वसई-विरार में 10 फीसदी पानी कटौती का खतरा, महापौर ने 8 दिन में रिपोर्ट मांगी
राज्य सरकार ने 10 फीसदी पानी कटौती के निर्देश दिए हैं, पर वसई-विरार में अभी आधिकारिक कटौती लागू नहीं हुई है।
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बढ़ती आबादी, कम पड़ती पानी की सप्लाई और अल-नीनो के संभावित असर की वजह से वसई-विरार शहर पर पानी की किल्लत का साया गहराने की आशंका है। राज्य सरकार ने संभावित पानी की कमी को देखते हुए 10 फीसदी पानी कटौती के निर्देश दिए हैं। फिर भी शहर में अभी तक आधिकारिक तौर पर कोई कटौती लागू नहीं हुई है।
दिक्कत यह है कि अभी जितना पानी मिलता है, उसमें ही बड़ी कमी है। इसलिए कटौती का फैसला लेना है या नहीं, इस पर नगर निगम में चर्चा शुरू हो गई है। महापौर अजीव पाटील ने महासभा में निर्देश दिया है कि आने वाले आठ दिनों में पूरी रिपोर्ट पेश की जाए।
आंकड़े देखें तो वसई-विरार शहर की रोज की पानी की जरूरत 469.63 मिलियन लीटर है। इसके मुकाबले अलग-अलग जल स्रोतों से शहर को करीब 400 मिलियन लीटर पानी मिलता है। असल में 380 से 395 मिलियन लीटर पानी ही बांटा जाता है। यानी मांग और उपलब्धता के बीच हर दिन 69.63 मिलियन लीटर का फर्क बना हुआ है।
ऐसे हाल में अगर 10 फीसदी कटौती और लागू हो गई, तो लोगों को मिलने वाला पानी और घट जाएगा और किल्लत ज्यादा तीखी हो सकती है। यही डर जताया जा रहा है। राज्य सरकार ने अल-नीनो के संभावित असर से बारिश कम होने और जल भंडारों पर असर पड़ने की आशंका देखते हुए 16 अक्टूबर से 10 फीसदी पानी कटौती का फैसला लिया है।
महापौर अजीव पाटील ने कहा, "पानी की किल्लत का सवाल गंभीर है। आगे जो हालात बनेंगे, उन्हें देखते हुए अभी से पानी का ठीक से इंतजाम करना जरूरी है। पानी कटौती करनी हुई तो उसकी मात्रा और उसके नतीजों का गहराई से अध्ययन करके ही फैसला लिया जाएगा। इसके लिए आठ दिन में रिपोर्ट पेश करने को कहा गया है।"
बुधवार को हुई महासभा में प्रशासन ने पानी के इंतजाम का प्रस्ताव रखा। महापौर ने निर्देश दिया कि कटौती की मात्रा, उसके संभावित नतीजों और दूसरे जल स्रोतों के इस्तेमाल का अध्ययन करने के लिए सदन के नेता, विपक्ष के नेता, स्थायी समिति के सभापति और गुट नेता मिलकर चर्चा करें और रिपोर्ट दें।
शहर के पुराने कुओं को फिर से जिंदा करने, तालाबों और बावड़ियों की सफाई करने और सीवेज ट्रीटमेंट प्रोजेक्ट चालू करके साफ किया हुआ पानी निर्माण कार्य में इस्तेमाल करने जैसे उपायों पर भी जोर दिया जाएगा। महापौर ने कहा कि अगस्त 2027 तक पानी की तंगी पैदा होने की आशंका है, इसलिए इंतजाम अभी से शुरू होना चाहिए।
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