शुक्रवार, 6 नवंबर 2026

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चेंबूर में 17 पटाखों की आवाज जाँची गई, 11 के पैकेट पर शोर का स्तर नहीं लिखा मिला

कल्चर PT24 संस्कृति डेस्क

महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और आवाज फाउंडेशन की जांच में सारे पटाखे 125 dB(A) की सीमा के अंदर रहे, लेकिन पैकेजिंग पर शोर की जानकारी और QR कोड को लेकर कमियां सामने आईं।

दिवाली से पहले महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPCB) और Awaaz Foundation ने 5 नवंबर को चेंबूर के RCF ग्राउंड पर 17 तरह के पटाखों की आवाज की जांच की। यह दोनों की सालाना शोर जांच का हिस्सा थी। जांच में सारे पटाखे तय सीमा 125 dB(A) के अंदर रहे, हालांकि कुछ पटाखे टेस्ट के दौरान 90 dB(A) के ऊपर भी गए।

जांच में MPCB के नॉइज मॉनिटर इस्तेमाल हुए, जो dB(A) और dB(C) दोनों स्तर दर्ज करते हैं। इंसानी कान को सुनाई देने वाली आवाज नापने के लिए आम तौर पर dB(A) रीडिंग ही देखी जाती है। खुले मैदान में सबसे ऊंची रीडिंग 93.1 dB(A) दर्ज हुई, यह लाइव रीडिंग के मुताबिक है। MPCB ने अभी अपनी औपचारिक रिपोर्ट जारी नहीं की है।

जिन 17 किस्मों को परखा गया, उनमें लाइट फाउंटेन, क्रैकलिंग फाउंटेन, पटाखों की लड़ियां (ladis), 240 शॉट वाले पटाखे, सुतली बम (sutli bombs) और रॉकेट बम शामिल थे। सबसे ज्यादा आवाज 10,000 शॉट वाली ladi की रही, यानी 93.1 dB(A)। सुतली बम 91.8 dB(A) पर रहा। ये रीडिंग चेंबूर ईस्ट के RCF ग्राउंड पर टेस्ट के दौरान ली गईं।

पैकेजिंग को लेकर चिंता भी उभरी। परखे गए 17 पटाखों में से 11 के पैकेट पर शोर का स्तर लिखा ही नहीं था। आठ पैकेट के QR कोड स्कैन नहीं हो पाए। यह भी देखा गया कि टेस्ट किए गए सभी पटाखों से धुआं निकला।

Awaaz Foundation की प्रमुख सुमैरा अब्दुलअली ने कहा, "dB(A) वह आवाज की फ्रीक्वेंसी है जो आम तौर पर इंसान को सुनाई देती है, और इन टेस्ट में हमने ज्यादा से ज्यादा 91 dB(A) दर्ज किया। 80 dB(A) से ऊपर की आवाज अगर लगातार बनी रहे तो इंसानी कान पर दबाव डाल सकती है।"

पटाखों की जांच का यह फाउंडेशन का 20वां साल है। अब्दुलअली के मुताबिक बीते सालों में कुल मिलाकर डेसिबल स्तर घटा है। उन्होंने यह भी बताया कि फाउंडेशन पटाखों की केमिकल बनावट की जांच भी अलग से करता है। इस साल जांच के पटाखे टेस्ट से दो दिन पहले खरीदे गए थे।

पिछले सालों की तरह इस बार भी पटाखे खुले मैदान में फोड़कर परखे गए। लेकिन जानकारों ने आगाह किया कि जब कई पटाखे एक साथ फूटते हैं, या इमारतों के बीच जैसी बंद जगहों पर फूटते हैं, तो आवाज और बढ़ सकती है। इस साल बॉम्बे हाई कोर्ट ने नागरिकों से कहा है कि वे सार्वजनिक जगहों पर पटाखे न फोड़ें।

MPCB के एक अधिकारी ने कहा, "हम नागरिकों से पटाखों से बचने की अपील करते हैं। फिर भी अगर वे पटाखे फोड़ें, तो बेहतर है कि CSIR-National Environmental Engineering Research Institute से मंजूर ग्रीन पटाखे खरीदें, जिनसे उत्सर्जन 25 से 30 प्रतिशत कम होता है।"

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