राज ठाकरे का दावा: अगले 2-5 महीने में देश में कुछ बड़ा होगा, बैलेट पेपर से वोटिंग की मांग
मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने संजय राऊत की बात का समर्थन किया, बैलेट पेपर पर चुनाव की मांग दोहराई और सरकार, संस्थाओं और आरएसएस पर सवाल उठाए।
शिवसेना के दशहरा मेले में शिवसेना उबाठा के प्रमुख उद्धव ठाकरे और सांसद संजय राऊत ने केंद्र की मोदी सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश में तानाशाही चल रही है और आंदोलन करने वाले छात्रों को पीटा जा रहा है। राऊत ने यह दावा भी किया कि अप्रैल महीने में मोदी सत्ता से चले जाएंगे। अब मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने भी राऊत की इस बात पर मुहर लगा दी है।
राज ठाकरे ने मांग की कि देश में चुनाव बैलेट पेपर पर ही होने चाहिए। उन्होंने कहा कि अगले 2-5 महीने में देश में कुछ बड़ा होगा, गड़बड़ होगी, और एक छोटा सा दौर ऐसा आएगा जब देश का कोई प्रधानमंत्री नहीं होगा।
बैलेट पेपर के बारे में राज ठाकरे ने बताया कि वे 2018 से इसके लिए कोशिश करते आ रहे हैं और आयुक्तों से मिलकर भी बात कर चुके हैं। उनके मुताबिक पहले लोगों को यह बात समझ नहीं आती थी, मगर अब समझ आ रही है। वोट डालने वाले को यह तसल्ली मिलनी चाहिए कि उसका वोट पेटी में गया है। हारना या जीतना अलग मामला है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल में भी बैलेट पेपर पर वोटिंग होती है और जो आगे बढ़े हुए देश हैं, वहां भी बैलेट से ही मतदान हो रहा है। फ्रांस में मशीन रद्द हो गई और वे बैलेट पेपर पर लौट आए। राज ने यह भी कहा कि विधानसभा और लोकसभा के चुनाव एक साथ नहीं होते। गिनती जल्दी हो जाती है, फिर भी नतीजे देर से मिलते हैं। चार दिन लग जाएं तो चलेगा, जल्दी किसको है।
रेजीम चेंज के बारे में राज ठाकरे ने कहा कि संजय राऊत से उनकी बात हुई है। उन्होंने कहा कि एपस्टिन के साथ वाली फोटो बाहर आ चुकी है, बहुत सारी बातें बाहर आएंगी और यह सिलसिला रुकने वाला नहीं है। उनके मुताबिक सरकार गलती पर गलती करती रहेगी। आने वाले कुछ सालों में देश सड़क पर उतर आए तो उन्हें हैरानी नहीं होगी।
नीट आंदोलन का जिक्र करते हुए राज ठाकरे ने कहा कि तब जो बच्चे बाहर आए थे, वे सिर्फ नीट के लिए नहीं आए थे। लोगों के मन में किसी न किसी बात का गुस्सा है और उसे ही जताने वे निकले थे। उन्होंने कहा कि राज्य में सूखा घोषित हो चुका है, अनाज की किल्लत जैसे हालात सरकार से संभलने वाले नहीं हैं। शांति से आंदोलन कर रहे बच्चों पर लाठीचार्ज किया गया, जबकि उन्होंने कुछ किया ही नहीं था। उन्होंने पूछा कि क्या भाजपा अपने पुराने दिन भूल गई, और कहा कि अगली बार उनकी तस्वीर लगा देना।
राज ठाकरे ने सवाल किया कि देश में लोकतंत्र कहां है। उनके मुताबिक अमेरिका में लोकतंत्र है, हमारे यहां नहीं। ऑस्कर के वक्त अभिनेता ट्रम्प के बारे में कुछ भी बोल देते हैं, पर वहां फतवे नहीं निकलते। उन्होंने बताया कि शबीर भाटिया ने अदानी और मोदी पर डॉक्यूमेंट्री बनाई है और पुलिस ने उसे हटाने को कहा है। उन्होंने पूछा कि क्या सिर्फ भाजपा के स्पॉन्सर किए हुए फिल्म ही देखें। दोनों चीजें देखने दो, सत्ता का अमरता का पट्टा लेकर कोई नहीं आया, बदलाव जरूरी होता है, हाफ पैंट की फुल पैंट नहीं हो गई क्या।
संस्थाओं पर राज ठाकरे ने कहा कि मर्डर केस के आरोपी को बेल दे दी गई और सीजेपी के आदमी को गिरफ्तार कर लिया गया। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट को भी सोचना चाहिए कि वे कैसे फैसले दे रहे हैं। उन्होंने पूछा कि कौन सी संस्थाएं स्वायत्त रह गई हैं, और क्या पत्रकार भी स्वायत्त रहे हैं। उन्होंने कहा कि सत्ता मोहन भागवत के हाथ में नहीं, देश की जनता के हाथ में है। 2014 में सत्ता नरेंद्र मोदी की वजह से आई, आरएसएस की वजह से नहीं। राज ने आरएसएस को भी सलाह दी कि सत्ता हमने लाई, यह गलतफहमी हो तो वह सही नहीं है।
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