ध कार्यक्रम भी मांगा है।
धायरी की रहने वाली जयश्री देशपांडे ने कहा, "ट्रैफिक जाम अब हमारी रोज की जिंदगी का हिस्सा बन गया है। काम पर जाना हो, बच्चों को स्कूल ले जाना हो या कोई इमरजेंसी हो, लोगों को लंबी देरी का हिसाब लेकर चलना पड़ता है। अटके पड़े डीपी रोड, अतिक्रमण और खराब ट्रैफिक मैनेजमेंट हालात और खराब कर रहे हैं। प्रशासन को भरोसा देना बंद करके ऐसे हल देने चाहिए जो लोगों को दिखें और महसूस हों।"
डीपी रोड का मुद्दा भी समिति ने खास तौर पर उठाया है। सावित्री गार्डन और लोकमत दफ्तर के बीच प्रस्तावित डीपी रोड के लिए महापालिका आयुक्त नवल किशोर राम ने कथित तौर पर अगस्त में छह महीने में काम पूरा करने का भरोसा दिया था। समिति ने जमीन अधिग्रहण, फंडिंग, मंजूरियों और नहर पर बनने वाले पुलों को लेकर लिखित प्रगति रिपोर्ट मांगी है।
समिति ने वार्ड स्तर की निरीक्षण रिपोर्टों में पारदर्शिता और गलत पार्किंग व अतिक्रमण पर कार्रवाई की भी मांग की है। उसने महापालिका और ट्रैफिक पुलिस से धायरी फाटा से धायरी गांव तक के हिस्से के लिए तालमेल वाली, समय-बद्ध योजना लागू करने को कहा है। इसमें बेनकर वस्ती, परी कंपनी चौक और लाडली चौक जैसे बड़े चौराहे भी शामिल हैं। समिति के मुताबिक शांतिपूर्ण आंदोलन और ज्ञापनों से भी पर्याप्त राहत नहीं मिली है, इसलिए अब और घोषणाओं के बजाय तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए।
कमेंट
अभी कोई कमेंट नहीं। पहले आप लिखिए।