मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

अभी सब्सक्राइब करें
प्राइम अलर्ट
सारे लाइव अपडेट
18:58 IST

वर्ल्ड हार्ट डे: सामान्य रेंज नहीं, अपना खुद का LDL-C लक्ष्य जानना दिल के लिए क्यों जरूरी

कार्डियोलॉजिस्ट का कहना है कि हर किसी के लिए एक ही LDL-C लक्ष्य लागू नहीं होता, उम्र, फैमिली हिस्ट्री और डायबिटीज जैसी बीमारियों के हिसाब से यह अलग-अलग तय होता है।

वर्ल्ड हार्ट डे: सामान्य रेंज नहीं, अपना खुद का LDL-C लक्ष्य जानना दिल के लिए क्यों जरूरी
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

भारत में ज्यादातर लोगों को अपना कोलेस्ट्रॉल लेवल तो पता होता है, लेकिन बहुत कम लोगों को यह मालूम होता है कि उनका पर्सनल एलडीएल-सी लक्ष्य क्या होना चाहिए। दिल की सेहत को लेकर एक ही तरीका सबके लिए काम नहीं करता, यह बात कार्डियोलॉजिस्ट साफ कह रहे हैं।

34 साल के विक्रम देसाई को जब उनकी सालाना हेल्थ चेकअप की रिपोर्ट मिली, तो उसमें कोलेस्ट्रॉल लेवल तय दायरे में था। फिट और एक्टिव लाइफस्टाइल होने की वजह से उन्हें लगा कि सब कुछ ठीक है। लेकिन डॉक्टर से बात करने के बाद उन्हें एक जरूरी फर्क समझ आया, लैब रिपोर्ट सिर्फ सामान्य जानकारी देती है, जबकि फैमिली हिस्ट्री या डायबिटीज जैसे पर्सनल रिस्क फैक्टर्स ही किसी व्यक्ति का असली लो-डेंसिटी लिपोप्रोटीन कोलेस्ट्रॉल यानी एलडीएल-सी टारगेट तय करते हैं।

विक्रम का यह केस भारत के शहरी इलाकों की एक बढ़ती हकीकत को सामने रखता है। भारत में होने वाली कुल मौतों में से 7.8 फीसद मौतें हाई कोलेस्ट्रॉल की वजह से होती हैं, और देश में 31 फीसद लोगों में कोलेस्ट्रॉल लेवल बढ़ा हुआ पाया जाता है। पश्चिमी देशों के लोगों के मुकाबले भारतीयों को दिल से जुड़ी बीमारी 10 से 15 साल पहले हो जाती है। बहुत से लोगों को अपना कुल कोलेस्ट्रॉल आंकड़ा तो पता होता है, लेकिन उनका पर्सनल एलडीएल-सी लक्ष्य कितना होना चाहिए, यह बहुत कम लोगों को मालूम है।

हाई एलडीएल-सी को अक्सर साइलेंट किलर कहा जाता है, क्योंकि इसके कोई दिखने वाले लक्षण नहीं होते और यह धीरे-धीरे खून की नसों में चर्बी की परत यानी प्लाक जमा करता रहता है। इस स्थिति को एथेरोस्क्लेरोसिस कहते हैं। इससे शरीर के जरूरी अंगों तक खून पहुंचने में रुकावट आ सकती है, जिससे हार्ट अटैक, स्ट्रोक और पेरिफेरल आर्टरी डिसीज का खतरा बढ़ जाता है। कम उम्र होना, फिजिकली एक्टिव रहना या वजन कंट्रोल में होना, इसका मतलब यह नहीं कि एलडीएल-सी लेवल तय दायरे में ही होगा।

एलडीएल कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल में रखने के लिए कम उम्र में ही टेस्ट कराना जरूरी है। कार्डियोलॉजी सोसाइटी ऑफ इंडिया (सीएसआई) 18 साल की उम्र से ही लिपिड प्रोफाइल टेस्ट कराने की सलाह देती है। समय पर टेस्ट होने से समस्या गंभीर होने से पहले ही पकड़ में आ जाती है। सेहतमंद दिखने वाले लोगों में भी हाई एलडीएल-सी हो सकता है, इसलिए नियमित जांच कराना जरूरी है।

मुंबई के सैफी हॉस्पिटल में कंसल्टेंट इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. निमित शाह ने कहा, "जल्दी पता लगाना सिर्फ आंकड़े चेक करना नहीं है। एलडीएल-सी का लक्ष्य हर किसी के लिए अलग होता है और सबके लिए एक ही तरीका काम नहीं करता। हर व्यक्ति की उम्र, फैमिली हिस्ट्री और डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर जैसी दूसरी बीमारियां, ये सब अलग-अलग रिस्क फैक्टर होते हैं, जिनसे एलडीएल-सी लेवल तय होता है। एलडीएल-सी लेवल को दायरे में बनाए रखना बहुत जरूरी है। डॉक्टर की सलाह मानना, अपनी सेहत की हालत के बारे में जानकारी रखना और कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल के इस सफर में खुद ध्यान रखना जरूरी है।"

अगली हेल्थ चेकअप के वक्त डॉक्टर से तीन जरूरी सवाल पूछकर दिल की सेहत की जिम्मेदारी खुद उठाई जा सकती है, आज मेरा एलडीएल-सी लेवल कितना है, मेरा पर्सनल एलडीएल-सी लक्ष्य क्या होना चाहिए, और मेरे टारगेट के हिसाब से लेवल दायरे में है या नहीं, अगर नहीं तो मेरे लिए क्या ऑप्शन हैं।

बैलेंस्ड डाइट, स्ट्रेस कंट्रोल और नियमित एक्सरसाइज जैसे लाइफस्टाइल बदलाव दिल की सेहत बनाए रखने में मददगार होते हैं। फिर भी एलडीएल-सी लेवल कंट्रोल में रखने के लिए सिर्फ ये लाइफस्टाइल बदलाव काफी नहीं हो सकते। ऐसे में लिपिड कम करने वाली दवाइयां जरूरी हो जाती हैं और लंबे समय तक इस दवा का पालन करना जरूरी होता है।

क्या हम इस विज़िट को गिन लें? PT24 गूगल एनालिटिक्स से देखता है कि कौन सी खबरें किस पर पढ़ी जाती हैं। आपके हां कहने तक यह बंद है, आप सोच रहे हैं तब तक कुछ नहीं गिना जाता, और आप You पर कभी भी अपना मन बदल सकते हैं। हम क्या लेंगे