बोरीवली ईस्ट में बेस्ट की जमीन पर बीएमसी का बुलडोजर, 26 दुकानें हटाई गईं
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
बीएमसी ने बुधवार 4 नवंबर को बोरीवली ईस्ट में स्वामी विवेकानंद मार्ग पर 3,400 वर्ग मीटर के प्लॉट से 27 में से 26 कमर्शियल प्रतिष्ठान हटाए।
बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने बुधवार, 4 नवंबर को बोरीवली ईस्ट में अतिक्रमण हटाने की मुहिम चलाई। यह कार्रवाई स्वामी विवेकानंद मार्ग पर बेस्ट बस स्टैंड के पास 3,400 वर्ग मीटर के एक प्लॉट पर हुई।
बीएमसी के आधिकारिक बयान के मुताबिक, इस प्लॉट पर 27 कमर्शियल प्रतिष्ठान चल रहे थे और कार्रवाई के दौरान इनमें से 26 को हटा दिया गया। बयान में कहा गया है कि मुहिम के दौरान नागरिक निकाय ने 27 में से 26 प्रतिष्ठान खाली करवाए।
जमीन टाउन प्लानिंग स्कीम-II के तहत आती है। उसका पता बिल्डिंग नंबर 7B, सिटी सर्वे नंबर 15 है। इस जमीन पर अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई बीएमसी के आर सेंट्रल वार्ड ने की।
बीएमसी के अनुसार, तोड़फोड़ और मलबा हटाने के काम में करीब 70 मजदूर और कर्मचारी लगाए गए थे। उनके साथ दो जेसीबी मशीनें और चार डंपर भी मौके पर तैनात थे। बाकी बचे एक कमर्शियल प्रतिष्ठान पर क्या कार्रवाई होगी, इसकी ज्यादा जानकारी का इंतजार है।
इसी बीच मुंबई उपनगर जिला प्रशासन ने भी अतिक्रमण के खिलाफ बड़ी मुहिम चलाई है। अधिकारियों ने बताया कि कुर्ला, मानखुर्द, देवनार, मंडाले और चेंबूर में आठ बड़ी कार्रवाइयों के जरिए करीब 39.5 एकड़ सरकारी और संस्थागत जमीन वापस ली गई है। इस जमीन की कीमत लगभग 1,236 करोड़ रुपये आंकी गई है।
इन कार्रवाइयों की अगुवाई अतिरिक्त कलेक्टर (अतिक्रमण निष्कासन) पद्माकर रोकड़े ने की। निशाने पर अनधिकृत कमर्शियल ढांचे, कबाड़ के यार्ड, गोदाम, दुकानें और रिहायशी अतिक्रमण थे। ताजा कार्रवाई 29 अक्टूबर को हुई, जब देवनार में लोकशाहीर अण्णाभाऊ साठे विकास महामंडल (LIDCOM) की जमीन से करीब 8,000 वर्ग मीटर के कमर्शियल अतिक्रमण साफ किए गए।
यह जमीन कुर्ला तालुका के गांव देवनार में है और सिटी सर्वे नंबर 1/A/3 तथा सर्वे नंबर 93 के तहत दर्ज है। प्रशासन ने लगभग दो एकड़ यानी 8,000 वर्ग मीटर जमीन से कमर्शियल अतिक्रमण हटाया। इस जमीन की कीमत करीब 60 करोड़ रुपये बताई गई है। प्रशासन के मुताबिक, जमीन अब LIDCOM को सौंप दी गई है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि साल 2000 की Google Earth सैटेलाइट तस्वीरों में यह प्लॉट खाली दिखता है। यानी बाद में धीरे-धीरे इस पर कब्जा होता चला गया।
यह कार्रवाई मुंबई उपनगर के जिला कलेक्टर के मार्गदर्शन में हुई और इसकी अगुवाई रोकड़े ने की। इसमें डिप्टी कलेक्टर (चेंबूर), उप-विभागीय अधिकारी (पूर्वी उपनगर), कुर्ला तहसीलदार और राजस्व विभाग के कर्मचारी शामिल थे। बीएमसी ने मशीनरी और लॉजिस्टिक मदद दी, जबकि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस तैनात रही।
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