तेज डीजे की आवाज से हार्ट अटैक का खतरा, जानिए पहले दिखने वाले लक्षण
डीजे की तेज और कर्कश आवाज से हृदय, नर्वस सिस्टम और ब्लड प्रेशर पर असर पड़ता है, खासकर बच्चों, प्रेग्नेंट महिलाओं और हार्ट के मरीजों के लिए यह ज्यादा खतरनाक बताया गया है।
गणपति उत्सव या किसी भी बड़े फंक्शन में डीजे और लाउडस्पीकर का इस्तेमाल आम बात है। विसर्जन जुलूस में डीजे और तेज आवाज के बिना जुलूस अधूरा लगता है, लेकिन बहुत तेज आवाज में बजने वाला डीजे हार्ट को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। तेज और कर्कश आवाज से शरीर में स्ट्रेस रिस्पॉन्स बढ़ जाता है, जिससे थोड़ी देर के लिए हार्टबीट और ब्लड प्रेशर दोनों बढ़ जाते हैं। इसी वजह से किसी भी वक्त हार्ट अटैक, स्ट्रोक या हाई ब्लड प्रेशर जैसी दिक्कतें आ सकती हैं और तबीयत बिगड़ सकती है।
यही कारण है कि जिन महिलाओं या पुरुषों को हार्ट से जुड़ी कोई बीमारी है, उन्हें तेज आवाज में बजने वाले डीजे के सामने जाने से बचना चाहिए। सीने में दर्द होना, सांस लेने में तकलीफ, चक्कर आना या अचानक बेहोश हो जाना, ऐसे लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेकर इलाज कराना चाहिए।
तेज आवाज वाले डीजे का असर सिर्फ हार्ट पर नहीं, बल्कि नर्वस सिस्टम और ब्लड प्रेशर पर भी पड़ता है। हार्ट की मसल्स को ब्लड सप्लाई करने वाली धमनियों में क्लॉट बनने से ब्लड फ्लो में रुकावट आ सकती है। कई बार अचानक हार्टबीट बढ़ जाती है और हार्ट ब्लड पंप करना बंद कर देता है, इस स्थिति में स्ट्रोक आने का खतरा ज्यादा रहता है। इसीलिए तेज आवाज में बजने वाले डीजे के सामने जाने से बचना चाहिए, वरना शरीर से जुड़ी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।
लंबे समय तक तेज आवाज वाले डीजे के आसपास रहने से शरीर में तेज स्ट्रेस रिस्पॉन्स बढ़ता है। हार्टबीट और ब्लड प्रेशर अचानक बढ़ने से शरीर की हालत बिगड़ जाती है और हाई ब्लड प्रेशर तथा इस्केमिक हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ सकता है। डीजे सिस्टम से निकलने वाला भारी बेस साउंड शरीर को अंदर से हिला देता है। इस आवाज से सिर्फ हार्ट के मरीज ही नहीं, बल्कि हेल्दी लोगों का भी हार्ट फेल हो सकता है। इसलिए हमेशा तेज आवाज को ही दोष देने के बजाय हार्ट डिजीज या हार्टबीट में गड़बड़ी की जांच कराना भी जरूरी है।
हार्ट से जुड़ी दिक्कत बढ़ने पर सीने में दबाव, कसाव या बेचैनी महसूस होना, सांस लेने में तकलीफ, बिना किसी वजह अचानक बहुत पसीना आना, जी मचलाना, चक्कर आना, अजीब सी कमजोरी या सीने का दर्द लेफ्ट आर्म, पीठ, गर्दन या नाड़ी तक फैलना, ऐसे लक्षण दिखने की संभावना ज्यादा रहती है। इसके अलावा कुछ बच्चे अचानक बेहोश हो जाते हैं और स्किन या लिप्स का नीला पड़ना, सीने में धड़कन तेज होना जैसे लक्षण दिखें तो बिल्कुल नजरअंदाज न करते हुए वक्त पर इलाज कराना जरूरी है।
तेज आवाज की तकलीफ सिर्फ हार्ट के मरीजों में नहीं, बल्कि छोटे बच्चों, प्रेग्नेंट महिलाओं और बुजुर्गों में भी देखी जाती है। जन्म से हार्ट की बीमारी या हार्टबीट से जुड़ी दिक्कत वाले बच्चों को तेज आवाज वाले डीजे के सामने ले जाने से बचना चाहिए, इससे बच्चों की बॉडी को नुकसान पहुंच सकता है। डीजे की आवाज से हमेशा के लिए बहरापन भी आ सकता है।