पूर्णेकर मामले में दानवे ने मांगी आरोपियों के सीडीआर की जांच, शिंदे पर भी साधा निशाना
अंबादास दानवे ने पूर्णेकर परिवार से मुलाकात के बाद जांच पर सवाल उठाए और निष्पक्ष अफसर व फास्ट ट्रैक कोर्ट की मांग की।
मुंबई: शिवसेना (उद्धव बाळासाहेब ठाकरे) पार्टी के नेता अंबादास दानवे ने प्रदीप पूर्णेकर के परिवार से मुलाकात की। इस मुलाकात के वक्त पूर्व सांसद राजन विचारे भी वहां मौजूद थे। मुलाकात के बाद दानवे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की और राज्य सरकार तथा पुलिस की जांच पर गंभीर सवाल खड़े किए।
दानवे की पहली मांग यह थी कि इस मामले के आरोपियों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड यानी सीडीआर की पूरी तरह जांच की जाए। उनका कहना था कि एफआईआर में जिन-जिन लोगों के नाम हैं, उन सबके सीडीआर खंगाले जाने चाहिए। दानवे ने आरोप लगाया कि जांच एजेंसी सही तरीके से काम नहीं कर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जांच करने वाले अफसरों पर आखिर किसका दबाव है।
इसी दौरान दानवे ने एकनाथ शिंदे को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा, "खुद को मसीहा समझने वाले कहां गए? इतने बड़े कार्यकर्ता का मुडदा गिरा दिया गया, तब यहां क्यों नहीं आए?"
दानवे ने एक और आरोप लगाया। उनके मुताबिक प्रदीप पूर्णेकर के साथ काम करने वाले पदाधिकारी संतोष शिर्के के दफ्तर की रेकी की गई थी। दानवे का दावा है कि इस बारे में उनके पास वीडियो और सीसीटीवी के सबूत हैं।
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जांच एजेंसियों ने ठीक से जांच नहीं की, तो उनके पास जो सबूत हैं, वे हाई कोर्ट में पेश किए जाएंगे। दानवे ने यह मांग भी रखी कि मामले की जांच किसी निष्पक्ष अफसर को सौंपी जाए और केस फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाया जाए।
सरकार ने इस मामले में एसआईटी बनाई है। फिर भी दानवे की टिप्पणी थी कि हालात में जैसा सुधार होना चाहिए था, वैसा नहीं हुआ। आरोपियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए, यह बात रखते हुए उन्होंने दोषियों को फांसी देने की मांग की।
दानवे ने कहा कि गृह विभाग मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के पास है, इसलिए वे इस मामले में खुद ध्यान दें और न्याय दिलाएं। उन्होंने साफ किया कि वे पूर्णेकर परिवार के साथ जल्द ही मुख्यमंत्री से मिलेंगे।
दानवे ने सीधी चेतावनी भी दी, "अगर मुख्यमंत्री ने न्याय नहीं दिया, तो हमारे पास दूसरे दरवाजे हैं।" अब जांच, सरकार के रुख और आगे की अदालती हलचल पर राजनीतिक गलियारों की नजर टिकी है।