TET पेपरफुटी मामला: चार्जशीट में खुलासा, जूतों में छिपाकर निकाले पेपर, सिर्फ 8 हजार में सौदा
भिवंडी की अतिरिक्त सत्र अदालत में दाखिल 3500 पन्नों की चार्जशीट में महाराष्ट्र टीईटी पेपरफुटी का पूरा तरीका सामने आया है।
महाराष्ट्र की शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी टीईटी में हुई गड़बड़ी की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने भिवंडी की अतिरिक्त सत्र अदालत में करीब 3500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। इस चार्जशीट से यह बात सामने आई है कि पेपर लीक करने के लिए बड़ी ही चालाकी से एक तरकीब अपनाई गई थी। कड़ी सुरक्षा को चकमा देकर महज 8 हजार रुपए के लिए आगरा की एक प्रिंटिंग प्रेस में यह वारदात हुई।
आगरा स्थित 'महीम पत्रण प्रायव्हेट लिमिटेड' नाम की प्रिंटिंग प्रेस में टीईटी के पेपर छापे जा रहे थे। प्रेस के आसपास पूर्व सैनिकों का पहरा था और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। यहां काम करने वाले कर्मचारियों की अच्छी तरह तलाशी ली जाती थी, लेकिन सुरक्षाकर्मियों का ध्यान जूतों के इनसोल यानी अंदर की परत पर नहीं गया। इसी कमी का फायदा उठाकर प्रेस में काम करने वाले नरेशकुमार उर्फ निक्की ने छपे हुए पेपर को मोड़कर अपने जूते के इनसोल के नीचे छिपा लिया।
बाबूलाल नाम का एक और कर्मचारी प्रेस के कमरे से पेपर निकालकर देता था, और नरेशकुमार उसे जूते में छिपाकर बाहर ले आता था। इस तरह लगातार तीन दिन, यानी 15 से 17 जून के बीच, पेपर-1 और पेपर-2 के चारों सेट बाहर निकाले गए।
प्रिंटिंग प्रेस में महीने के 12 से 15 हजार रुपए कमाने वाले इन कर्मचारियों को शुरुआत में नकद 8 हजार रुपए दिए गए थे। इसके अलावा पेपर देने के बदले उन्हें बड़ा प्लॉट देने, घर बनवा देने और बेटे की शादी करा देने का लालच भी दिया गया था।
प्रिंटिंग प्रेस से चुराए गए इन्हीं पेपर सेटों को मुख्य आरोपी ब्रिजेंद्र गुप्ता तक पहुंचाया जाता था। इसके बाद यही पेपर पढ़ने वाले या जरूरतमंद छात्रों तक पहुंचाकर हर छात्र से 80 हजार से 1 लाख रुपए तक वसूले जाते थे, साथ ही सुरक्षा के तौर पर उनके शैक्षणिक दस्तावेज और मार्कशीट भी जमा करा ली जाती थी।
इस मामले में पुलिस अब तक कुल 16 से 18 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें मुख्य आरोपी ब्रिजेंद्र गुप्ता और सोलापुर के प्रकाश पवार के अलावा बिहार, उत्तर प्रदेश और हरियाणा के संदिग्ध भी शामिल हैं। हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक यह केस फास्टट्रैक कोर्ट में चलाया जाएगा और आने वाले तीन महीनों के भीतर इसका फैसला आना जरूरी है। इस केस के लिए एडवोकेट अजय मिसर को विशेष सरकारी वकील नियुक्त किया गया है।