विश्व पर्यावरण स्वास्थ्य दिवस 26 सितंबर को ही क्यों, जानें इसकी वजह और अहमियत
हर साल 26 सितंबर को मनाया जाता है विश्व पर्यावरण स्वास्थ्य दिवस, जानिए इसका महत्व और मानव सेहत पर पर्यावरण का असर
इंसान और कुदरत का रिश्ता बहुत गहरा और एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है। सांस लेने के लिए हवा, पीने के लिए पानी और खाने के लिए उपजाऊ जमीन, ये सब हमें प्रकृति से ही मिलता है। मगर आज के औद्योगिक दौर में इंसान ने अपने फायदे के लिए कुदरत का संतुलन बड़े पैमाने पर बिगाड़ दिया है। इसी वजह को ध्यान में रखते हुए हर साल 26 सितंबर को दुनियाभर में विश्व पर्यावरण स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है, ताकि इंसानी सेहत और पर्यावरण के आपसी रिश्ते को समझाया जा सके और साफ-सुथरे पर्यावरण की जरूरत पर जोर दिया जा सके।
इस दिन की शुरुआत इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ एन्वायरनमेंटल हेल्थ यानी आईएफईएच ने की थी। इसका मकसद यही है कि पर्यावरण के बिगड़ने से इंसानी सेहत पर जो बुरा असर पड़ता है, उस पर दुनिया का ध्यान खींचा जाए। अगर कुदरत ही ठीक नहीं रहेगी तो इंसानी समाज कभी भी सेहतमंद नहीं रह सकता, यही सबक यह दिन सिखाता है।
आजकल दुनियाभर में बढ़ते वायु प्रदूषण, गंदे पानी की सप्लाई, प्लास्टिक कचरे की दिक्कत, तेजी से हो रही जंगलों की कटाई और बदलते मौसम जैसी गंभीर समस्याएं सामने आ रही हैं। ये सिर्फ प्रकृति की खूबसूरती को ही नुकसान नहीं पहुंचा रहीं, बल्कि इंसानी शरीर और सेहत पर भी सीधा और खतरनाक असर डाल रही हैं। दूषित हवा से सांस की बीमारियां, फेफड़ों की तकलीफ और कैंसर जैसे रोग बढ़ रहे हैं। वहीं गंदे पानी से पेट की बीमारियां और महामारियां फैल रही हैं। प्लास्टिक कचरे से माइक्रोप्लास्टिक हमारी खाने की चेन में घुस रहा है, जो इंसानी शरीर के लिए बेहद खतरनाक है। अगर आज ही इन पर्यावरणीय खतरों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आगे चलकर इंसानों को बड़े स्वास्थ्य संकटों का सामना करना पड़ सकता है।
पर्यावरण की सेहत सुधारने और इंसानी जिंदगी को सुरक्षित रखने के लिए साफ ऊर्जा और सही कचरा प्रबंधन बहुत जरूरी है। सोलर एनर्जी, पवन ऊर्जा जैसे रीन्यूएबल एनर्जी सोर्सेज का इस्तेमाल बढ़ाकर कार्बन उत्सर्जन को कम किया जा सकता है। इसके अलावा रोजमर्रा की जिंदगी में गीला और सूखा कचरा अलग करना, सिंगल-यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल पूरी तरह बंद करना और रीसाइक्लिंग की आदत डालना अब वक्त की जरूरत बन गई है। सबको साफ और सुरक्षित पीने का पानी मुहैया कराना भी पर्यावरणीय सेहत का एक अहम हिस्सा है।
26 सितंबर के मौके पर दुनियाभर में स्कूल-कॉलेज, सामाजिक संगठन और सरकारी संस्थाएं मिलकर कई जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करती हैं। स्कूल-कॉलेजों में वर्कशॉप, चर्चा सत्र, निबंध और भाषण प्रतियोगिताएं, साथ ही पौधे लगाने के कार्यक्रम भी होते हैं। यह दिन याद दिलाता है कि पर्यावरण की रक्षा सिर्फ सरकार या संस्थाओं की ही जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का फर्ज है। रोजमर्रा की आदतों में छोटे-छोटे बदलाव करके भी हम पर्यावरण बचाने में बड़ा योगदान दे सकते हैं। पेड़ लगाना, पानी की बर्बादी रोकना और पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करना जैसी आदतें हमें सेहतमंद भविष्य की तरफ ले जा सकती हैं।
विश्व पर्यावरण स्वास्थ्य दिवस सिर्फ भाषण देने या कार्यक्रम करने का दिन नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित, साफ और हरा-भरा जहां छोड़कर जाने का संकल्प लेने का दिन है। कुदरत का सम्मान करना और उसकी हिफाजत करना ही हमारी अपनी सेहत और जिंदगी की असली गारंटी है। अगर हम सब मिलकर हरित जीवनशैली अपनाएं, तभी हम बीमारियों से मुक्त समाज और सेहतमंद पर्यावरण बना पाएंगे।