शिवाजी पार्क में पटाखों पर रोक, बीएमसी लगाएगी साइलेंस ज़ोन के बैनर
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दिवाली से पहले बीएमसी के जी नॉर्थ वार्ड ने शिवाजी पार्क में बैनर लगाने की तैयारी की है। यह इलाका साइलेंस ज़ोन है और यहां पटाखे फोड़ना मना है।
दिवाली से पहले बीएमसी का जी नॉर्थ वार्ड शिवाजी पार्क में बैनर लगाने जा रहा है। इन बैनरों के जरिए यहां आने वालों को बताया जाएगा कि यह इलाका साइलेंस ज़ोन है और यहां पटाखे फोड़ना मना है। वार्ड के एक अधिकारी के मुताबिक यह कदम बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देश के बाद उठाया गया है। अधिकारी ने यह भी पुष्टि की कि शिवाजी पार्क साइलेंस ज़ोन घोषित है।
छत्रपति शिवाजी महाराज पार्क ALM के सचिव वैभव रेगे ने कहा, "यह बड़ी बात है। ऐसा पहली बार हो रहा है। पहले पुलिस स्टेशन के पास बस एक पुराना बोर्ड लगा था, और उसमें भी पटाखों का कोई जिक्र नहीं था।"
महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPCB) के एक प्रवक्ता ने बताया कि बॉम्बे हाईकोर्ट ने सड़कों, फुटपाथों और खुली जगहों समेत सार्वजनिक स्थानों पर आम पटाखे फोड़ने पर पाबंदी लगाई है। प्रवक्ता ने कहा, "साइलेंस ज़ोन में किसी भी तरह के पटाखे या शोर की इजाजत नहीं है। इस निर्देश को पुलिस को लागू करवाना होगा।" उन्होंने साइलेंस ज़ोन पर लागू अतिरिक्त पाबंदियों पर खास जोर दिया।
शिवाजी पार्क के निवासी हर दिवाली पर बड़े पैमाने पर फूटने वाले पटाखों से होने वाले वायु और ध्वनि प्रदूषण की शिकायत करते आए हैं। एहतियात के तौर पर उन्होंने मंगलवार को शिवाजी पार्क पुलिस स्टेशन में एक याचिका दी। इसमें मांग की गई कि बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेशों में पटाखे फोड़ने को लेकर तय दिशानिर्देशों का उल्लंघन करने वालों पर शिवाजी पार्क में सख्त कार्रवाई हो।
निवासियों का आरोप है कि स्टाफ की कमी और राजनीतिक दबाव की वजह से पुलिस की कार्रवाई अब तक नाकाफी रही है। त्योहार के लिए पुलिस की क्या योजना है, यह पूछने पर शिवाजी पार्क पुलिस स्टेशन के एक अधिकारी ने कहा, "हम इस पर काम कर रहे हैं।"
निवासियों की याचिका के एक दिन बाद महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) ने ऐलान किया कि वह इस साल शिवाजी पार्क में दीपोत्सव नहीं करेगी। पार्टी ने पूरे महाराष्ट्र में सूखे जैसे हालात को वजह बताया। पार्टी प्रमुख राज ठाकरे ने कहा कि इस सालाना कार्यक्रम में रोशनी और आतिशबाजी देखने मुंबई, ठाणे और राज्य के दूसरे हिस्सों से लोग आते हैं। फैसले की वजह बताते हुए उन्होंने कहा, "लेकिन हमने तय किया है कि इस साल दीपोत्सव नहीं मनाएंगे। इसकी इकलौती वजह वह भयानक सूखा है जो महाराष्ट्र पर पड़ा है, बना हुआ है और मंडरा रहा है। इस गंभीर सूखे को देखते हुए मेरा मन इस तरह का उत्सव मनाने को राजी ही नहीं हुआ।"
बरसों से दिवाली के आसपास बढ़ते वायु और ध्वनि प्रदूषण की शिकायत करने वाले निवासियों को उम्मीद है कि कार्यक्रम रद्द होने और हाईकोर्ट के निर्देश से इस साल कुछ राहत मिलेगी। हालांकि उन्हें डर है कि लोग फिर भी यहां जमा होकर अपने स्तर पर पटाखे फोड़ सकते हैं।
रेणुका पिंटो ने बताया, "मुझे और मेरे बच्चों को सांस की तकलीफ है। साल भर निर्माण का प्रदूषण परेशान करता है, और दिवाली में हवा इतनी खराब हो जाती है कि हमें हर साल शहर छोड़कर जाना पड़ता है। इस साल कार्यक्रम रद्द होने की घोषणा से थोड़ी राहत मिली है।"
49 साल के वैभव रेगे ने कहा, "पिछले कुछ सालों से MNS दिवाली पर पटाखों और रोशनी का खास कार्यक्रम करती रही है। धनतेरस से शुरू होकर सात दिन तक पटाखे चलते हैं, जिससे AQI बेहद खराब हो जाता है। कार्यक्रम रद्द होना अस्थायी राहत है। उम्मीद है कि अगले साल भी वे इसे बंद ही रखेंगे।"
48 साल के निशांत गाला ने कहा, "बाहर से लोग यहां आकर पटाखे फोड़ते हैं। कार्यक्रम के साथ इसका पैमाना बढ़ गया है। मुझे राहत है कि MNS ने इस साल कार्यक्रम रद्द कर दिया, पर यह हमेशा के लिए नहीं भी हो सकता।"
शिवाजी पार्क के 75 साल के निवासी मधुकर प्रभु ने कहा, "हम बुजुर्गों को तो खिड़की खोलना भी मुश्किल हो जाता है। घर के अंदर भी तेज आवाज से बच्चे और पालतू जानवर परेशान होते हैं। कई निवासियों ने लोगों को अस्पताल में भर्ती होते भी देखा है।"
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