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सूखे से जूझते किसानों के लिए कलेक्टर वसुमना पंत से मिले विधायक सुधीर मुनगंटीवार

विधायक सुधीर मुनगंटीवार ने किसानों के प्रतिनिधिमंडल के साथ चंद्रपुर की जिलाधिकारी वसुमना पंत से मुलाकात कर सूखे से निपटने के उपाय सुझाए।

सूखे से जूझते किसानों के लिए कलेक्टर वसुमना पंत से मिले विधायक सुधीर मुनगंटीवार तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

चंद्रपुर: आसमान की तरफ टकटकी लगाए बैठा किसान, पानी के बिना सूखती फसलें, चारे के लिए भटकते मवेशी और पीने के पानी के लिए दर-दर की भटकन। सूखे की यह मार सिर्फ खेती तक सीमित नहीं है, यह गांव की जिंदगी के वजूद के सामने ही चुनौती बन गई है। ऐसे वक्त में किसानों को वादों की नहीं, उनके खेत तक पहुंचने वाले ठोस उपायों की जरूरत है। इसी को देखते हुए विधायक सुधीर मुनगंटीवार किसानों के प्रतिनिधिमंडल के साथ चंद्रपुर की जिलाधिकारी वसुमना पंत से मिले।

इस मुलाकात में जलसंरक्षण, टिकाऊ सिंचाई, कुओं को फिर से चालू करना, बिना रुकावट बिजली सप्लाई, मवेशियों के लिए चारा-पानी और सरकारी निधि के सही इस्तेमाल जैसे मुद्दों पर तफसील से बात हुई। मुनगंटीवार ने प्रशासन के सामने उपायों का एक बड़ा खाका रखा। उन्होंने कहा कि जलसंरक्षण, निजी पानी प्रबंधन और सिंचाई, इन तीन बातों पर खास ध्यान देना होगा। आगे सूखा और बढ़ भी जाए तो बल्लारपुर विधानसभा क्षेत्र के गांवों को पानी के लिए भटकना न पड़े, इसके लिए लंबे समय की योजना बनाने की बात भी उन्होंने कही। जिले के हालात देखते हुए उन्होंने मांग की कि खनिज विकास निधि का 50 प्रतिशत पैसा सूखा राहत के कामों पर खर्च हो।

मुनगंटीवार के मुताबिक बंद पड़े कुओं की सफाई कर उन्हें फिर चालू करना, कुओं और बोरवेल की मौजूदा हालत जांचना, कुओं के आसपास रेन वॉटर हार्वेस्टिंग का काम करना और मनरेगा तथा रोजगार गारंटी योजना के जरिए भूजल स्तर बढ़ाने की कोशिश करना जरूरी है। बारिश का पानी रोकने और जमीन में उतारने, मौजूदा जलस्रोतों को बचाने और पानी का सख्ती से सही इस्तेमाल पक्का करने पर भी उन्होंने जोर दिया।

उन्होंने मूल, पोंभुर्णा, बल्लारपुर और चंद्रपुर तालुकों के किसानों को टिकाऊ सिंचाई की सुविधा देने की मांग भी की। उनका कहना था कि सूखे में खेत को पानी मिलना सिर्फ पैदावार का सवाल नहीं, किसान के परिवार की रोजी-रोटी से जुड़ी जरूरत है, इसलिए प्रशासन सिंचाई के सवाल को पहले नंबर पर रखे।

गांवों की पानी सप्लाई योजनाओं की हालत और उनकी दिक्कतें जानते हुए मुनगंटीवार ने जलजीवन मिशन के कामों की पूरी समीक्षा की जरूरत बताई। उन्होंने बातचीत में बताया कि जिले में जलजीवन मिशन के तहत कुल 1,302 योजनाएं हैं, जिनमें से 650 योजनाएं चालू हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि बल्लारपुर विधानसभा क्षेत्र की सभी पानी सप्लाई योजनाओं की मौजूदा हालत, अधूरे काम, तकनीकी दिक्कतें और जरूरी निधि की पूरी जानकारी चार दिन के भीतर पेश की जाए। तकनीकी वजहों से कोई भी योजना बंद न रहे, इस पर उन्होंने जोर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि योजनाओं के काम पूरे करने के लिए जरूरी निधि सरकार से दिलाने की कार्रवाई की जाएगी।

क्षेत्रीय पानी सप्लाई योजनाओं का कटा हुआ बिजली कनेक्शन तुरंत जोड़ने की मांग करते हुए उन्होंने कहा कि सूखे को देखते हुए पुराने और बकाया बिजली बिल भरने के लिए सूखा खत्म होने तक मोहलत दी जानी चाहिए। जिला परिषद की पानी सप्लाई योजनाओं की समीक्षा के लिए राज्य के पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री गुलाबराव पाटील को बुलाया जाएगा, यह भी उन्होंने बताया। उन्हें उम्मीद है कि प्रशासन विभागों के बीच तालमेल बिठाकर लोगों को राहत देने में सक्रिय भूमिका निभाएगा।

मुनगंटीवार ने सुझाया कि सूखे से निपटने के लिए हर गांव का अलग एक्शन प्लान बने, जिसमें खेत की सड़कें, जलसंरक्षण, बारिश का पानी रोकना-जमीन में उतारना और चारा उगाने के लिए जमीन की तैयारी शामिल हो। जानवरों के पीने के पानी के लिए हौज़, टंकियां और सोलर पंप लगाए जाएं। चारे के लिए वन विभाग और पशुपालन विभाग योजना बनाएं, और कम पानी व कम समय में तैयार होने वाली मक्का की फसल को बढ़ावा देकर मक्का मिलने के लिए ऐप या पोर्टल बनाया जाए।

उन्होंने जिलाधिकारी को अलग-अलग मांगों के निवेदन भी सौंपे। सूखे को देखते हुए किसानों के कृषि पंपों को 24 घंटे बिना रुकावट बिजली देने की मांग की। सौर कृषि पंप योजना में पात्र किसानों को तय 60 दिन की मियाद में सौर कृषि पंप मिलें, इस ओर भी ध्यान दिलाया। जिला वार्षिक योजना से कम पानी और कम समय में होने वाली कुसुम, अलसी और सरसों के बीज किसानों को देने की मांग की। उनके मुताबिक फसल का तरीका हालात के हिसाब से बदलने के लिए किसानों को जरूरी मार्गदर्शन और मदद मिलना जरूरी है।

सूखे से प्रभावित पंजीकृत मछुआरों और मत्स्य सहकारी संस्थाओं के सदस्यों को मछली के बीज के नुकसान का मुआवजा देने की मांग भी मुनगंटीवार ने की। वन क्षेत्र के नालों और तालाबों को गहरा करने, जल भंडारण बढ़ाने और अवैध रेत खनन पर कार्रवाई के लिए वन विभाग और कैम्पा के अधिकारियों की बैठक बुलाने का सुझाव दिया। किसानों के बच्चों की फीस माफ करने के फैसले पर उन्होंने गोंडवाना विश्वविद्यालय को बधाई दी। सूखे का संकट बड़ा है, फिर भी योजना बनाने, प्रशासन के तालमेल और लोगों की भागीदारी से उस पर काबू पाया जा सकता है, यह भरोसा जताते हुए उन्होंने किसानों के सवालों पर फौरन कार्रवाई की मांग की।

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