विरूर रेंज में ट्रैक्टर से सागवान की लकड़ी जब्त, खेत में छिपाने के आरोप में तीन पर वन अपराध दर्ज
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
मध्य चांदा वन विभाग की विरूर रेंज में गश्त के दौरान ट्रैक्टर की ट्रॉली से बिना परमिट की सागवान लकड़ी मिली। तीन संदिग्धों पर भारतीय वन अधिनियम 1927 के तहत मामला दर्ज हुआ है।
चंद्रपुर जिले में मध्य चांदा वन विभाग के तहत आने वाली विरूर वन परिक्षेत्र में अवैध सागवान की लकड़ी पकड़ी गई है। वन विभाग की जानकारी के मुताबिक यह कार्रवाई 3 नवंबर को हुई। ट्रैक्टर और लकड़ी जब्त कर ली गई है और तीन लोगों के खिलाफ भारतीय वन अधिनियम 1927 के तहत मामला दर्ज किया गया है।
मिली जानकारी के अनुसार 3 नवंबर 2026 को विरूर परिक्षेत्र के देवाडा उप-क्षेत्र में वन अधिकारी रोज की तरह गश्त पर थे। इसी दौरान उन्हें एक संदिग्ध ट्रैक्टर दिखा। अधिकारियों ने उसे फौरन रुकवाया और अच्छी तरह जांच की। ट्रैक्टर की ट्रॉली में सागवान की लकड़ी लदी मिली।
ट्रैक्टर चलाने वाले और वहां मौजूद लोगों से इस लकड़ी के सरकारी कागजात और परमिट के बारे में पूछा गया। आरोपी बळीराम शंकर मल्लेलवार और कुंदन एकनाथ मडावी कोई कागज या परमिट पेश नहीं कर सके और उन्होंने असमर्थता जता दी। इससे साफ हो गया कि लकड़ी की ढुलाई बिना इजाजत हो रही थी। इसके बाद वन अधिकारियों ने ट्रैक्टर, ट्रॉली और ढोई जा रही सागवान की लकड़ी, यानी पूरा माल जब्त कर लिया।
हिरासत में लिए गए आरोपियों से सख्ती से पूछताछ हुई। वन विभाग के मुताबिक उन्होंने बताया कि यह सागवान आरोपी क्रमांक 3 उद्धव नामदेव उबाडे के खेत में छिपाकर रखा गया था और उन्होंने इसे उसी से खरीदा था। उबाडे जिला चंद्रपुर, तहसील जिवती के पुनागुडा गांव के रहने वाले हैं। यह कबूलनामा मामले में अहम माना जा रहा है।
इसके बाद 4 नवंबर को तीनों संदिग्धों के खिलाफ वन अपराध क्रमांक 08901/222502 के तहत मामला दर्ज किया गया। बळीराम शंकर मल्लेलवार, कुंदन एकनाथ मडावी और उद्धव नामदेव उबाडे पर भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 26(1)(F), 52(1), 41 और 42(1) के उल्लंघन का आरोप है।
यह कार्रवाई मध्य चांदा वन विभाग के उप वन संरक्षक योगेश वाघाये और राजुरा के उप-विभागीय वन अधिकारी मंगेश डी. गिरडकर के मार्गदर्शन में हुई। विरूर परिक्षेत्र के वन परिक्षेत्र अधिकारी महेश बी. दिघे और बाकी वन कर्मचारियों की टीम ने इसे अंजाम दिया। वन विभाग का कहना है कि इलाके में अवैध पेड़ कटाई और तस्करी के खिलाफ यह सख्त कदम है, जिससे लकड़ी तस्करों में हड़कंप है। मामले की आगे की जांच वन विभाग कर रहा है।
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