वर्क फ्रॉम होम से बढ़ रहा है अकेलापन, नई स्टडी में मानसिक सेहत पर असर की चेतावनी
'साइंस' मैगजीन में छपी एक नई स्टडी के मुताबिक घर से काम करने की आदत लोगों को अकेला बना रही है और इससे मानसिक सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है।
घर से काम करते वक्त आसपास कोई नहीं होता और कोई टाइम-टेबल भी बांधकर नहीं रखता। ऑफिस की तरह यहां कोई साथी डेस्क पर आकर बात नहीं करता, न ही चाय-कॉफी बनाते वक्त गपशप होती है। लाखों लोगों के लिए अब पूरा वर्किंग डे एक ही कमरे में गुजर जाता है, जहां वो खाना भी खाते हैं, आराम भी करते हैं और सोते भी वहीं हैं। 'साइंस' मैगजीन में छपी एक नई स्टडी में चेतावनी दी गई है कि इस तरह की लाइफस्टाइल के छिपे हुए साइड इफेक्ट हो सकते हैं, जैसे बढ़ता अकेलापन, लोगों से कटाव और मानसिक सेहत का बिगड़ना। इस स्टडी के बारे में कोच, हीलर, लाइफ अल्केमिस्ट और मनोचिकित्सक डॉ. चांदनी तुगनाइट ने जानकारी दी है।
'होम अलोन: रिमोट वर्क, आइसोलेशन, एंड मेंटल हेल्थ' नाम की इस स्टडी में देखा गया कि कोविड-19 महामारी के बाद घर से काम करने की वजह से लोगों की सोशल लाइफ और मानसिक सेहत पर क्या असर पड़ा है। रिसर्चर नतालिया इमैनुएल, एम्मा हैरिंगटन और अमांडा पैलेस ने 2011 से 2024 तक के 5,88,322 अमेरिकी कर्मचारियों के डेटा को खंगाला। महामारी के डर और घर से काम के असली असर के बीच फर्क साफ करने के लिए उन्होंने 2020 और 2021 का डेटा हटा दिया।
स्टडी के मुताबिक जो लोग घर से काम करते हैं, उन्होंने ज्यादा अकेलापन और मानसिक सेहत में गिरावट की बात कही है। ऐसे कर्मचारियों में मेंटल हेल्थ सर्विस, थेरेपी या दवाइयों के इस्तेमाल में भी बढ़ोतरी देखी गई है। सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ा है जो पहले से अकेलापन महसूस करते थे।
इसका मतलब यह नहीं कि घर से काम करने वाला हर शख्स डिप्रेशन में चला जाएगा। जो लोग शाम को परिवार, दोस्तों या पार्टनर के साथ वक्त बिताते हैं, उन पर असर कम होता है। लेकिन जो अकेले रहते हैं, उनके लिए ऑफिस ही वो जगह होती थी जहां वो आमने-सामने बात कर पाते थे। जब ऑफिस की जगह घर की चार दीवारी ने ले ली, तो यह बातचीत पूरी तरह बंद हो गई। स्टडी का अंदाजा है कि 2011-2019 के मुकाबले 2022-2024 के दौरान कर्मचारियों में बढ़े अकेलेपन और मानसिक तनाव में करीब एक तिहाई हिस्सा घर से काम करने की बढ़ती आदत का है।
घर से काम करने के फायदे भी हैं, जैसे आने-जाने का टाइम बचता है और ट्रैफिक जाम की थकान नहीं झेलनी पड़ती, टाइम में फ्लेक्सिबिलिटी मिलने से घर की जिम्मेदारियां संभालना आसान हो जाता है, और पर्सनल लाइफ और काम के बीच बेहतर बैलेंस बन पाता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि व्यस्त ऑफिस डे में पांच मिनट की छोटी बातचीत बेकार लग सकती है, लेकिन जब ये छोटी बातचीत धीरे-धीरे जिंदगी से गायब होने लगती है, तो इसका मानसिक सेहत पर बुरा असर पड़ता है। स्टडी लगातार पांच दिन ऑफिस जाने के लिए दबाव नहीं डालती, बल्कि यह देखती है कि ऑफिस के हटने के बाद हम अपने सोशल रिश्ते कैसे बचाए रखें। निष्कर्ष यही है कि घर से काम करने की सुविधा आज की जिंदगी का बड़ा फायदा है, लेकिन दिमाग को हेल्दी रहने के लिए बातचीत और लोगों से मेलजोल की जरूरत होती है।