वर्धा में ओबीसी छात्रों के दो हॉस्टल अब भी किराए के मकान में, सिंदी मेघे की जमीन का ट्रांसफर अटका
वर्धा जिले में ओबीसी लड़के-लड़कियों के लिए चल रहे दो हॉस्टल किराए की बिल्डिंग में चल रहे हैं, अपनी बिल्डिंग के लिए सिंदी मेघे में जमीन तो तय हो गई है पर ट्रांसफर अभी अटका है।
वर्धा जिले के नालवाडी इलाके में ओबीसी लड़कों और लड़कियों के लिए दो अलग-अलग हॉस्टल चलाए जा रहे हैं, लेकिन दोनों ही अभी किराए की बिल्डिंग में चल रहे हैं। इन छात्रों के पास अपनी हक की बिल्डिंग नहीं है, इसलिए उन्हें किराए की जगह पर ही रहने की सुविधा दी गई है। इस बीच जिला प्रशासन के पास अलग हॉस्टल बिल्डिंग बनाने का प्रस्ताव भेजा गया है और सिंदी मेघे इलाके में इसके लिए जगह भी तय कर ली गई है। पर जमीन का ट्रांसफर अभी पूरा नहीं हुआ है।
नालवाडी में लड़कों और लड़कियों के लिए अलग-अलग हॉस्टल हैं, हर एक में 100 छात्रों की क्षमता है। फिलहाल लड़कियों के हॉस्टल में 48 छात्राएं रह रही हैं, जबकि लड़कों के हॉस्टल में 60 छात्र रह रहे हैं।
दोनों हॉस्टलों की अपनी बिल्डिंग न होने की वजह से छात्रों के रहने का इंतजाम किराए की जगह में किया गया है। सरकार की तरफ से इन छात्रों को निर्वाह भत्ता भी दिया जाता है। खाने के लिए छात्रों को हर महीने 4 हजार 500 रुपए का निर्वाह भत्ता मिलता है। छात्राओं के लिए इसके साथ अलग से सफाई भत्ते का भी इंतजाम है।
ओबीसी छात्रों के लिए पक्की और अलग बिल्डिंग बनाने के मकसद से कुछ महीने पहले जिला प्रशासन के पास प्रस्ताव भेजा गया था। प्रशासन ने सिंदी मेघे इलाके की जगह हॉस्टल के लिए तय कर दी है। फिलहाल इस जगह के ट्रांसफर की प्रक्रिया चल रही है, ऐसी जानकारी है।
जमीन का ट्रांसफर पूरा होने के बाद अगला जरूरी कदम होगा बांधकाम के लिए जरूरी फंड मंजूर होना। सरकार से फंड मिलने के बाद ही दोनों हॉस्टलों की अलग बिल्डिंग बनाने का काम असल में शुरू हो पाएगा।
फिलहाल किराए की बिल्डिंग में रह रहे छात्रों को आगे अपनी बिल्डिंग में और बेहतर सुविधाएं मिलने की उम्मीद है। इसलिए सिंदी मेघे की जगह का ट्रांसफर, फंड की मंजूरी और बांधकाम की प्रक्रिया कब आगे बढ़ती है, इस पर ओबीसी छात्रों और उनके पैरेंट्स की नजर लगी है।
अगर अलग बिल्डिंग बन जाती है तो छात्रों के रहने की समस्या हमेशा के लिए सुलझने में मदद मिलेगी, और हॉस्टल की सुविधाओं में भी बढ़ोतरी होने की संभावना है।