मीरा रोड स्टेशन पर दूसरे उत्तरी फुट ओवरब्रिज की दक्षिणी सीढ़ी यात्रियों के लिए बंद
पश्चिम रेलवे ने मीरा रोड स्टेशन पर प्लेटफॉर्म 2 और 3 को जोड़ने वाले फुट ओवरब्रिज की दक्षिणी सीढ़ी सुधार कार्य के कारण तुरंत प्रभाव से बंद कर दी है।
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पश्चिम रेलवे ने मीरा रोड रेलवे स्टेशन पर दूसरे उत्तरी फुट ओवरब्रिज की दक्षिणी सीढ़ी यात्रियों के लिए तुरंत प्रभाव से बंद कर दी है। यह फुट ओवरब्रिज प्लेटफॉर्म 2 और 3 को आपस में जोड़ता है। स्टेशन पर चल रहे सुधार के काम की वजह से यह कदम उठाया गया है।
पश्चिम रेलवे के आधिकारिक बयान के मुताबिक मुंबई रेल विकास कॉर्पोरेशन (MRVC) मीरा रोड स्टेशन पर सुधार का काम कर रहा है। इसी काम के तहत MRVC फुट ओवरब्रिज की दक्षिणी सीढ़ी को तोड़ेगा। सीढ़ी तोड़ी जानी है, इसलिए उसे यात्रियों के लिए बंद करना पड़ा।
पश्चिम रेलवे ने यात्रियों को इस बंदी की जानकारी दी है और काम की वजह से होने वाली असुविधा पर खेद जताया है। मीरा रोड स्टेशन से सफर करने वाले यात्रियों से कहा गया है कि वे इस बंदी का ध्यान रखें और स्टेशन के अंदर अपनी आवाजाही उसी हिसाब से तय करें।
इससे पहले शनिवार, 24 अक्टूबर को पश्चिम रेलवे ने एक ही दिन में आठ जगहों पर पीने के पानी की गुणवत्ता के 371 टेस्ट किए। रेलवे के मुताबिक सभी टेस्ट के नतीजे संतोषजनक रहे।
यह जांच रेलवे जोन के नियमित जल गुणवत्ता निगरानी कार्यक्रम का हिस्सा थी। इस कार्यक्रम का मकसद रेलवे परिसर में दिए जाने वाले पीने के पानी की सुरक्षा परखना है। साथ ही यात्रियों और कर्मचारियों के लिए साफ-सफाई के मानकों को मजबूत करना भी इसका मकसद है।
कुल 371 टेस्ट में 335 रेसिडुअल क्लोरीन की जांच थी और 36 बैक्टीरियोलॉजिकल टेस्ट थे। पश्चिम रेलवे ने बताया कि सभी जांचों में नतीजे संतोषजनक आए। यानी जिन मानकों को परखा गया, उन पर 100 per cent अनुपालन रहा।
ये जांच पश्चिम रेलवे के नेटवर्क में आठ जगहों और यूनिटों पर की गईं। इनमें जगजीवन राम हॉस्पिटल, मुंबई सेंट्रल, वडोदरा, अहमदाबाद, रतलाम, राजकोट, भावनगर और दाहोद शामिल हैं।
इस कवायद में पीने के पानी में रेसिडुअल क्लोरीन का स्तर देखा गया और उसकी बैक्टीरियोलॉजिकल गुणवत्ता की भी जांच हुई। रेलवे सुविधाओं में पानी की गुणवत्ता परखने के लिए ऐसी जांच नियमित निगरानी के तौर पर की जाती है।
रेसिडुअल क्लोरीन टेस्ट से पता चलता है कि साफ किए गए पानी में क्लोरीन की पर्याप्त मात्रा बची है या नहीं, ताकि सूक्ष्म जीवों से होने वाले संक्रमण से बचाव रहे। वहीं बैक्टीरियोलॉजिकल टेस्ट से यह पता चलता है कि पानी में नुकसानदेह सूक्ष्म जीवों का संदूषण तो नहीं है और पानी संबंधित सुरक्षा मानकों पर खरा उतरता है या नहीं।
पश्चिम रेलवे ने कहा कि उस दिन किए गए सभी 371 टेस्ट के नतीजे संतोषजनक रहे। हालांकि रेलवे की विज्ञप्ति में अलग-अलग जांच की रीडिंग, टेस्ट के ब्योरेवार मानक और सैंपल लेने व जांचने के तरीके नहीं बताए गए।
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