दिवाली से पहले मिलेगी तनख्वाह, सरनाईक ने एसटी के 83,000 कर्मचारियों के लिए दिए निर्देश
परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने एमएसआरटीसी प्रशासन से कहा है कि नवंबर की तनख्वाह दिवाली से पहले दी जाए।
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महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री और महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन महामंडल (MSRTC) के चेयरमैन प्रताप सरनाईक ने एसटी प्रशासन को निर्देश दिया है कि करीब 83,000 कर्मचारियों को नवंबर की तनख्वाह दिवाली से पहले मिल जाए। इसके लिए तुरंत कदम उठाने को कहा गया है।
दिवाली का त्योहार 6 नवंबर से शुरू हो रहा है। सरनाईक का कहना है कि त्योहार की खरीदारी, घर के खर्चे और दूसरी आर्थिक जिम्मेदारियां संभालने के लिए कर्मचारियों को तनख्वाह वक्त पर मिलना जरूरी है।
आम तौर पर MSRTC के कर्मचारियों को हर महीने की 7 से 10 तारीख के बीच तनख्वाह मिलती है। दिवाली से पहले भुगतान हो सके, इसलिए सरनाईक ने महामंडल के फाइनेंस और प्लानिंग विभाग से कहा है कि जरूरी रकम के लिए राज्य सरकार से तुरंत पूछताछ और पीछा किया जाए।
विभाग को यह भी कहा गया है कि अलग-अलग सवारी रियायत योजनाओं की जो प्रतिपूर्ति बाकी है, उसे जल्दी जारी करवाया जाए। साथ ही तनख्वाह देने के लिए जो सरकारी अनुदान चाहिए, वह भी जल्द दिलवाया जाए।
सरनाईक ने कहा कि MSRTC की आर्थिक दिक्कतों का असर इस पर नहीं पड़ना चाहिए कि कर्मचारी अपने परिवार के साथ दिवाली मनाएं। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे राज्य सरकार से तालमेल बनाएं, जरूरी पैसे का इंतजाम करें और भुगतान की पूरी योजना बनाएं, ताकि त्योहार से पहले तनख्वाह दी जा सके।
प्रशासन से कहा गया है कि इस मामले को पहली प्राथमिकता पर लिया जाए और तनख्वाह में देरी से बचने के लिए जो भी जरूरी कदम हों, वे उठाए जाएं।
इसी बीच MSRTC की कमाई में जुलाई के मुकाबले अगस्त में 66 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी दर्ज हुई है। बताया गया है कि सवारी की मांग के हिसाब से बसों के समय और सेवाओं में बदलाव किए गए, जिससे यह सुधार आया।
सरनाईक ने कमाई बढ़ाने और चलाने के खर्च से होने वाले नुकसान को घटाने के लिए कदम उठाने की बात कही है। ताजा आंकड़ों का श्रेय वे बस सेवाओं को सवारी की मांग से मिलाने की कोशिशों को देते हैं।
महामंडल ने 31 अगस्त को एक दिन की अब तक की सबसे ज्यादा कमाई, 45 करोड़ रुपये, दर्ज की। वहीं महीने की कमाई पहली बार 1,000 करोड़ रुपये के पार गई।
हर MSRTC डिपो अपने इलाके की आबादी को बस सेवा देने के लिए जिम्मेदार है। महामंडल के मुताबिक उसके 85 फीसदी से ज्यादा यात्री 100 किलोमीटर से कम का सफर करते हैं, इसलिए स्थानीय और क्षेत्रीय सेवाएं उसके कामकाज का अहम हिस्सा हैं।
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