तीन डाल से गैस की शिकायत, पकाने के चार आसान घरेलू तरीके
तूर, मसूर और मटर से पेट में गैस बन सकती है। डाल पकाने का तरीका थोड़ा बदलने से यह तकलीफ आसानी से टल सकती है।
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घर के रोज के खाने में दाल होती ही है। दाल चावल हो, रसेदार दाल हो या दाल की सब्जी, दाल के बिना खाना अधूरा लगता है। दाल से प्रोटीन, फाइबर, आयरन और कैल्शियम भरपूर मिलता है। फिर भी कुछ लोगों को दाल खाते ही तकलीफ शुरू हो जाती है।
पेट भारी होना, गैस बनना, पेट फूलना और बार-बार डकार आना, ऐसी शिकायतें होती हैं। जिनका पेट नाजुक होता है, उन्हें यह और ज्यादा सताती हैं। तो क्या दाल खाना बंद कर दें? बिल्कुल नहीं। दाल खाने और बनाने का तरीका थोड़ा बदल दें तो यह तकलीफ आसानी से टाली जा सकती है।
आयुर्वेद के डॉक्टरों के मुताबिक तीन दालों से सबसे ज्यादा गैस होती है। तूर दाल, मसूर दाल और सूखे मटर या हरे मटर। इसके पीछे साइंस है। इन दालों में रैफिनोज और स्टैकियोज नाम की एक किस्म की शर्करा होती है। हमारी छोटी आंत इस शर्करा को पचा नहीं पाती।
यह बिना पची शर्करा बड़ी आंत में चली जाती है। वहां मौजूद बैक्टीरिया उसे पचाने की कोशिश करते हैं और इसी से गैस बनती है। इसी वजह से पेट फूला हुआ और बेचैन-सा लगता है। लेकिन घबराने की जरूरत नहीं, दाल सही तरीके से पकाई जाए तो यह तकलीफ नहीं होगी।
गैस से बचने के लिए चार आसान घरेलू उपाय हैं। पहला, दाल में कढ़ी पत्ता डालें। तड़के में तो हम कढ़ी पत्ता डालते ही हैं, पर दाल पकाते वक्त भी उसके 7-8 पत्ते डालिए। इससे दाल का स्वाद अच्छा आता है और वह पचने में हल्की हो जाती है। कढ़ी पत्ता पाचन सुधारने में मदद करता है।
दूसरा, थोड़ी दालचीनी डालें। दाल पकते समय दालचीनी का एक छोटा टुकड़ा डाल दें। इससे दाल की खुशबू अच्छी आती है और पेट की गैस कम होने में भी मदद मिलती है। दालचीनी ज्यादा न डालें, बस एक चुटकी काफी है।
तीसरा, काली मिर्च का इस्तेमाल करें। काली मिर्च में पाइपरीन नाम का तत्व होता है, जो पाचन के लिए अच्छा है। दाल में थोड़ी काली मिर्च कूटकर डालिए। पर जिन्हें एसिडिटी की तकलीफ है, वे तीखा कम इस्तेमाल करें।
चौथा, अदरक या सोंठ डालें। पाचन के लिए अदरक सबसे बढ़िया माना गया है। दाल पकाते वक्त थोड़ा कसा हुआ अदरक या सोंठ पाउडर डालें। इससे गैस नहीं होती और दाल जल्दी पच जाती है।
दाल बनाते समय कुछ बातें और याद रखें। सबसे जरूरी बात यह कि दाल कभी सीधे न पकाएं। पहले उसे 3-4 घंटे पानी में भिगोकर रखें। फिर वह पानी फेंक दें और नए साफ पानी में दाल पकाएं। इससे गैस करने वाले तत्व पानी के साथ निकल जाते हैं।
दूसरी बात, दाल हमेशा पूरी तरह नरम होने तक पकाएं। कच्ची दाल पचने में भारी पड़ती है। शुरू में कम मात्रा में खाकर देखें कि शरीर को कैसी लगती है। और खाते समय जल्दबाजी न करें, आराम से चबाकर खाएं।
इतना सब करने के बाद भी अगर आपको बार-बार पेट फूलना, तेज पेट दर्द, उलटी, दस्त या वजन कम होने जैसी तकलीफ हो रही है, तो फौरन डॉक्टर को दिखाएं। कभी-कभी यह तकलीफ पेट की किसी दूसरी बीमारी की वजह से भी हो सकती है, इसलिए इसे नजरअंदाज न करें।
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