फीस नहीं भरी तो नाबालिग छात्रा को परीक्षा से रोका
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
लाइब्रेरी में बिठाकर रखा, प्रिंसिपल और टीचर पर मामला दर्ज
नागपुर.
स्कूल की फीस जमा नहीं होने की सजा एक नाबालिग छात्रा को इस कदर दी गई कि उसे परीक्षा देने से ही रोक दिया गया. हिंदी का पेपर देने पहुंची नाबालिग छात्रा को परीक्षा कक्ष में बैठाने के बजाय लाइब्रेरी में बिठा दिया गया. इस अपमानजनक घटना का छात्रा की मानसिक स्थिति पर गहरा असर पड़ा. कोराडी पुलिस ने स्कूल के मुख्याध्यापक और क्लास टीचर के खिलाफ मामला दर्ज किया है. यह मामला कोराडी के बोखारा स्थित नारायण विद्यालय का है. शिकायतकर्ता की नौ वर्षीय बेटी इसी स्कूल में पढ़ती है. आरोप है कि 28 सितंबर को स्कूल में हिंदी विषय की परीक्षा थी. आर्थिक अथवा अन्य कारणों से छात्रा के पिता समय पर स्कूल की फीस जमा नहीं कर पाए थे. इसी बात को लेकर स्कूल के मुख्याध्यापक और क्लास टीचर ने छात्रा को परीक्षा में बैठने से रोक दिया. जब अन्य विद्यार्थी परीक्षा दे रहे थे, तब छात्रा को परीक्षा कक्ष से अलग लाइब्रेरी में बिठाकर रखा गया. अपने सहपाठियों को परीक्षा देते देखकर छात्रा ने खुद को अपमानित महसूस किया. इस घटना से वह मानसिक रूप से आहत हो गई. बेटी की हालत देखकर पिता ने कोराडी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई.साथ ही शिक्षा विभाग से भी मामले की शिकायत की. शिक्षा विभाग की रिपोर्ट के आधार पर कोराडी पुलिस ने मुख्याध्यापक और क्लास टीचर के खिलाफ बच्चों को मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम तथा किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है.
फीस के लिए बच्चों को सजा देने पर पालकों में रोष
इस घटना से पालकों में स्कूल प्रशासन के प्रति जबरदस्त नाराजगी है. पालकों का कहना है कि कई शिक्षण संस्थान फीस भरने में देरी होने पर बच्चों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करते हैं. फीस का विवाद पालकों और स्कूल प्रबंधन के बीच होना चाहिए, लेकिन इसकी सजा मासूम बच्चों को देना कहां तक उचित है? इस तरह की कार्रवाई से बच्चों के आत्मसम्मान और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है.
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