मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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22:08 IST

ट्रम्प सरकार की आईसीसी पर पूरी पाबंदी लगाने की तैयारी, इजराइल और अमेरिकी सैनिकों से जुड़े केस बने वजह

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन ने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय आईसीसी पर पूरी तरह से आर्थिक और प्रशासनिक पाबंदी लगाने की तैयारी शुरू कर दी है।

ट्रम्प सरकार की आईसीसी पर पूरी पाबंदी लगाने की तैयारी, इजराइल और अमेरिकी सैनिकों से जुड़े केस बने वजह
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

दुनिया भर में युद्ध अपराधों और गंभीर जुर्म पर नजर रखने वाली संस्था इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट यानी आईसीसी अपने सबसे बड़े संकट से गुजर रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का प्रशासन पूरे आईसीसी पर सख्त आर्थिक और प्रशासनिक पाबंदी लगाने की तैयारी में है। सूत्रों के मुताबिक अमेरिका ने इस न्यायालय को पूरी तरह पाबंदियों के दायरे में लाने की रणनीति बना ली है। इस पर आखिरी फैसला संयुक्त राष्ट्र महासभा यानी यूएन जनरल असेंबली की बैठक में लिया जा सकता है। अगर ऐसा हुआ तो इस वैश्विक संस्था का रोजमर्रा का कामकाज, फंडिंग, तकनीकी सेवाएं और दुनिया भर में चल रही विभिन्न जांच पूरी तरह से ठप हो सकती हैं।

आईसीसी की स्थापना साल 2002 में हुई थी। दुनिया भर में युद्ध अपराध, नरसंहार और इंसानियत के खिलाफ होने वाले गंभीर जुर्मों की निष्पक्ष जांच करना और दोषियों पर मुकदमा चलाना इस न्यायालय का मुख्य काम है। जब किसी देश की सरकार या वहां की न्याय व्यवस्था ऐसे गंभीर मामलों की जांच करने में नाकाम या अनिच्छुक होती है, तब आईसीसी दखल देकर कार्रवाई करता है। गौर करने वाली बात यह है कि अमेरिका खुद इस न्यायालय का आधिकारिक सदस्य देश नहीं है, फिर भी ट्रम्प प्रशासन की तरफ से आईसीसी पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है, जिसकी वजह से अमेरिका और आईसीसी के बीच तनाव अब चरम पर पहुंच गया है।

इस पूरे विवाद की जड़ में इजराइली नेताओं और अमेरिकी सैनिकों से जुड़े मामले हैं। ट्रम्प प्रशासन शुरू से ही आईसीसी का कड़ा विरोधी रहा है। अमेरिकी अधिकारियों की साफ मांग है कि आईसीसी ने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू समेत कुछ इजराइली नेताओं के खिलाफ जो गिरफ्तारी वारंट जारी किए हैं, उन्हें तुरंत वापस लिया जाए। इसके अलावा अफगानिस्तान युद्ध के दौरान अमेरिकी सैनिकों की तरफ से हुए संभावित युद्ध अपराधों को लेकर आईसीसी ने जो पुरानी जांच शुरू की थी, उसे भी पूरी तरह बंद करने का दबाव अमेरिका बना रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने जुलाई महीने में ही बाकी देशों से भी आईसीसी छोड़ने की सीधी अपील की थी। इससे पहले अमेरिका आईसीसी के कुछ जजों और वकीलों पर व्यक्तिगत रूप से पाबंदी लगा चुका है, लेकिन अब पूरी संस्था को ही काबू में करने या बेअसर बनाने की कोशिश हो रही है।

अमेरिका की इन संभावित पाबंदियों से आईसीसी के रोजमर्रा और तकनीकी कामकाज पर बेहद बुरा असर पड़ेगा। अगर अमेरिकी ट्रेजरी डिपार्टमेंट पूरे आईसीसी पर पाबंदी लगा देता है, तो अमेरिकी नागरिकों या किसी भी कंपनी के लिए बिना खास इजाजत के आईसीसी को पैसा, सामान, सॉफ्टवेयर या कोई भी सेवा देना कानूनन जुर्म बन जाएगा। दुनिया के ज्यादातर बैंक अमेरिकी बैंकिंग और वित्तीय व्यवस्था पर निर्भर हैं, इसलिए दुनिया भर के बैंक भी आईसीसी के साथ अपने सारे लेनदेन रोक देंगे। इसका सीधा असर न्यायालय की आईटी सेवाओं, डेटा सुरक्षा, बीमा कवरेज, नए जांचकर्ताओं की नियुक्ति और रोजमर्रा के बैंकिंग लेनदेन पर पड़ेगा। यहां तक कि न्यायालय में काम कर रहे अमेरिकी कर्मचारियों को उनकी नियमित सैलरी देना भी नामुमकिन हो जाएगा।

ट्रम्प और आईसीसी के बीच का यह टकराव कोई नई बात नहीं है। ट्रम्प ने अपने पहले कार्यकाल से ही आईसीसी के खिलाफ आक्रामक रुख अपना रखा था। साल 2024 में ट्रम्प दोबारा राष्ट्रपति चुने गए, तो यह विवाद और भड़क गया। इस बीच आईसीसी ने इजराइली नेतृत्व के खिलाफ सख्त कदम उठाए, जिसके बाद ट्रम्प प्रशासन और आक्रामक हो गया। दुनिया भर में न्याय दिलाने वाली इस संस्था का गला घोंटने के अमेरिका के इस फैसले पर दुनिया भर के मानवाधिकार संगठनों ने चिंता जताई है। जानकारों का कहना है कि ट्रम्प के इस कदम से अंतरराष्ट्रीय कानूनों का वजूद और न्यायालय की आजादी खतरे में पड़ गई है।

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