शनिवार, 31 अक्टूबर 2026

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हर्ष गोयनका ने मुंढे को बताया शाम का हीरो, तुकाराम मुंढे बोले- यह पूरी टीम की मेहनत है

हर्ष गोयनका ने मुंढे को बताया शाम का हीरो, तुकाराम मुंढे बोले- यह पूरी टीम की मेहनत है तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
शहर PT24 शहर डेस्क

आईएएस अफसर तुकाराम मुंढे ने उद्योगपति हर्ष गोयनका की तारीफ का जवाब दिया है। मुंढे ने कहा कि जनसेवा सबकी मिली-जुली जिम्मेदारी है और ईमानदारी और जवाबदेही अपवाद नहीं, बल्कि नियम होनी चाहिए। गोयनका ने खाने में मिलावट और असुरक्षित किचन के खिलाफ मुंढे के काम की सराहना की थी।

RPG Enterprises के चेयरमैन गोयनका ने मुंढे से पहली बार मिलने के बाद X पर एक पोस्ट डाली। उन्होंने मुंढे को "शाम का हीरो" बताया। गोयनका ने मिलावट, असुरक्षित किचन और रसूखदार प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई की कोशिशों की तारीफ की। उन्होंने लिखा, "मैं पहली बार तुकाराम मुंढे से मिला और बिना शक वे शाम के हीरो थे। हर कोई उनसे मिलना चाहता था।"

मुंढे की लोकप्रियता की वजह बताते हुए गोयनका ने कहा, "क्योंकि वे वही कर रहे हैं जो नागरिक अपने सिविल सर्वेंट्स से उम्मीद करते हैं। खाने में मिलावट, असुरक्षित किचन और ताकतवर प्रतिष्ठानों से टक्कर लेना।"

गोयनका ने यह सवाल भी उठाया कि ईमानदारी और दृढ़ता से अपना काम करने वाला अफसर सिविल सर्विस में खास क्यों बन गया है। उन्होंने कहा, "यह कमाल की बात है कि सिर्फ ईमानदारी और पक्के इरादे से अपना काम करने वाला अफसर लोगों का हीरो बन जाता है। लेकिन यह बाकी सिविल सर्विस पर कितना बुरा असर डालता है, जहां ऐसी मिसालें इतनी कम हैं?"

इस तारीफ के जवाब में मुंढे ने बात अपने से हटाकर पूरी सिविल सर्विस पर रखी। उन्होंने कहा कि जनसेवा किसी एक आदमी की उपलब्धि नहीं है। मुंढे ने लिखा, "जनसेवा कभी किसी एक व्यक्ति के बारे में नहीं होती। यह ईमानदारी, हिम्मत और पक्के इरादे के साथ नागरिकों की सेवा करने की सामूहिक प्रतिबद्धता है।"

मुंढे इस बात से भी सहमत नहीं दिखे कि अपने फर्ज के लिए समर्पित अफसर कम हैं। उनका कहना था कि देश भर में बहुत से सिविल सर्वेंट शानदार काम कर रहे हैं, लेकिन उन्हें उतनी पहचान कम ही मिलती है। उन्होंने लिखा, "देश भर में अनगिनत सिविल सर्वेंट बेहतरीन काम कर रहे हैं, शायद मुझसे भी बेहतर, लेकिन उनकी मेहनत को वह पहचान कम ही मिलती है जिसके वे हकदार हैं।"

काम का श्रेय मुंढे ने अपनी टीम को दिया। उन्होंने जोर दिया कि सार्वजनिक प्रशासन में जो भी उपलब्धियां हैं, वे सबकी मिली-जुली कोशिश का नतीजा हैं। उन्होंने कहा, "मैं इस साझा मकसद के लिए काम कर रही एक बहुत बड़ी टीम का छोटा सा हिस्सा हूं। हम जो भी हासिल करते हैं, वह हमेशा सामूहिक कोशिश होती है।"

अपने जवाब के आखिर में मुंढे ने नागरिकों के प्रति सिविल सर्वेंट्स की जिम्मेदारी और ईमानदारी व जवाबदेही को आम चलन बनाने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने लिखा, "नागरिकों का भरोसा और उनकी उम्मीदें हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी हैं। ईमानदार, जवाबदेह और नागरिकों को केंद्र में रखने वाली जनसेवा कभी अपवाद नहीं होनी चाहिए। यह नियम होनी चाहिए।"

गोयनका और मुंढे के बीच इस बातचीत से सरकारी अफसरों से लोगों की उम्मीदों पर ध्यान गया है। गोयनका ने आईएएस अफसर के काम को ईमानदार प्रशासन की मिसाल बताया, जबकि मुंढे ने इस मौके पर उन सिविल सर्वेंट्स को याद किया जो बिना पहचान मिले अपना काम करते रहते हैं। गोयनका की पोस्ट में यह सवाल भी था कि सिर्फ अपना फर्ज निभाने पर किसी अफसर को मिली पहचान क्या सिविल सर्विस की किसी बड़ी चिंता की ओर इशारा करती है।

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