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बोरिवली BEST डिपो: सुप्रीम कोर्ट ने BMC आयुक्त भिडे को अवमानना का नोटिस दिया, 5 लाख जुर्माना

बोरिवली BEST डिपो: सुप्रीम कोर्ट ने BMC आयुक्त भिडे को अवमानना का नोटिस दिया, 5 लाख जुर्माना तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
शहर PT24 शहर डेस्क

बोरिवली में BEST बस डिपो की जमीन से अतिक्रमण न हटने पर सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई महानगरपालिका आयुक्त अश्विनी भिडे को कारण बताओ नोटिस जारी किया और BMC पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया।

बोरिवली में BEST बस डिपो के लिए रखी गई जमीन से अतिक्रमण हटाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने मुंबई महानगरपालिका की आयुक्त अश्विनी भिडे को अदालत की अवमानना के मामले में कारण बताओ नोटिस जारी किया है। कोर्ट का कहना है कि उसके दो आदेशों का पालन नहीं किया गया, और इसी बात पर उसने आयुक्त को फटकार भी लगाई।

कोर्ट ने आयुक्त की वह अर्जी खारिज कर दी, जिसमें और वक्त मांगा गया था। इसके साथ ही मुंबई महानगरपालिका पर 5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। अवमानना मामले का फैसला होने तक आयुक्त और संबंधित कर्मचारियों का वेतन रोकने का आदेश भी दिया गया है। महानगरपालिका की दलील थी कि मराठी कागजात का अंग्रेजी में अनुवाद करने में वक्त लग गया। कोर्ट ने यह दलील नहीं मानी।

3 नवंबर 2026 को हुई सुनवाई में कोर्ट ने ये सारे कदम उठाए। इनमें आयुक्त और उनके कर्मचारियों के वेतन के भुगतान पर रोक, BMC पर 5 लाख रुपये का जुर्माना और अतिक्रमण हटाने के लिए 30 दिन और मांगने वाली BMC की गुजारिश का खारिज होना शामिल है।

अब सवाल यह है कि पूरा विवाद आखिर है क्या। बोरिवली में BEST बस डिपो की जगह को लेकर मुंबई महानगरपालिका (BMC) और एक निजी डेवलपर के बीच कई साल से कानूनी लड़ाई चल रही है। वहां सार्वजनिक BEST बस डिपो बनाने के लिए एक भूखंड रखा गया था, लेकिन उसके कब्जे और इस्तेमाल को लेकर दोनों पक्ष अदालत में आमने-सामने आ गए।

अगस्त 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अहम निर्देश दिए थे। कोर्ट ने साफ कहा था कि निजी डेवलपर इस भूखंड का खाली और शांतिपूर्ण कब्जा मुंबई महानगरपालिका को सौंपे। जमीन पर बनी प्रशासकीय इमारत का कब्जा भी BMC को देने को कहा गया था।

उस वक्त सुप्रीम कोर्ट ने महानगरपालिका को तीन महीने की मोहलत दी थी। इस दौरान BMC को जगह का कब्जा लेना था, बाकी बचे अतिक्रमण कानूनी प्रक्रिया के हिसाब से हटाने थे, और यह पक्का करना था कि BEST बस डिपो पूरी क्षमता से चालू हो जाए।

लेकिन तीन महीने की मोहलत मिलने के बावजूद नवंबर 2025 तक जमीन से अतिक्रमण पूरी तरह नहीं हटे थे। तब भी सुप्रीम कोर्ट ने महानगरपालिका के कामकाज पर नाराजगी जताई थी।

इस मामले की खास बात यह है कि अब यह सिर्फ जमीन की मिल्कियत का झगड़ा नहीं रहा। डेवलपर से जगह मिलने के बाद भी अतिक्रमण हटाकर बस डिपो चालू करने की जिम्मेदारी BMC पर है। यानी जगह तो मिल गई, पर अतिक्रमण हटाकर डिपो शुरू करने का सवाल अब भी जस का तस है।

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