लोहेगांव के माउंट सेंट पैट्रिक अकादमी में दाखिले से पहले माता-पिता क्या जानें
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पुणे के लोहेगांव में पैट्रिशियन ब्रदर्स का ICSE और ISC स्कूल: क्या साफ है और किन बातों की पुष्टि स्कूल से करनी होगी।
पुणे के लोहेगांव में माउंट सेंट पैट्रिक अकादमी नाम का एक को-एजुकेशनल डे स्कूल है, जिसे पैट्रिशियन ब्रदर्स चलाते हैं। स्कूल की शुरुआत 2003 में हुई थी। स्कूल के मुताबिक पहले साल सिर्फ 17 बच्चे थे और अब यह संख्या 1,900 से ज़्यादा हो गई है। स्कूल के मौजूदा इतिहास में करीब 1,905 बच्चों का आंकड़ा दिया गया है।
स्कूल काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एक्ज़ामिनेशन्स (CISCE) से जुड़ा है और ICSE तथा ISC दोनों कराता है। CISCE की डायरेक्टरी में यह स्कूल कोड MA121 के साथ दर्ज है और प्रमुख के तौर पर ब्रदर राजेश तिर्की का नाम है। रेव. ब्रदर राजेश तिर्की मई 2025 में प्रिंसिपल बने। स्कूल का मौजूदा नारा है "Dream. Believe. Achieve."
स्कूल का पता सर्वे नं. 43/5, डायमंड वाटर पार्क के पास, लोहेगांव, पुणे 411047 है। यह पूर्वी पुणे में पड़ता है। विमान नगर, कल्याणी नगर, खराडी, धानोरी या वाघोली जैसे इलाकों में रहने वाले माता-पिता को आने-जाने के समय का हिसाब पहले से लगा लेना चाहिए।
स्कूल में प्री-प्राइमरी से लेकर सीनियर सेकेंडरी तक पढ़ाई होती है। वेबसाइट पर प्री-प्राइमरी और प्राइमरी, मिडिल स्कूल और सीनियर स्कूल के अलग हिस्से हैं। स्कूल के कैलेंडर में कक्षा I से XII तक के बच्चों का ज़िक्र है, जिसमें कक्षा X और XII की परीक्षा की गतिविधियां भी शामिल हैं। यानी बच्चा चाहे तो ICSE और ISC तक एक ही स्कूल में रह सकता है। ISC में साइंस और कॉमर्स स्ट्रीम हैं। स्कूल के मुताबिक ICSE के बैच निकलने के बाद उसे ISC की अस्थायी मान्यता मिली थी।
CBSE स्कूलों से तुलना करने वाले माता-पिता को याद रखना चाहिए कि ICSE और ISC का विषयों का ढांचा और जांचने का तरीका अपना है। इसलिए सिर्फ बोर्ड के प्रतिशत देखकर तुलना करना भ्रम पैदा कर सकता है।
पढ़ाई के तरीके पर स्कूल का कहना है कि वह रटने से आगे जाना चाहता है। प्रिंसिपल के मुताबिक मकसद ज्ञान को असल ज़िंदगी से जोड़ना है, ताकि बच्चे सोचें, सवाल पूछें, समस्याएं सुलझाएं और समाज के प्रति ज़िम्मेदार बनें। सीनियर स्कूल में अनुशासन, लगन, समय का इंतज़ाम, आत्मसंयम, सम्मान और ज़िम्मेदारी पर ज़ोर है। स्कूल इसे अपना पैट्रिशियन एथोस कहता है।
स्कूल में हाउस सिस्टम है और चार हाउस महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री और रवींद्रनाथ टैगोर के नाम पर हैं। स्कूल के अनुसार यह सिस्टम बच्चों में बातचीत, सहयोग, हमदर्दी और हार न मानने की आदत बढ़ाने के लिए शुरू किया गया। इसके तहत डिबेट, ड्रामा, क्विज़, आर्ट एंड क्राफ्ट, डांस, स्पेल बी और खेल प्रतियोगिताएं होती हैं।
खेलों में फुटबॉल, क्रिकेट, बास्केटबॉल, थ्रो बॉल और खो-खो के इंटर-हाउस मुकाबले होते हैं। 2026 के कैलेंडर में कक्षा VI से VIII के लड़कों के लिए फुटबॉल और क्रिकेट, इन्हीं कक्षाओं की लड़कियों के लिए खो-खो और सीनियर बच्चों के लिए बास्केटबॉल और थ्रो बॉल दर्ज हैं। कैलेंडर में सांस्कृतिक उत्सव और क्ले मॉडलिंग भी हैं।
सुविधाओं में कंप्यूटर लैब और लाइब्रेरी गिनाई गई हैं। स्कूल का कहना है कि उसका कैंपस ब्रदर आनंद इलियास के नेतृत्व के दौरान ज़्यादा हाई-टेक होता गया। माता-पिता और बच्चों के लिए ऑनलाइन पोर्टल है, और ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन व फीस भरने की सुविधा भी। स्कूल की गाइडलाइन साफ कहती है कि रजिस्ट्रेशन का मतलब दाखिले की गारंटी नहीं है।
कई बातें ऐसी हैं जिनकी जानकारी सार्वजनिक सामग्री में पूरी नहीं मिली। इनमें 2026-27 की कक्षावार फीस, AI, कोडिंग और रोबोटिक्स की पढ़ाई, फाइनेंशियल लिटरेसी का कोई तय कोर्स, काउंसलर और स्पेशल एजुकेशन का स्टाफ, ट्रांसपोर्ट के रूट और फीस, सुरक्षा इंतज़ाम, ताज़ा ICSE और ISC नतीजे, यूनिवर्सिटी में जाने वाले बच्चों का ब्योरा और कक्षावार खाली सीटें शामिल हैं। अक्टूबर 2026 में स्कूल की वेबसाइट और CISCE की जानकारी देखी गई थी, पर इन बातों के लिए सीधे स्कूल से पुष्टि करना ज़रूरी है। कंप्यूटर लैब होना और AI या कंप्यूटेशनल थिंकिंग का तय कार्यक्रम होना एक ही चीज़ नहीं है।
इसलिए माता-पिता को स्कूल जाकर देखना चाहिए और एडमिशन टीम से खुलकर बात करनी चाहिए। वे पूछ सकते हैं कि मौजूदा फीस क्या है, ऊपर से कितना खर्च होगा, उम्र की शर्त क्या है, इंटरव्यू या टेस्ट होगा या नहीं, कौन-से दस्तावेज़ लगेंगे, बच्चे के पीछे रहने पर क्या मदद मिलती है और बुलिंग व बच्चों की सुरक्षा के लिए क्या इंतज़ाम हैं।
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