वाशी APMC में सूखे मेवे हुए महंगे, दिवाली की बिक्री आम दिनों की 10-15 प्रतिशत रह गई
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आयात और माल भाड़े की मार से नवी मुंबई के APMC थोक बाजार में दिवाली पर सूखे मेवों का कारोबार ठंडा पड़ा है। बादाम और पिस्ता सबसे ज्यादा महंगे हुए हैं।
इस दिवाली कई घरों के खरीदारी के थैलों से सूखे मेवों का पारंपरिक डिब्बा गायब रह सकता है। वजह है आयात और ढुलाई का बढ़ता खर्च, जिसने त्योहार की इन पसंदीदा चीजों को और महंगा कर दिया है। नवी मुंबई के APMC थोक बाजार में व्यापारी बता रहे हैं कि त्योहारी कारोबार में तेज गिरावट आई है और बिक्री दिवाली के आम स्तर की सिर्फ 10-15 प्रतिशत रह गई है।
दाम का असर सबसे ज्यादा बादाम और पिस्ते में दिख रहा है। पिछले साल बादाम करीब 750 रुपये किलो बिक रहा था, अब उसका भाव 950 रुपये किलो है, यानी 200 रुपये की बढ़ोतरी। पिस्ता पिछले साल लगभग 1200 रुपये किलो मिल रहा था और अब 1500 रुपये किलो पर पहुंच गया है। हालांकि सभी किस्मों में बढ़ोतरी एक जैसी नहीं है।
कुछ महंगे आयातित सूखे मेवे काफी चढ़े हैं, लेकिन व्यापारियों का कहना है कि सोशल मीडिया पर जो बात फैल रही है कि सभी सूखे मेवों के दाम आसमान छू रहे हैं, वह गुमराह करने वाली है।
मुंबई की भागीरथ मुथा एंड कंपनी के पार्टनर गोपाल मुथा के मुताबिक दाम बढ़ने के तीन कारण हैं। पहला, ईरान का संघर्ष। भू-राजनीतिक तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन और आयातित माल की आवाजाही पर पड़ा है। दूसरा, कम उत्पादन। व्यापारियों का अनुमान है कि फसल का उत्पादन करीब 30 प्रतिशत घटा है, जिससे सप्लाई पर दबाव बढ़ा है। तीसरा, माल भाड़े का झटका। मुथा के अनुसार अंतरराष्ट्रीय फ्रेट चार्ज पहले 500 से 800 डॉलर के बीच बताए जाते थे, जो अब करीब 8000 डॉलर तक पहुंच गए हैं। यह किस शिपमेंट के आधार पर है, यह पक्का होना बाकी है।
खुदरा विक्रेताओं की बड़ी चिंता त्योहारी बिक्री पर पड़ा असर है। बादाम, काजू, किशमिश, पिस्ता, खुबानी (Apricot) और अंजीर की दिवाली में घर के इस्तेमाल और तोहफे, दोनों के लिए अच्छी मांग रहती है। लेकिन प्रीमियम डिब्बे महंगे होने से ग्राहक या तो कम मात्रा में खरीद रहे हैं या सस्ते विकल्प की तरफ जा रहे हैं।
वाशी के APMC मार्केट में कंधार ट्रेडर्स के व्यापारी दिनेश रामेशलाल डांग ने कहा, "जो सूखे मेवे पहले अफगानिस्तान से 20 से 25 दिन में आ जाते थे, उन्हें अब करीब तीन महीने लग रहे हैं। ईरान का संघर्ष, ऊंचा माल भाड़ा और बढ़ा हुआ आयात खर्च, इन सबने सप्लाई चेन पर असर डाला है। दाम बढ़ने से ग्राहक दिवाली में आम तौर पर जितना सूखा मेवा खरीदते हैं, उतना लेने से हिचक रहे हैं। इस त्योहारी सीजन में बिक्री सामान्य कारोबार की सिर्फ 10-15 प्रतिशत रह गई है।"
पसंद का यह बदलाव तोहफे देने में भी दिख रहा है। जो खरीदार पहले प्रीमियम सूखे मेवों के डिब्बे चुनते थे, वे अब ब्लूबेरी, स्ट्रॉबेरी, ब्लैकबेरी, घर के बने चॉकलेट और पारंपरिक दिवाली फराल की ओर जा रहे हैं।
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