मुंबई डायरी: बांद्रा में ईसाइयों पर किताब का विमोचन, क्लाउन नाटक और क्वीयर थिएटर फेस्टिवल की तैयारी
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
बांद्रा में कार्डिनल ऑस्वाल्ड ग्रेशियस ने ईसाइयों पर किताब जारी की, 21 और 22 नवंबर को क्लाउन नाटक होगा और 27 नवंबर से क्वीयर थिएटर फेस्टिवल शुरू होगा।
बांद्रा के बैंडस्टैंड में एक पेड़ की डाल पर गौरैयों का पूरा झुंड बैठा दिखा। मुंबई की आज की डायरी में शहर की कुछ और खबरें भी हैं: एक भारी-भरकम किताब, एक क्लाउन नाटक, एक नया थिएटर फेस्टिवल और कचरे के खिलाफ मुहिम।
पहले किताब की बात। क्या आपको पता था कि दिवंगत पत्रकार और संपादक प्रीतीश नंदी का जन्म बिहार में एक बंगाली ईसाई परिवार में हुआ था? या यह कि टेलीविजन पत्रकारिता के गुरु प्रणय रॉय की मां आयरिश/अंग्रेज थीं? और भारत के क्रिकेट कप्तान रहे विजय हजारे (दिवंगत) और पुणे में रहने वाले चंदू बोर्डे भी ईसाई हैं।
ये सारी बातें हमें "Christians in India: The Nation's Vital Asset" (St Pauls Publications) नाम की किताब से पता चलीं। इसका संपादन डॉ. लुईस डिसिल्वा ने किया है। पिछले शनिवार बांद्रा के St Pauls Media Complex में कार्डिनल ऑस्वाल्ड ग्रेशियस ने इसका विमोचन किया। समारोह में लेखक, कार्डिनल और St Pauls Publications के चीफ एडिटर फादर (डॉ.) साजिथ सिरियाक साथ मौजूद थे।
किताब करीब दो किलो की है, यानी वजन में भी भारी और अहमियत में भी। बांद्रा के रहने वाले डॉ. डिसिल्वा ने 16 साल लगाकर कामयाब ईसाइयों की प्रोफाइल तैयार की। इस डायरी के लेखक को किताब पढ़कर ऐसे मशहूर नाम फिर याद आए, जिनके बारे में आजकल ज्यादा सुनने को नहीं मिलता। मसलन गायक मर्विन रूफस, जिन्हें भारत का एल्विस प्रेस्ली कहा जाता था।
हमने रविवार को अर्ली बर्ड ऑफर में किताब ली, लेकिन छपी कीमत 700 रुपये है। आप भी ऐसी और बातें जानना चाहें तो बांद्रा के Title Waves बुकस्टोर से कॉपी ले सकते हैं।
अब थिएटर। अगर किसी क्लाउन के पास बोलने को शब्द न हों, पर थैला भर करतब हों, तो क्या होगा? थिएटर कलाकार और अभिनेता रूपेश तिल्लू "Bags of Gags" में यही देखते हैं। यह 60 मिनट की कॉमेडी प्रस्तुति है। 21 और 22 नवंबर को Clowns Without Borders के साथ पेश होने वाले इस नाटक में अभिनेता से क्लाउन बने अंकिता निकराड (क्लाउन मिंडी) और अक्षय नाइक (क्लाउन गुंडी) नजर आएंगे।
तिल्लू ने कहा, "कहानी दो आवारा घुमक्कड़ों की है, जिनमें दोस्ती है और जो साथ सफर करते हैं। उनका थैला हैरानियों से भरा है और जब भी वे उसे खोलते हैं, उन्हें कुछ अनजाना मिलता है, जैसे दर्शकों को भी मिलता है।" ज्यादा जानकारी के लिए @rupesh_tillu देखें।
निर्देशक विक्रम फुकन ने 2024 में इस डायरी के लेखक को मुंबई के कम जाने-पहचाने क्वीयर इतिहास का खूब गहराई से दौरा कराया था। हमें पता चला कि क्वीयर कहानियों को सामने लाने का उनका जुनून जरा भी कम नहीं हुआ है।
फुकन के क्यूरेट किए और Gaysi की पेश की गई नई थिएटर फेस्टिवल "Bambai Zara Hatke" 27 नवंबर से शुरू होने जा रही है। फेस्टिवल में "Where is SSS?" और "Light in My Eyes" नाटक दिखाए जाएंगे। फुकन ने बताया, "क्वीयर मंचीय काम हमेशा से होता रहा है, पर उसे पेश करने के लिए हमारे पास कोई समर्पित मंच नहीं था। पुणे के हाल के सतरंग महोत्सव से हमें हिम्मत मिली कि हम शहर में तीन दिन का फेस्टिवल लाएं। हम पुराने और नए शोज की लाइन-अप तैयार कर रहे हैं।" उन्होंने हमें इसकी हल्की झलक भी दी।
आखिर में शहर की सफाई। Brihanmumbai Municipal Corporation (BMC) सार्वजनिक जगहों पर गैरकानूनी तरीके से कचरा फेंकने वालों को पकड़ने और रोकने के लिए AI से चलने वाले निगरानी सिस्टम का परीक्षण कर रही है। इसी कोशिश के साथ-साथ गैर-लाभकारी संस्था Blue Ribbon Movement 2027 में भी अपनी Community Connect Fellowship जारी रखने वाली है।
इस पहल में पहले 18 साल और उससे ज्यादा उम्र के युवा नागरिक समस्याओं पर काम कर चुके हैं। Community Connect की प्रोग्राम मैनेजर पंखुड़ी जैन ने कहा, "तीन महीनों में फेलोशिप 3600 से ज्यादा मुंबईकरों तक पहुंची, 1400 से ज्यादा नागरिक समस्याएं पहचानी गईं और इन्फ्रास्ट्रक्चर में सुधार किए गए, जिनसे 3 लाख से ज्यादा नागरिकों को फायदा हुआ।"
कमेंट
अभी कोई कमेंट नहीं। पहले आप लिखिए।