वाई में बांध भरा है, फिर भी सूख रही हैं फसलें; दिवाली से पहले किसान परेशान
वाई तालुका में बारिश ने साथ नहीं दिया, खरीफ की फसलें झुलस गईं और दिवाली के मौके पर किसानों के घर में खुशी की जगह चिंता है।
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वाई तालुका और आसपास के इलाके का किसान इस साल कुदरत की मार से बुरी तरह टूट गया है। बारिश ने पीठ फेर ली, इसलिए खरीफ सीजन की धान, सेम, सोयाबीन, हाइब्रिड सूरजमुखी और तिल समेत कई फसलें हाथ में आते-आते झुलस गईं। पूर्वी हिस्से के कई गांवों में धान की खेती को बड़ा नुकसान हुआ है और किसानों के पास खड़ी फसल को बेबसी से देखने के सिवा कुछ नहीं बचा।
दिवाली का त्योहार दहलीज पर है, फिर भी कई किसानों के घर में त्योहार की खुशी नहीं, बल्कि चिंता का साया है। एक तरफ बांध में पानी दिखता है और दूसरी तरफ किसानों की आंखों के सामने फसलें सूख रही हैं। इसीलिए वाई तालुका के पश्चिमी और पूर्वी हिस्से में 'बांध सिरहाने और सूखा गला' जैसी हालत बन गई है, यानी बांध सिरहाने है और गला सूखा है।
पूर्वी हिस्से के गन्ना किसानों की हालत भी गंभीर है। गन्ने और रबी की फसल के लिए जितना पानी चाहिए, वह मिलेगा या नहीं और नहर से पानी का बंटवारा कैसे होगा, इस पर किसानों की नजर टिकी है। फसलें बचाने के लिए पानी की सख्त जरूरत है, लेकिन किसानों में यह भावना गहरी है कि जो पानी जमा है, उसका खेती के लिए जितना उपयोग होना चाहिए, उतना नहीं हो रहा।
राज्य सरकार ने 14 अक्टूबर 2026 को खरीफ सीजन में बारिश की कमी और सूखे के अलग-अलग मापदंडों की समीक्षा की। इसके बाद जिन तालुकाओं में ट्रिगर-1 और ट्रिगर-2 लागू हुए, उन्हें सूखाग्रस्त घोषित किया गया है। सूखा प्रबंधन संहिता 2016 के मुताबिक सूखे का आकलन करते वक्त बारिश की कमी, सूखे दिनों की अवधि और खेती पर पड़े असल असर को देखा जाता है। ट्रिगर-2 में बारिश की कमी का खेती पर हुआ असल असर अहम माना जाता है।
सूखाग्रस्त तालुकाओं के लिए सरकार ने कई उपाय घोषित किए हैं। इनमें जमीन के राजस्व में छूट, फसल कर्ज का पुनर्गठन, खेती के कर्ज की वसूली पर रोक, कृषि पंपों के बिजली बिल में रियायत और विद्यार्थियों की परीक्षा फीस में छूट शामिल हैं। लेकिन फसल के नुकसान की असल आर्थिक मदद अलग सरकारी आदेश से तय होगी, यह साफ किया गया है।
सरकार के निर्देश पर राजस्व विभाग की टीमें नुकसान वाले खेतों का निरीक्षण और पंचनामे कर रही हैं। वाई तालुका में भी प्रशासन ने खेत की मेड़ पर जाकर मुआयना किया है। उपविभागीय कार्यालय की ओर से डॉ योगेश खरमाटे ने निर्देश दिए हैं कि नुकसान झेलने वाला कोई भी खाताधारक पंचनामे से छूटना नहीं चाहिए। फिर भी पंचनामे के बाद असल मदद किसान के खाते में जमा होने तक की प्रक्रिया को बहुत आसान और तेज बनाने की जरूरत है, ताकि किसान कागजों के जंजाल से बाहर निकल सकें।
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