पवित्र पोर्टल से भर्ती निजी स्कूल के शिक्षकों को आधे घंटे में मिलेगी शालार्थ आईडी
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महाराष्ट्र के निजी स्कूलों में नियुक्त शिक्षकों को अब वेतन के लिए महीनों इंतजार नहीं करना पड़ेगा। स्कूल में रुजू होने के बाद जानकारी ऑनलाइन भरते ही शालार्थ आईडी बन जाएगी।
राज्य के निजी स्कूलों में नियुक्त होने वाले शिक्षकों के लिए राहत की खबर है। नियुक्ति के बाद वेतन शुरू होने के लिए जो महीनों का इंतजार करना पड़ता था, वह अब खत्म होने वाला है। पवित्र पोर्टल के जरिए भर्ती हुआ शिक्षक जब स्कूल में रुजू हो जाएगा, तो उसकी जरूरी जानकारी ऑनलाइन भरी जाएगी। बैंक खाते और वारिस की जानकारी दर्ज होने के बाद सिर्फ आधे घंटे में शालार्थ आईडी तैयार हो जाएगी। साथ ही उस शिक्षक की एंट्री स्कूल की वेतन प्रणाली में भी दिखने लगेगी।
पहले यह सारा मामला काफी लंबा चलता था। निजी स्कूल में शिक्षक की नियुक्ति होने पर स्कूल की तरफ से नियुक्ति और रुजू रिपोर्ट का प्रस्ताव शिक्षाधिकारी के पास भेजा जाता था। इसके बाद वेतन इकाई, शिक्षाधिकारी और जरूरत पड़ने पर शिक्षा उपनिदेशक कार्यालय तक प्रस्ताव भेजने की प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती थी। जूनियर कॉलेजों के मामले में प्रस्ताव को इससे आगे के स्तर पर भी भेजना पड़ता था। इसी वजह से कई महीने निकल जाते थे और शिक्षकों को वेतन के लिए इंतजार करना पड़ता था। अब यह पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन करने की व्यवस्था की गई है।
नई व्यवस्था में पवित्र पोर्टल से चयन होने के बाद संबंधित संस्था उम्मीदवार का इंटरव्यू लेगी। उसके बाद कागजात की जांच शिक्षाधिकारी स्तर पर होगी। जांच पूरी होने पर संस्था नियुक्ति आदेश दे सकेगी। यह नियुक्ति आदेश उम्मीदवार के लॉगिन पर ही मिलेगा और वह उसे वहीं से डाउनलोड कर सकेगा।
नियुक्ति आदेश के मुताबिक शिक्षक जब स्कूल में रुजू हो जाए, तो प्रधानाध्यापक या स्कूल प्रशासन को पोर्टल पर रुजू होने की जानकारी भरनी होगी। इसके साथ शिक्षक के बैंक खाते का ब्योरा और वारिस की जानकारी भी दर्ज करनी होगी। यह जानकारी पूरी होने के आधे घंटे के अंदर शालार्थ आईडी बन जाएगी।
आईडी बनने के बाद स्कूल के नियमित वेतन पोर्टल पर प्रधानाध्यापक के लॉगिन में वह शिक्षक नए कर्मचारी के तौर पर दिखाई देगा। इससे प्रधानाध्यापक वेतन बिल बनाते समय उस शिक्षक की जानकारी उसमें शामिल कर सकेंगे। अगले महीने के वेतन बिल के साथ ही उसका वेतन भी निकाला जा सकेगा।
इस बदलाव से कागजात के लाने-ले जाने, दफ्तरों के चक्कर और मंजूरी के लिए होने वाला इंतजार कम होगा। नए नियुक्त हुए शिक्षकों को समय पर वेतन मिलने का रास्ता खुल जाएगा।
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