शनिवार, 31 अक्टूबर 2026

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चेंबूर के सुमन नगर में 250-300 परिवारों को 15 नवंबर तक घर खाली करने का नोटिस

चेंबूर के सुमन नगर में 250-300 परिवारों को 15 नवंबर तक घर खाली करने का नोटिस तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
समाज PT24 समाज डेस्क

रेलवे पटरियों के किनारे बसे परिवार दिवाली के मौके पर बेघर होने के डर में हैं। रेलवे का कहना है कि कोर्ट के आदेश पर कार्रवाई हो रही है, जबकि निवासी अपने कागज़ात दिखाकर पात्रता का दावा कर रहे हैं।

चेंबूर के सुमन नगर में रहने वाले सैकड़ों परिवारों के लिए इस बार त्योहार की खुशी की जगह घर छिनने की फिक्र ने ले ली है। हार्बर और सेंट्रल रेलवे की पटरियों के किनारे बनी झोपड़ियों में रहने वाले लोगों को डर है कि 15 नवंबर की डेडलाइन के बाद वे बेघर हो जाएंगे। दूसरा ठिकाना ढूंढने के लिए उनके पास वक्त बहुत कम है।

सेंट्रल रेलवे (CR) ने 15 अक्टूबर को नोटिस जारी किया था। मिड-डे के पास इस नोटिस की कॉपी होने की बात कही गई है। नोटिस के मुताबिक पटरियों के दोनों तरफ झोपड़ियों में रहने वालों को एक महीने के अंदर घर खाली करने को कहा गया है। रेलवे अफसरों ने इलाके में सीमांकन का काम भी शुरू कर दिया है।

निवासी अनंत जाधव ने कहा, "उन्होंने बस ज़ुबानी बताया है कि ट्रेनों के लिए कार शेड बनाया जाएगा। कोई आधिकारिक वजह नहीं दी गई है।"

CR के एक अफसर के मुताबिक यह कार्रवाई कोर्ट के आदेशों के हिसाब से हो रही है और इनमें से कोई भी परिवार पुनर्वास के लायक नहीं है। अफसर ने कहा, "प्रक्रिया हाई कोर्ट के आदेशों के मुताबिक चल रही है। हम कानून के खिलाफ कुछ नहीं कर रहे। किसी भी परिवार को पुनर्वास की पात्रता नहीं है। वैसे भी, जब भी परिवार पात्र हुए हैं, उन्हें हमेशा घर मिला है। कोर्ट के आदेश के मुताबिक हम उन्हें अगले छह महीने तक हर महीने 2000 रुपये देंगे।"

निवासी रेलवे की इस बात से सहमत नहीं हैं। उनका दावा है कि उनके पास पात्रता और बरसों से यहां रहने का सबूत है। उन्होंने 2001 और 2011 की जनगणना के रिकॉर्ड, वोटर आईडी, आधार कार्ड, बिजली बिल और BMC के पानी के बिल दिखाने की बात कही।

अनंत जाधव ने कहा, "2001 और 2011 की जनगणना के कागज़, वोटर आईडी, आधार कार्ड, बिजली बिल, सब कुछ इसी पते पर है। BMC के पानी के बिल भी इसी पते पर हैं। अगर हम अवैध कब्ज़ाधारी हैं तो महानगरपालिका और बाकी सरकारी संस्थाएं दशकों से हमें ये सुविधाएं क्यों दे रही हैं? कम से कम 250-300 परिवारों के पास पात्रता के सारे सबूत हैं।" निवासियों का सवाल है कि सैकड़ों परिवार एक महीने में दूसरा घर कैसे ढूंढेंगे।

निवासियों के मुताबिक नोटिस का वक्त दिवाली और बच्चों की परीक्षाओं के साथ पड़ा है, जिससे उनकी परेशानी और बढ़ गई है। शंकर तांडेल ने कहा, "इससे बुरा वक्त नहीं हो सकता था। दिवाली सिर पर है और त्योहार की तैयारी करने की जगह हम सोच रहे हैं कि 15 नवंबर के बाद कहां सोएंगे। हमने बरसों लगाकर घर बनाए हैं और हमारे पास दावों के कागज़ हैं। हमसे यूं ही जाने को कैसे कहा जा सकता है?"

स्वप्नाली आबनवे ने कहा, "मेरे बच्चे की परीक्षा आने वाली है, लेकिन जब पता ही नहीं कि आने वाले कुछ दिनों में सिर पर छत रहेगी या नहीं, तो पढ़ाई में मन लगाना नामुमकिन है। हम नए कपड़े खरीदने या दिवाली मनाने की बात सोच भी नहीं सकते। हमारी एक ही फिक्र है कि घर बच जाएं।"

कई परिवारों के लिए बात सिर्फ घर की नहीं है। उनका मोहल्ला, रोज़गार और बरसों में बना सहारा भी इसी जगह से जुड़ा है। बेनू नाम के एक निवासी ने कहा, "मैं यहीं पैदा हुआ, पूरी ज़िंदगी यहीं रहा, यहीं शादी हुई और अब दो बच्चे हैं। यह सब इसी जगह हुआ। हम कुछ खास नहीं मांग रहे। बस इतना चाहते हैं कि इतना बड़ा कदम उठाने से पहले अधिकारी हमारे कागज़ देखें और हमारी बात सुनें। यहां सैकड़ों परिवार हैं। बच्चों और सामान के साथ हम कहां जाएं?"

वकील संदेश कदम ने बताया कि निवासी फिर से कोर्ट जाने की तैयारी में हैं। वे उन परिवारों के लिए राहत मांगेंगे जिनका दावा है कि उनके पास पुनर्वास की पात्रता साबित करने वाले कागज़ हैं।

कदम ने कहा, "हमने अगले हफ्ते एक और अलग PIL दाखिल करने की योजना बनाई है, ताकि कम से कम इन 250-300 परिवारों को, जिनके पास सारे दस्तावेज़ और सबूत हैं, इंसाफ मिले। हमने कागज़ रेलवे को पहले ही दे दिए थे, लेकिन उन्होंने ध्यान नहीं दिया।"

उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ निवासियों के पास ऐसे कागज़ हैं जिनके मुताबिक रेलवे जिस ज़मीन पर दावा कर रहा है, वह पूरी उसकी नहीं है और उसका एक हिस्सा राष्ट्रीय केमिकल्स एंड फर्टिलाइज़र्स (RCF) का है।

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