मानखुर्द में चिल्ड्रन्स एड सोसायटी की छह एकड़ जमीन से आखिरी अतिक्रमण भी हटा
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मुंबई उपनगर जिला प्रशासन ने मंगलवार को सायन-पनवेल हाईवे के किनारे की छह एकड़ सरकारी जमीन पर बचा आखिरी अतिक्रमण गिरा दिया।
मुंबई उपनगर जिला प्रशासन ने मंगलवार को मानखुर्द में चिल्ड्रन्स एड सोसायटी को लीज पर दी गई छह एकड़ की कीमती सरकारी जमीन पर बचा आखिरी अतिक्रमण भी हटा दिया। लंबे समय से चल रही प्रशासनिक मुहिम के आखिरी दौर में सायन-पनवेल हाईवे के किनारे बनी अवैध झोपड़ियां और ग्राउंड प्लस वन मंजिल वाले रिहायशी ढांचे गिराए गए। ये ढांचे 10 गुंठा जमीन पर थे, यानी करीब 10,890 वर्ग फुट, जिसकी कीमत लगभग 10.42 करोड़ रुपये आंकी गई है।
मंगलवार की आखिरी कार्रवाई में एक ही परिवार के आठ से 10 कमरों वाले रिहायशी ढांचों को निशाना बनाया गया। कार्रवाई सुबह करीब 11.30 बजे शुरू हुई। मौके पर एक्सकेवेटर, BMC के कर्मचारी और पुलिस की टुकड़ियां तैनात थीं। ढांचे गिराने से पहले रहने वालों को अपना निजी सामान निकालने का वक्त दिया गया। कानून-व्यवस्था पुलिस ने संभाली, जबकि मलबा हटाने और तोड़फोड़ की निगरानी नगर निगम की टीमों ने की।
यह कार्रवाई उपनगर कलेक्टर के अतिक्रमण विरोधी स्टाफ, स्थानीय BMC वार्ड दफ्तर के अफसरों और पुलिस की साझा टीम ने की। इसी तालमेल से प्रशासन को पूरे छह एकड़ के प्लॉट का कब्जा मिल गया। खुले बाजार में इस जमीन की कीमत करीब 250 करोड़ रुपये बताई जाती है। कब्जा उसी दिन दोपहर 3 बजे तय बॉम्बे हाईकोर्ट की सुनवाई से कुछ घंटे पहले मिला। अपील को बॉम्बे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया।
विवाद की जड़ 1939 में है, जब सरकार ने मानखुर्द और देवनार में करीब 140 एकड़ और छह गुंठा जमीन खास लीज शर्तों पर चिल्ड्रन्स एड सोसायटी को दी थी। राजस्व रिकॉर्ड से पता चला कि इसमें से करीब 23 एकड़ जमीन बिना इजाजत पांच निजी पक्षों को सब-लीज पर दे दी गई। इसी वजह से अवैध कब्जे और गैरकानूनी निर्माण हुए।
सायन-पनवेल हाईवे के किनारे का यह छह एकड़ का टुकड़ा मानखुर्द के सबसे कीमती जमीन के हिस्सों में गिना जाता है। पिछले महीने कार्रवाई के पहले चरणों में इसी बड़े कब्जे वाले इलाके से 57 अनधिकृत कमर्शियल यूनिट हटाई जा चुकी हैं।
मामले का क्रम यह रहा: 1939 में सरकार ने सोसायटी को जमीन दी। 23 एकड़ जमीन राज्य की मंजूरी के बिना पांच संस्थाओं को सब-लीज पर दी गई। 2018 में मुंबई उपनगर कलेक्टर ने जमीन पर बेदखली की कार्रवाई के निर्देश दिए। ऊंचे राजस्व अधिकारियों और महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री के सामने की गई अपीलें खारिज हो गईं, जिससे आखिरी सफाई का रास्ता खुला।
उपनगर कलेक्टर सौरभ कटियार ने कहा, "हमने जमीन पर करीब 57 अनधिकृत कमर्शियल यूनिट गिराई थीं। बारिश के मौसम की वजह से मानवीय आधार पर रिहायशी झोपड़ियों को उस वक्त छोड़ दिया गया था। इस कार्रवाई से पूरे प्लॉट की सफाई पूरी हो गई है और यह सरकारी जमीन को अतिक्रमण से वापस लेने की हमारी जारी मुहिम का हिस्सा है।"
अतिरिक्त कलेक्टर (अतिक्रमण) पद्माकर रोकडे ने कहा, "सभी एजेंसियों के आपसी तालमेल से ही यह कार्रवाई मुमकिन हो सकी। चिल्ड्रन्स एड सोसायटी की पूरी जमीन अब अतिक्रमण से मुक्त है। आगे इसका इस्तेमाल कैसे होगा, यह अब सरकार तय करेगी।" ढांचे हटने के बाद प्रशासन का ध्यान अब जमीन की घेराबंदी पक्की करने और सरकारी फाइलों का काम पूरा करने पर है।
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