सामना के संपादकीय में शिवसेना (UBT) के सवाल: शाह और फडणवीस सरकार सुरक्षा पर घिरी
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने बुधवार को कानून-व्यवस्था पर केंद्र और महाराष्ट्र सरकार को घेरा। पार्टी ने अमिताभ बच्चन, टाइगर श्रॉफ और नागपुर के सराफा कारोबारियों का हवाला दिया।
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने बुधवार को केंद्र सरकार और महाराष्ट्र सरकार पर कानून-व्यवस्था को लेकर निशाना साधा। पार्टी ने अपनी बात के लिए अभिनेता अमिताभ बच्चन का उदाहरण दिया, जो बुलेटप्रूफ कांच के घेरे के पीछे से अपने फैन्स से मिले।
पार्टी के मुखपत्र सामना में छपे संपादकीय में उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाले गुट ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को सीधे निशाने पर लिया। उसका आरोप है कि बड़ी हस्तियों, कारोबारियों और आम लोगों की हिफाजत करने में प्रशासन नाकाम रहा है।
संपादकीय में जुहू में बच्चन के घर जलसा के बाहर होने वाली उनकी साप्ताहिक मुलाकात का जिक्र है। रविवार, 1 नवंबर को बच्चन ने वहां सुरक्षा वाले कांच के घेरे के पीछे से फैन्स का अभिवादन किया। यह इंतजाम ऐसे वक्त हुआ जब अभिनेता को धमकियों की खबरें आई हैं और हाल ही में बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ से जुड़ी फायरिंग की घटना भी हुई है।
संपादकीय ने पूछा कि जिन्हें उसने राष्ट्रीय धरोहर बताया और जिनका कोई राजनीतिक दुश्मन नहीं है, उन बच्चन को फैन्स से मिलने के लिए सुरक्षा की आड़ क्यों लेनी पड़ रही है। उसके मुताबिक यह घटना महाराष्ट्र में बिगड़ते सुरक्षा हालात को दिखाती है और नागरिकों को बचाने की प्रशासन की क्षमता पर सवाल खड़े करती है।
पार्टी ने मुंबई में टाइगर श्रॉफ की गाड़ी से जुड़ी फायरिंग का भी जिक्र किया। साथ ही नागपुर के बुलियन कारोबारियों को मिली धमकियों की बात उठाई। बताया गया है कि नागपुर के सराफा बाजार में कम से कम आठ बुलियन कारोबारियों को लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नाम से धमकी भरे पत्र मिले, जिनमें हर किसी से 10 लाख रुपये मांगे गए। पुलिस को शक है कि स्थानीय अपराधी गैंग के नाम का इस्तेमाल करके कारोबारियों को डरा रहे हो सकते हैं। धमकियों की जांच जारी है।
संपादकीय ने सवाल किया कि फिल्मी हस्तियां, कारोबारी और आम नागरिक धमकियों और डर के साये में क्यों जी रहे हैं। उसने राज्य में चल रहे आपराधिक नेटवर्क को खत्म न कर पाने पर भी अधिकारियों की आलोचना की।
शिवसेना (UBT) ने खासतौर पर लॉरेंस बिश्नोई के नेटवर्क के चलते रहने पर सवाल उठाया। बिश्नोई गुजरात की साबरमती सेंट्रल जेल में बंद है। संपादकीय में केंद्र की उस पाबंदी की आलोचना की गई जिसके तहत उसे दूसरे राज्यों की पुलिस की हिरासत में नहीं सौंपा जा सकता। गृह मंत्रालय ने यह आदेश फिर से लागू किया है, जिससे बिश्नोई को जेल से बाहर नहीं ले जाया जा सकता। हालांकि जांच करने वाले जेल के अंदर उससे पूछताछ की इजाजत मांग सकते हैं। पार्टी का आरोप है कि इन पाबंदियों ने जेल में बंद इस गैंगस्टर को एक तरह से "अदृश्य सुरक्षा कवच" दे दिया है।
संपादकीय में सत्ता पक्ष की राजनीतिक रैलियों और राष्ट्रीय सुरक्षा को अच्छे से संभालने के दावों पर भी निशाना साधा गया। उसका कहना है कि बड़ी हस्तियों और कारोबारियों को न बचा पाने से सरकार की साख पर सवाल उठे हैं। संपादकीय में पूछा गया, "सत्ताधारी नेतृत्व भारी पुलिस सुरक्षा में बड़ी-बड़ी रैलियां करता है, जबकि आम नागरिक, बिल्डर और फिल्मी सितारे हर वक्त दहशत में जी रहे हैं। राज्य कितने नागरिकों को खास सुरक्षा कवच दे सकता है?"
पार्टी ने अमित शाह के इस्तीफे की भी मांग की। उसका आरोप है कि केंद्र बढ़ती सुरक्षा चिंताओं से निपटने में नाकाम रहा है। संपादकीय का आखिरी सवाल यह था कि एक तरफ सरकार राजनीतिक दबदबे के दावे करती है, और दूसरी तरफ, जैसा कि पार्टी कहती है, पूरे महाराष्ट्र में बड़ी हस्तियों और कारोबारियों की शारीरिक सुरक्षा की गारंटी देने में नाकाम रहती है।
कमेंट
अभी कोई कमेंट नहीं। पहले आप लिखिए।