महाराष्ट्र में साक्षरता अभियान के तहत करीब सात लाख लोगों ने दी परीक्षा
ULLAS - नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत रविवार को FLNAT हुआ। पास होने वालों को सर्टिफिकेट और मार्कशीट मिलेगी।
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महाराष्ट्र भर में रविवार को करीब सात लाख उम्मीदवार फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमरेसी असेसमेंट टेस्ट (FLNAT) में बैठे। यह परीक्षा केंद्र सरकार की प्रायोजित योजना ULLAS - नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत ली गई।
अधिकारियों ने बताया कि जो उम्मीदवार परीक्षा पास करेंगे, उन्हें सर्टिफिकेट और मार्कशीट दी जाएगी। इसके बाद वे कक्षा 3, 5, 8, 10 और 12 के बराबर की परीक्षाएं देकर आगे की पढ़ाई भी जारी रख सकते हैं।
महाराष्ट्र के निदेशक (योजनाएं) कृष्ण कुमार पाटील ने कहा कि कामयाब उम्मीदवारों को सर्टिफिकेट और मार्कशीट केंद्र सरकार के स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग की तरफ से मिलेगी।
यह कार्यक्रम केंद्र की गाइडलाइन के मुताबिक चलाया जा रहा है। इसका मकसद उन लोगों को बुनियादी साक्षरता सिखाना है जो पढ़ना-लिखना नहीं जानते। जो उम्मीदवार ULLAS ऐप पर रजिस्टर थे, उनके लिए यह टेस्ट महाराष्ट्र के सभी जिलों में UDISE यानी यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इन्फॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन के तहत मान्यता प्राप्त स्कूलों में हुआ।
परीक्षा नौ भाषाओं में रखी गई थी: मराठी, हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, गुजराती, कन्नड़, तेलुगु, तमिल और बंगाली। इससे हर उम्मीदवार अपनी पसंद की भाषा में टेस्ट दे सका।
FLNAT का मकसद बड़ों में बुनियादी पढ़ने-लिखने और गिनती-हिसाब की समझ को परखना है, ताकि वे रोजमर्रा की जिंदगी में हिस्सा ले सकें। कार्यक्रम में व्यावहारिक जीवन कौशल भी सिखाए जाते हैं, जैसे वित्तीय और कानूनी साक्षरता, डिजिटल साक्षरता, आपदा प्रबंधन, सेहत के बारे में जागरूकता, बच्चों की देखभाल, शिक्षा और परिवार कल्याण।
महाराष्ट्र में ULLAS - नव भारत साक्षरता कार्यक्रम स्कूल शिक्षा मंत्री दादाजी भुसे, स्कूल शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. पंकज भोयर, प्रधान सचिव रणजीत सिंह देओल और आयुक्त सचिंद्र प्रताप सिंह के मार्गदर्शन में लागू हो रहा है।
इंतजामों का जायजा लेने और परीक्षा पर नजर रखने के लिए जिला कलेक्टर, मुख्य कार्यकारी अधिकारी और केंद्र व राज्य सरकार के शिक्षा विभागों के अधिकारी अलग-अलग परीक्षा केंद्रों पर पहुंचे।
जिला स्तर के अधिकारी, शिक्षा अधिकारी, प्रिंसिपल, ब्लॉक शिक्षा अधिकारी, विस्तार अधिकारी और केंद्र प्रमुख भी परीक्षा की प्रक्रिया देखने केंद्रों पर गए। शिक्षक संगठनों, स्कूल प्रिंसिपलों और शिक्षकों ने मिलकर इंतजाम संभाले और पूरे राज्य में टेस्ट आसानी से कराने में मदद की।
यह परीक्षा सरकार की उन बड़ी कोशिशों का हिस्सा है, जिनके जरिए बड़ों में साक्षरता बढ़ाई जा रही है और नए साक्षर हुए लोगों को आगे पढ़ने और जरूरी जीवन कौशल सीखने के मौके दिए जा रहे हैं।
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