मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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19:47 IST

वर्ल्ड रेबीज डे: कुत्ता या कोई जानवर काट ले तो घबराएं नहीं, फौरन करें ये 5 काम

हर साल 28 सितंबर को वर्ल्ड रेबीज डे मनाया जाता है। जानिए कुत्ता या कोई जानवर काट ले तो तुरंत क्या करना चाहिए।

वर्ल्ड रेबीज डे: कुत्ता या कोई जानवर काट ले तो घबराएं नहीं, फौरन करें ये 5 काम
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

हर साल 28 सितंबर को दुनियाभर में वर्ल्ड रेबीज डे मनाया जाता है। इस दिन की शुरुआत मशहूर फ्रेंच माइक्रोबायोलॉजिस्ट और वैक्सीन रिसर्चर लुई पाश्चर की पुण्यतिथि पर की गई थी, जिन्होंने रेबीज के खिलाफ पहली असरदार वैक्सीन खोजकर इंसानों को बहुत बड़ी सौगात दी थी। रेबीज एक बेहद खतरनाक वायरल बीमारी है जो सेंट्रल नर्वस सिस्टम पर हमला करती है। एक बार इस बीमारी के लक्षण शरीर में दिखने लगें तो मौत लगभग तय मानी जाती है। लेकिन सही वक्त पर बरती गई सावधानी, पालतू जानवरों का वैक्सीनेशन और समय पर दिया गया फर्स्ट एड रेबीज को सौ फीसदी रोक सकता है। इसी जरूरी बात को घर-घर तक पहुंचाना इस दिन का मकसद है।

रेबीज मुख्य रूप से रेबीज से पीड़ित जानवर की लार से फैलता है। जब कोई रेबीज से इन्फेक्टेड कुत्ता, बिल्ली, बंदर, भेड़िया या चमगादड़ किसी इंसान को काटता है, खरोंचता है या उसके खुले जख्म को चाट लेता है, तब यह वायरस शरीर में घुस जाता है। भारत और एशियाई देशों में इंसानों में होने वाले रेबीज के 99 फीसदी मामलों की वजह कुत्ते का काटना ही होती है। यह वायरस नसों के जरिए धीरे-धीरे दिमाग तक पहुंचता है। दिमाग तक पहुंचने के बाद मरीज को पानी से डर लगने लगता है, हवा से डर लगने लगता है, बहुत चिड़चिड़ापन हो जाता है और आखिर में दिमाग में सूजन आने से मरीज की मौत हो जाती है।

अक्सर लोग जानवर के काटने या हल्की खरोंच लगने पर उसे नजरअंदाज कर देते हैं या फिर जख्म पर मिर्ची, हल्दी, चूना या मिट्टी लगाने जैसे गलत घरेलू नुस्खे आजमाते हैं। इससे इंफेक्शन का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। जब भी कोई आवारा या पालतू जानवर काटे, तो नीचे दिए मेडिकल स्टेप्स का ठीक-ठीक पालन करना जरूरी है।

पहला, जख्म को तुरंत साफ करें। जानवर के काटते ही सबसे पहले उस जख्म को घर में मौजूद किसी भी साबुन से और नल के बहते पानी के नीचे कम से कम 15 मिनट तक लगातार धोना चाहिए। साबुन में मौजूद अल्कलाइन तत्व रेबीज वायरस की बाहरी परत को खत्म करने में मदद करते हैं।

दूसरा, एंटीसेप्टिक का इस्तेमाल करें। जख्म धोने के बाद उसे सुखाकर उस पर डेटॉल, सैवलॉन या पोवीडोन-आयोडीन जैसा एंटीसेप्टिक लगाना चाहिए।

तीसरा, जख्म खुला रखें। जानवर के काटे हुए जख्म को कभी भी कसकर बांधकर नहीं रखना चाहिए और न ही उस पर टांके लगवाने चाहिए, जब तक बहुत ज्यादा जरूरी न हो, क्योंकि इससे वायरस नसों के और करीब पहुंच सकता है।

चौथा, तुरंत डॉक्टर से सलाह लें और वैक्सीन लगवाएं। किसी भी हालत में 24 घंटे के अंदर पास के सरकारी या प्राइवेट अस्पताल जाकर रेबीज रोकने वाली वैक्सीन (एंटी-रेबीज वैक्सीन, ARV) लगवाना शुरू करना चाहिए।

पांचवां, इम्युनोग्लोब्युलिन। अगर जानवर ने गंभीर तरह से काटा हो (कैटेगरी 3 बाइट), तो डॉक्टर की सलाह के मुताबिक वैक्सीन के साथ-साथ रेबीज इम्युनोग्लोब्युलिन (RIG) का इंजेक्शन सीधे जख्म वाली जगह पर देना बहुत जरूरी होता है, जो वायरस को फौरन बेअसर कर देता है।

रेबीज खत्म करने का सबसे आसान और सुरक्षित तरीका है जानवरों के स्तर पर ही इस वायरस की चेन को तोड़ना। अपने पाले हुए कुत्तों और बिल्लियों को तीसरे महीने की उम्र में रेबीज रोकने वाली वैक्सीन देना और हर साल उसकी बूस्टर डोज देना हर पालतू जानवर के मालिक की नैतिक और सामाजिक जिम्मेदारी है। इसके अलावा आवारा कुत्तों का सामूहिक वैक्सीनेशन (मास डॉग वैक्सीनेशन) और उनकी नसबंदी (एनिमल बर्थ कंट्रोल) करना भी जरूरी है। अगर किसी इलाके में 70 फीसदी से ज्यादा कुत्तों का वैक्सीनेशन सफलतापूर्वक हो जाए, तो उस इलाके में इंसानों में रेबीज का खतरा पूरी तरह खत्म हो जाता है।

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO), वर्ल्ड ऑर्गनाइजेशन फॉर एनिमल हेल्थ (WOAH) और फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गनाइजेशन (FAO) ने मिलकर "Zero by 30" नाम का ग्लोबल टारगेट तय किया है। इसका मतलब है 2023 से 2030 के बीच दुनियाभर में कुत्तों की वजह से होने वाली इंसानी रेबीज मौतों को शून्य फीसदी तक लाना। इसके लिए "वन हेल्थ" (One Health) कॉन्सेप्ट पर काम हो रहा है, जिसमें ह्यूमन हेल्थ, एनिमल हेल्थ और एनवायरनमेंट डिपार्टमेंट मिलकर काम कर रहे हैं।

सामूहिक जिम्मेदारी, अंधविश्वास छोड़ने और सही वक्त पर वैक्सीनेशन कराने से रेबीज-मुक्त और सुरक्षित समाज जरूर बनाया जा सकता है। याद रखिए, रेबीज का अभी तक कोई पक्का इलाज नहीं है, लेकिन समय पर लगाई गई वैक्सीन ही इसके खिलाफ इकलौता और सबसे अच्छा सुरक्षा कवच है।

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