विसर्जन के बाद घर लौटकर फिर आरती करने की परंपरा, जानें इसकी वजह
गणपति बाप्पा के विसर्जन के बाद घर लौटने पर कई परिवारों में दोबारा आरती करने का रिवाज है, जिसके पीछे कृतज्ञता और श्रद्धा की भावना बताई जाती है।
गणपति बाप्पा को विसर्जन के लिए ले जाने के बाद जब भक्त घर लौटते हैं, तो कई घरों में एक बार फिर आरती करने की पुरानी परंपरा चली आ रही है। बाप्पा को विदा करने के बाद घर आकर दोबारा आरती क्यों की जाती है, इसके पीछे धार्मिक आस्था के साथ-साथ घर के अंदर सकारात्मक माहौल बनाए रखने और कृतज्ञता जताने की भावना जुड़ी हुई मानी जाती है।
विसर्जन का मतलब है बाप्पा को भावुक होकर विदाई देना। विसर्जन स्थल पर पूजा-आरती करने के बाद भक्त जब घर वापस पहुंचते हैं, तो कहीं-कहीं घर के देवघर में या बाप्पा की मिट्टी की मूर्ति के सामने फिर से आरती की जाती है। यह तरीका हर घर में एक जैसा नहीं होता, बल्कि परिवार और इलाके के हिसाब से इसमें फर्क देखने को मिलता है।
गणेशोत्सव के दौरान बाप्पा की रोज पूजा, आरती और भोग चढ़ाया जाता है। विसर्जन के बाद घर लौटकर आरती करने के पीछे यह भाव माना जाता है कि बाप्पा ने घर में जो कुछ दिन वास किया और उत्सव बिना किसी विघ्न के पूरा हुआ, उसके लिए शुक्रिया अदा किया जाए।
कुछ परिवारों में विसर्जन के लिए मूर्ति घर से बाहर ले जाने के बाद, वापस आकर घर के देवघर में मौजूद बाकी देवी-देवताओं के सामने आरती करने की रीत है। इसे घर की रोज की पूजा-पाठ फिर से शुरू करने का संकेत भी माना जाता है।
धार्मिक मान्यता के मुताबिक आरती के वक्त मंत्र, स्तोत्र और घंटी बजाई जाती है, जिससे मन को शांति मिलती है और घर का माहौल भक्तिमय हो जाता है, ऐसी श्रद्धा है।
भक्तों की यह भी भावना होती है कि विसर्जन के बाद बाप्पा अपने असली स्थान पर लौट गए हैं। इसलिए घर आकर आरती करते वक्त फिर से बाप्पा के आने और अगले साल जल्दी आने की प्रार्थना की जाती है।
यह जरूरी नहीं कि विसर्जन के बाद घर आकर आरती करने की रीत हर परिवार में हो। कुछ जगहों पर विसर्जन स्थल पर ही आखिरी आरती कर दी जाती है, तो कुछ परिवारों में घर लौटकर देवघर में आरती करने की परंपरा है। यानी यह तरीका स्थानीय और पारिवारिक रिवाज के हिसाब से बदल सकता है।
विसर्जन के बाद की यह आरती सिर्फ एक धार्मिक रस्म नहीं, बल्कि भक्ति, कृतज्ञता और बाप्पा से जुड़ी भावना का प्रतीक मानी जाती है। गणेशोत्सव खत्म होने के बाद भी घर में भक्ति और सकारात्मकता का भाव बनाए रखने का यह एक तरीका माना जाता है।